नई दिल्ली,अंग भारत। सोमवार को संसद के दोनों सदनों में अलग-अलग दृश्य देखने को मिले, जहां एक ओर लोकसभा में भारी हंगामे के कारण कामकाज ठप रहा, वहीं दूसरी ओर राज्यसभा में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया के गंभीर हालात पर सरकार का पक्ष रखा। लोकसभा में जैसे ही कार्यवाही की शुरुआत हुई, विपक्षी सांसदों ने कई मुद्दों को उठाकर शोर-शराबा शुरू कर दिया। सदन के भीतर बढ़ते इस व्यवधान को देखते हुए पीठासीन अधिकारी एनके रामचन्द्रन ने कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए रोकने का आदेश दिया।
विदेश मंत्री का वक्तव्य
राज्यसभा में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर भारत की स्थिति को स्पष्ट करते हुए केंद्र सरकार के आधिकारिक रुख को दोहराया। उन्होंने सदन को बताया कि भारत सरकार इस क्षेत्र में बढ़ती हिंसा और अस्थिरता को लेकर बेहद गंभीर है। विदेश मंत्री ने जानकारी दी कि भारत ने 20 फरवरी को ही एक औपचारिक बयान जारी कर अपनी चिंताएं दुनिया के सामने रखी थीं।
डॉ. जयशंकर ने आगे कहा कि भारत का कूटनीतिक विश्वास हमेशा से शांति की स्थापना पर केंद्रित रहा है। उन्होंने सभी शामिल पक्षों से संयम बरतने की अपील की ताकि निर्दोष लोगों की जान बचाई जा सके और स्थिति को और बिगड़ने से रोका जा सके। भारत का स्पष्ट मानना है कि युद्ध के मैदान में समाधान तलाशने के बजाय बातचीत की मेज पर लौटना ही एकमात्र विकल्प है जो दीर्घकालिक शांति दिला सकता है।
सदन में कूटनीतिक रुख
पश्चिम एशिया के हालातों पर डॉ. एस जयशंकर ने भारत की नीतियों के कुछ प्रमुख बिंदु साझा किए। सरकार द्वारा अपनाई गई रणनीतिक सोच को नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| प्रमुख नीतिगत बिंदु | विवरण |
|---|---|
| शांति का आग्रह | हिंसा रोकने के लिए संयम बरतना |
| कूटनीतिक वार्ता | संवाद को शांति का एकमात्र माध्यम मानना |
| वैश्विक जिम्मेदारी | अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति के लिए आवाज उठाना |
राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत की तटस्थता का आधार मानवीय मूल्यों और आपसी सुरक्षा पर आधारित है। कूटनीति के माध्यम से तनाव घटाने का भारत का पुराना अनुभव रहा है, जिसे इस संवेदनशील मामले में भी प्राथमिकता दी जा रही है।
लोकसभा की स्थिति
दूसरी ओर, लोकसभा में स्थिति बिल्कुल उलट थी। सदन के भीतर विपक्ष के सदस्यों ने नारेबाजी करते हुए कामकाज में बाधा उत्पन्न की। पीठासीन अधिकारी एनके रामचन्द्रन को व्यवस्था बनाने के लिए कई बार प्रयास करना पड़ा, लेकिन हंगामे के चलते कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी। ऐसी स्थितियां अक्सर विधायी कार्यों में देरी का कारण बनती हैं और देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं हो पाती है।
शांति और संवाद ही किसी भी वैश्विक संकट का सबसे प्रभावी हल है। भारत ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीति का समर्थन किया है। — डॉ. एस जयशंकर, विदेश मंत्री
संसद का कामकाज सुचारू रूप से चले, इसके लिए सभी राजनीतिक दलों के बीच आम सहमति का होना जरूरी है। हालांकि सोमवार के दिन संसद के दोनों सदनों की तस्वीर अलग थी, लेकिन विदेश मंत्रालय के स्तर पर लिया गया स्टैंड यह दर्शाता है कि केंद्र सरकार दुनिया के कठिन हालात पर बारीक नजर रखे हुए है। भारत आने वाले समय में भी इस दिशा में अपनी कूटनीतिक कोशिशें जारी रखेगा ताकि पश्चिम एशिया में स्थिरता बहाल हो सके।








