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18 जिला परिषद सदस्यों ने अध्यक्ष के खिलाफ लाया अविस्वास प्रस्ताव

भागलपुर, अंग भारत। बिहार के भागलपुर जिला परिषद में इन दिनों राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है। जिला परिषद अध्यक्ष के विरुद्ध 18 सदस्यों ने एकजुट होकर अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। इस कदम से जिले की राजनीति में हलचल मच गई है और प्रशासनिक कामकाज पर भी असर पड़ने की संभावना है। अविश्वास प्रस्ताव की यह प्रक्रिया पूरी तरह से लोकतांत्रिक नियमों के तहत शुरू की गई है, जिसमें सदस्यों ने अध्यक्ष की कार्यशैली और विकास कार्यों में उदासीनता को मुख्य मुद्दा बनाया है।

अविश्वास प्रस्ताव का आधार

जिला परिषद के असंतुष्ट सदस्यों का स्पष्ट आरोप है कि अध्यक्ष के कार्यकाल में विकास कार्यों की गति बेहद धीमी रही है। सदस्यों के अनुसार, पिछले कुछ समय से परिषद की बैठकों में उनकी बातों को अनसुना किया जा रहा था। इस खेमे का नेतृत्व करने वाले सदस्यों ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली योजनाओं का लाभ जनता तक सही तरीके से नहीं पहुँच पा रहा है।

  • योजनाओं के क्रियान्वयन में भारी पारदर्शिता का अभाव।
  • स्थानीय प्रतिनिधियों के सुझावों को नजरअंदाज करना।
  • विकास कार्यों के लिए आवंटित बजट का सही उपयोग न होना।
  • जिला परिषद की बैठकों में सदस्यों की सक्रिय भागीदारी की कमी।

सदस्यों की रणनीतिक लामबंदी

इस पूरे घटनाक्रम के पीछे जिला परिषद सदस्यों की आपसी एकजुटता अहम है। 18 सदस्यों का एक साथ आना यह दर्शाता है कि अध्यक्ष के प्रति अविश्वास काफी गहरा है। इस खेमे ने लिखित रूप में अपना पक्ष रखते हुए जिला प्रशासन के समक्ष अविश्वास प्रस्ताव की कॉपी सौंपी है। एक सदस्य ने बताया कि यह कदम रातों-रात नहीं उठाया गया, बल्कि महीनों की उपेक्षा के बाद मजबूरन ऐसा करना पड़ा।

प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया

पंचायती राज अधिनियम के तहत, किसी भी पदधारी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए सदस्यों का एक निश्चित बहुमत होना आवश्यक है। जिला परिषद के इन 18 सदस्यों ने इस नियम का कड़ाई से पालन किया है। अब प्रशासनिक स्तर पर इसकी जांच होगी। नियमानुसार, प्रस्ताव मिलने के बाद एक विशेष बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें मतदान के जरिए अध्यक्ष की कुर्सी का फैसला होगा।

“विकास के नाम पर जिस तरह की सुस्ती देखी जा रही थी, उससे हम सभी सदस्य काफी आहत थे। जनता हमें जवाबदेह मानती है, इसलिए हमने पद की गरिमा और क्षेत्र के विकास के लिए यह प्रस्ताव रखा है,” एक जिला परिषद सदस्य ने अपना पक्ष रखते हुए कहा।

राजनीतिक नफा-नुकसान

भागलपुर की राजनीति में यह हलचल आगामी चुनाव और परिषद के समीकरणों को पूरी तरह से बदल सकती है। यदि अध्यक्ष को अपना पद बचाना है, तो उन्हें अगले कुछ दिनों में बाकी सदस्यों को अपने पक्ष में करना होगा। वहीं, अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले गुट के सामने चुनौती यह है कि वे अपनी संख्या को मतदान के दिन तक बरकरार रखें।

क्या होगा अगला कदम?

आने वाले समय में अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। प्रशासन द्वारा बैठक की तारीख तय होते ही, भागलपुर जिला परिषद में शक्ति परीक्षण देखने को मिलेगा। जो भी परिणाम आए, लेकिन एक बात साफ है कि जनप्रतिनिधियों के बीच बढ़ते तनाव का असर सीधे तौर पर जिले की पंचायती विकास योजनाओं पर पड़ेगा।

इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क है। किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की समस्या न हो, इसके लिए विशेष निगरानी रखी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंचायत स्तर पर यह अविश्वास प्रस्ताव स्थानीय राजनीति को एक नई दिशा देने वाला साबित होगा, जहाँ सदस्यों ने अपनी आवाज बुलंद करना सीख लिया है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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