लखनऊ,अंग भारत। उत्तर प्रदेश सरकार ने गोतस्करी और अवैध पशु वध के खिलाफ एक निर्णायक जंग छेड़ दी है, जिसके परिणाम अब धरातल पर स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने वर्ष 2020 में गोवध निवारण कानून में कड़े संशोधन किए, जिसका सीधा उद्देश्य संगठित अपराध की कमर तोड़ना था। इन सख्त कानूनों के चलते अब तक राज्य भर में 14,182 मुकदमे दर्ज किए गए हैं और 35,924 आरोपितों को सलाखों के पीछे भेजा गया है। यह कार्रवाई केवल एफआईआर तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार ने अपराधियों की आर्थिक रीढ़ तोड़ने के लिए उनकी करोड़ों की संपत्ति जब्त करने का साहसी कदम उठाया है।
कानून का सख्त दायरा
वर्ष 2020 में लाए गए ‘उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश’ ने इस पूरे मामले में एक मील का पत्थर स्थापित किया है। पहले के मुकाबले अब कानून इतना सख्त है कि अपराधी खौफ खाने लगे हैं। इस अध्यादेश के मुख्य प्रावधानों ने प्रशासन को व्यापक अधिकार दिए हैं:
- कठोर कारावास: गोहत्या के दोषी पाए जाने पर अब 10 साल तक की कठोर सजा का प्रावधान है।
- भारी जुर्माना: दोषी पर 3 से 5 लाख रुपये तक का अर्थदंड लगाया जा सकता है।
- अंगभंग पर सजा: यदि कोई गोवंश के साथ क्रूरता करता है या उन्हें अंगभंग करता है, तो उसे 7 साल की जेल और 3 लाख रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।
आर्थिक प्रहार और जब्ती
केवल जेल भेजने से संगठित अपराध का खात्मा नहीं होता, इसलिए योगी सरकार ने अपराधियों की ‘कमाई’ पर निशाना साधा है। उत्तर प्रदेश पुलिस के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, गैंगस्टर एक्ट की धारा 14(1) का उपयोग करते हुए अपराधियों की लगभग 83 करोड़ 32 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। इसमें अवैध बूचड़खानों या तस्करी से खरीदी गई जमीन, आलीशान मकान और गाड़ियां शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि जब तक अपराधी आर्थिक रूप से सक्षम रहेंगे, उनका नेटवर्क दोबारा पनप सकता है। इसीलिए, उनकी अवैध संपत्तियों को कुर्क करना इस रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
एनएसए और गुंडा एक्ट
पुलिस ने इस अभियान में सामान्य कानूनी धाराओं के साथ-साथ कठोर निवारक कानूनों का भी खुलकर उपयोग किया है। इन 35,924 आरोपितों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई का ब्यौरा चौंकाने वाला है:
| कार्रवाई का प्रकार | आरोपितों की संख्या |
|---|---|
| गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई | 13,793 |
| गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई | 14,305 |
| राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) | 178 |
नेटवर्क और निगरानी
उत्तर प्रदेश पुलिस के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि गोतस्करी के अंतरराज्यीय गिरोहों को ध्वस्त करने के लिए जिलास्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इन विशेष टीमों की रणनीति बहुआयामी है:
- खुफिया तंत्र: सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष निगरानी बढ़ाई गई है ताकि पशुओं की तस्करी को रोका जा सके।
- रात्रि गश्त: संवेदनशील जिलों में पुलिस पेट्रोलिंग को दोगुना कर दिया गया है।
- परिवहन निगरानी: पशुओं को ले जाने वाले हर वाहन की सघन जांच अनिवार्य कर दी गई है।
अवैध बूचड़खानों पर लगाम
पिछले कुछ वर्षों में सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि राज्य में सक्रिय अवैध बूचड़खानों को पूरी तरह से बंद करना रहा है। खुफिया सूचनाओं के आधार पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने छापेमारी कर अवैध धंधों को नेस्तनाबूद किया है। योगी सरकार की इस सख्त नीति के कारण न केवल पशु तस्करी में कमी आई है, बल्कि गोवंश की सुरक्षा के प्रति समाज में एक सकारात्मक संदेश भी गया है। स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी और पुलिस की सतर्कता ने मिलकर इस संगठित अपराध को हाशिए पर धकेल दिया है।
सरकार का यह मॉडल अब अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन रहा है, जहाँ संगठित अपराध और गौ-संरक्षण को लेकर गंभीर चुनौतियां हैं। आने वाले समय में भी प्रशासन का यही रुख बरकरार रहने की उम्मीद है, ताकि राज्य की शांति व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव को कोई भी गिरोह भंग न कर सके।








