पटना,अंग भारत । बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आने वाले बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड (BMSICL) के उप महाप्रबंधक (DGM) पंकज कुमार के आवास और कार्यालय पर शुक्रवार को की गई छापेमारी में करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति का खुलासा हुआ है। इस कार्रवाई में एसवीयू की टीम ने 32 लाख रुपये नकद और सवा करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के सोने-हीरे के जेवरात बरामद किए हैं।
छापेमारी की मुख्य घटनाएं
एसवीयू की टीम जब पटना के कंकड़बाग स्थित पृथ्वीपुर में पंकज कुमार के आवास पर पहुंची, तो वहां हड़कंप मच गया। तलाशी के दौरान पंकज कुमार ने सबूत मिटाने की कोशिश की। उन्होंने घर में रखे 32 लाख रुपये नकद और सोने के आभूषणों को फेंकने का प्रयास किया, लेकिन सतर्क निगरानी टीम ने तत्परता दिखाते हुए सब कुछ अपने कब्जे में ले लिया। मौके से बरामद गहनों की कीमत लगभग एक करोड़ 31 लाख रुपये आंकी गई है।
आय से अधिक संपत्ति
जांच एजेंसी ने पंकज कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि उनके पास अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से करीब 94 लाख 46 हजार 66 रुपये अधिक की संपत्ति मौजूद है। यह मामला राज्य के सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्टाचार की गंभीरता को दर्शाता है।
संपत्ति का विवरण
एसवीयू की जांच में पंकज कुमार और उनकी पत्नी के नाम पर खरीदी गई कई अचल संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं। इन संपत्तियों का विवरण नीचे दिया गया है:
- शिवम अपार्टमेंट, कंकड़बाग: फ्लैट संख्या 305 और 405।
- कनिका मैहर अपार्टमेंट, कदम कुआं: फ्लैट संख्या 105।
- निवेश के दस्तावेज: कई वित्तीय संस्थानों में निवेश और बैंक खातों की जानकारी।
जांच के दायरे में निवेश
छापेमारी के दौरान जांच अधिकारियों को डेढ़ सौ से अधिक सोने के आभूषणों की रसीदें मिली हैं। ये रसीदें पंकज कुमार के पूरे सेवा काल के दौरान की हैं। अब एसवीयू इन रसीदों की गहन जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन कीमती गहनों को खरीदने के लिए पैसा कहां से आया था। इसके साथ ही, विभिन्न बैंक खातों और वित्तीय निवेशों के कागजातों की भी पड़ताल की जा रही है।
सरकारी तंत्र पर असर
स्वास्थ्य विभाग जैसे संवेदनशील महकमे में तैनात अधिकारी द्वारा इस तरह की अकूत संपत्ति जुटाना एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। पंकज कुमार पर आरोप है कि उन्होंने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग कर गैर-कानूनी तरीके से धन अर्जित किया। एसवीयू की यह कार्रवाई न केवल पंकज कुमार के लिए मुसीबत का सबब बनी है, बल्कि विभाग के अन्य भ्रष्ट अधिकारियों के बीच भी डर का माहौल पैदा कर दिया है।
अगली कानूनी प्रक्रिया
फिलहाल एसवीयू के अधिकारी बरामद दस्तावेजों का विश्लेषण कर रहे हैं। आने वाले दिनों में पंकज कुमार और उनके परिवार के सदस्यों से पूछताछ की जा सकती है। यदि आय के ज्ञात स्रोतों और बरामद संपत्ति में बड़ा अंतर पाया जाता है, तो भविष्य में कुर्की और अन्य कठोर कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं। इस मामले में एसवीयू की टीम पूरी पारदर्शिता के साथ साक्ष्यों को इकट्ठा कर रही है ताकि अदालत में इसे पुख्ता तरीके से रखा जा सके।
“भ्रष्टाचार के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाते हुए विशेष निगरानी इकाई लगातार ऐसे तत्वों को चिह्नित कर रही है जो लोक सेवक रहते हुए पद का दुरुपयोग कर रहे हैं।”
यह मामला स्पष्ट करता है कि बिहार में अब भ्रष्ट अधिकारियों की खैर नहीं है। एसवीयू की कार्रवाई एक कड़ी चेतावनी है कि जनता के पैसे या अवैध कमाई से बनाई गई संपत्तियों का हिसाब देना ही होगा।








