काठमांडू,अंग भारत। नेपाल में प्रतिनिधि सभा चुनाव की मतगणना ने राजनीति के स्थापित समीकरणों को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है। शुरुआती रुझानों में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) की ऐतिहासिक बढ़त ने न केवल पारंपरिक राजनीतिक दलों को चौंकाया है, बल्कि नेपाल के मतदाता वर्ग में आए बड़े बदलाव को भी स्पष्ट कर दिया है। वर्तमान में 165 सीटों में से लगभग 60 सीटों के रुझान प्राप्त हुए हैं, जिनमें 51 सीटों पर राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के उम्मीदवार अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वियों से काफी आगे निकल चुके हैं। यह आकंड़ा दर्शाता है कि नेपाली जनता एक नई दिशा और नए नेतृत्व की तलाश में है।
मतगणना की वर्तमान स्थिति
नेपाल निर्वाचन आयोग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, मतदान संपन्न होने के तुरंत बाद अधिकांश जिलों में रात के समय ही मतगणना शुरू कर दी गई थी। सुरक्षा व्यवस्था के सख्त इंतजामों के बीच, देश भर के मुख्य निर्वाचन कार्यालयों में मतपेटियों की गिनती जारी है। किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए मतगणना केंद्रों के बाहर भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। आयोग के अनुसार, प्रत्यक्ष निर्वाचन प्रणाली और समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली, दोनों के लिए अलग-अलग गणना की प्रक्रिया संचालित की जा रही है, ताकि परिणामों की पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
प्रमुख दलों का प्रदर्शन
आरंभिक रुझानों की गहराई से समीक्षा करें तो स्थापित दलों का दबदबा काफी कमजोर होता दिखाई दे रहा है। आंकड़ों की स्थिति कुछ इस प्रकार है:
- नेपाली कांग्रेस: अब तक महज 5 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है।
- नेकपा एमाले (केपी ओली की पार्टी): 4 सीटों पर आगे चल रही है।
- नेकपा माओवादी (प्रचंड की पार्टी): फिलहाल सिर्फ 1 सीट पर बढ़त बना पाई है।
यह रुझान बताते हैं कि दशकों से सत्ता पर काबिज दलों के प्रति जनता का मोहभंग हुआ है। हालांकि, कुछ सीटों पर राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के उम्मीदवार बेहद कम अंतर से पीछे भी हैं, जिससे मुकाबला अंतिम समय तक रोमांचक बना रहेगा।
राजनीतिक बदलाव के संकेत
राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की यह बढ़त आकस्मिक नहीं है। विश्लेषकों का मानना है कि युवाओं और शहरी मतदाताओं ने इस बार ‘सिस्टम’ बदलने के लिए मतदान किया है। पारंपरिक राजनीतिक घरानों की कार्यशैली और पुरानी विचारधाराओं से परे जाकर, जनता ने उन उम्मीदवारों को चुना है जो भ्रष्टाचार के खिलाफ और सुशासन के मुद्दे पर मुखर रहे हैं। केपी ओली की पार्टी और प्रचंड के नेतृत्व वाली माओवादी पार्टी का पिछड़ना, नेपाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत का संकेत हो सकता है।
आयोग की कार्यप्रणाली
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि परिणाम आने में कुछ समय लग सकता है। चूंकि, प्रत्यक्ष प्रणाली के तहत उम्मीदवारों की घोषणा के साथ-साथ समानुपातिक प्रतिनिधित्व के लिए मतों की गणना एक जटिल प्रक्रिया है, इसलिए जल्दबाजी में कोई भी आधिकारिक घोषणा करना संभव नहीं है। आयोग के अधिकारी पूरी निष्पक्षता से इस प्रक्रिया को संपन्न करवा रहे हैं। जब तक सभी जिलों से अंतिम मतपत्रों की गिनती पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी दल को पूर्ण बहुमत का दावा करने से बचना चाहिए।
सुरक्षा और शांति
मतगणना के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। निर्वाचन क्षेत्रों में संवेदनशील केंद्रों की पहचान कर वहां सीसीटीवी और अतिरिक्त सुरक्षा घेरा बनाया गया है। स्थानीय निवासी भी इस बार चुनावी नतीजों को लेकर काफी जागरूक हैं और मतगणना केंद्रों के पास शांति बनाए रखने में सहयोग कर रहे हैं। आने वाले 48 घंटे नेपाल की राजनीतिक तस्वीर को पूरी तरह स्पष्ट कर देंगे कि क्या वाकई देश में एक नई सरकार का उदय होने जा रहा है या स्थापित दल अपनी खोई हुई साख वापस लाने में सफल होंगे।








