कीव/वॉशिंगटन,अंग भारत। यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोलते हुए उनके बयानों को पूरी तरह झूठा बताया है। जेलेंस्की ने कहा कि ट्रंप अमेरिका में डीजल की बढ़ती कीमतों के लिए रूसी तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेन के हमलों को जिम्मेदार ठहराकर असली मुद्दे से ध्यान भटका रहे हैं।रूस के अंतरराष्ट्रीय न्यूज नेटवर्क रशिया टुडे (आरटी) के मुताबिक, स्टीवन बार्टलेट के पॉडकास्ट ‘द डायरी ऑफ ए सीईओ’ में जेलेंस्की ने कहा कि रूसी डीजल निर्यात का अमेरिका में ईंधन कीमतों पर सीधा असर सीमित है। ट्रंप के दावे गलत जानकारी हैं।जेलेंस्की ने सवाल उठाया कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति ऊर्जा कीमतों को लेकर इतने चिंतित हैं तो अमेरिकी कंपनियां दूसरे देशों को ऊर्जा का निर्यात क्यों जारी रखती हैं? उन्होंने कहा कि हर समस्या का दोष यूक्रेन पर डाल दिया जाता है और देश के नेता के तौर पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाया जाता है।
जेलेंस्की बोले – असली संकट होर्मुज जलडमरूमध्य में -: जेलेंस्की के मुताबिक मौजूदा ऊर्जा संकट की असली वजह ईरान से जुड़ा संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधित समुद्री यातायात है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम है, वहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से बाजार में दबाव बढ़ा है।वहीं ट्रंप लगातार यूक्रेन से रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने की अपील कर रहे हैं। ट्रंप का तर्क है कि ऐसे हमलों से वैश्विक सप्लाई प्रभावित होती है और कीमतें बढ़ती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पुतिन की तुलना में जेलेंस्की से बातचीत करना ज्यादा कठिन रहा है और यूक्रेन को ऐसा नेतृत्व चाहिए जो अमेरिका की मध्यस्थता में बाधा न डाले।
रूस ने बढ़ाई डीजल सप्लाई -: रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक संकट कम करने के लिए वॉशिंगटन ने रूसी डीजल निर्यात पर कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी ढील दी थी, जिसे जेलेंस्की ने कमजोर फैसला बताया। वहीं रूस ने अमेरिकी और वैश्विक बाजारों में डीजल सप्लाई बढ़ाने पर सहमति जताई है। मॉस्को ने तुरंत 3 लाख टन से ज्यादा डीजल, नवंबर में 5 लाख टन और आगे अतिरिक्त सप्लाई की योजना बताई है।रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी जेलेंस्की पर वैश्विक डीजल संकट कम करने के प्रयासों में बाधा डालने का आरोप लगाया।अमेरिका में सितंबर में कुछ बाजारों में डीजल 6.50 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर और कैलिफोर्निया में 8 डॉलर प्रति गैलन के पार चला गया है। 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले ईंधन की बढ़ती कीमतें ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ा घरेलू मुद्दा बन गई हैं।







