भागलपुर,अंग भारत। उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाली लाइफलाइन विक्रमशिला सेतु की मरम्मत का काम तेज हो गया है। बेली ब्रिज वाले पुराने हिस्से में दो स्टील ट्रस गर्डर की लॉन्चिंग पूरी कर ली गई है। इंजीनियरों की टीम दिन-रात काम में जुटी है, लेकिन काम की जटिलता को देखते हुए 14 जनवरी तक पुल चालू करने की डेडलाइन पूरी होती नहीं दिख रही है।
कुल 8 गर्डर लगने हैं, अभी 2 ही लगे -: तकनीकी विभाग के मुताबिक सेतु के कुल चार क्षतिग्रस्त हिस्सों को ठीक किया जाना है। हर हिस्से में दो-दो स्टील गर्डर लगने हैं, यानी कुल आठ गर्डर। अभी तक सिर्फ दो जगहों पर ही गर्डर लग पाए हैं। बाकी दो हिस्सों में अभी भी पुरानी और जर्जर कंक्रीट बीम को काटने का बेहद संवेदनशील काम चल रहा है।इंजीनियरों की योजना के मुताबिक गर्डर लगने के बाद लोहे की चादरें बिछाई जाएंगी, फिर सरिया का जाल बांधकर कंक्रीट स्लैब की ढलाई होगी। लक्ष्य 15 दिसंबर तक ढलाई पूरी करने का है।
28 दिन की क्योरिंग में फंसा पेंच -: असली पेंच तकनीकी नियमों में है। कंक्रीट ढलाई के बाद कम से कम 28 दिन तक उसकी तराई (क्योरिंग) जरूरी होती है। उसके बाद ही लोड टेस्ट हो सकता है। इस वैज्ञानिक प्रक्रिया को तेज नहीं किया जा सकता। इसलिए 15 दिसंबर को ढलाई होने के बाद भी जनवरी के मध्य तक पुल का पूरी तरह चालू होना मुश्किल है।पुल का वजन कम करने के लिए टीम ने एक और काम शुरू किया है। पुराने कंक्रीट के फुटपाथ और भारी रेलिंग को हटाकर वहां हल्के स्टील के ढांचे लगाए जा रहे हैं, ताकि पुल पर लोड कम पड़े। बचे हुए दो हिस्सों में नई बेयरिंग लगाने के बाद बाकी गर्डर लॉन्च किए जाएंगे।
वैकल्पिक व्यवस्था शुरू -: लोगों को परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन ने बरारी बियाडा घाट से मालवाहक जहाजों का परिचालन शुरू कराया है, जिससे बड़ी गाड़ियों को गंगा पार कराया जा रहा है।







