रांची,अंग भारत। झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र का पहला दिन राज्य की राजनीति में भूचाल लेकर आया। विधानसभा के भीतर और बाहर जिस तरह का विरोध प्रदर्शन देखने को मिला, उसने यह स्पष्ट कर दिया कि युवाओं का रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली का मुद्दा इस सत्र के केंद्र में रहेगा। सदन की कार्यवाही शुरू होने के पहले ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के विधायकों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग करते हुए जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का मुख्य आरोप झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की चयन प्रक्रियाओं में हुई कथित अनियमितताओं को लेकर है। भाजपा विधायकों ने इस दौरान हाथों में तख्तियां लेकर परीक्षा देने वाले छात्रों के संघर्ष को अपना समर्थन दिया। विपक्ष की मांग है कि इस पूरे घोटाले की सीबीआई जांच हो और मुख्यमंत्री जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ें।
सदन के बाहर विरोध
विधानसभा परिसर में सुबह से ही गहमागहमी का माहौल था। कार्यवाही शुरू होने से पहले ही एनडीए के विधायक हाथों में नारे लिखी तख्तियां लेकर मुख्य द्वार पर जमा हो गए। इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई खुद नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल कर रहे थे। इनके साथ नीरा यादव और उज्जवल दास सहित पार्टी के कई अन्य प्रमुख विधायक भी सरकार विरोधी नारों के साथ प्रदर्शन में शामिल हुए। विधायकों का कहना था कि सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है और योग्य उम्मीदवारों के हक को मारा जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर भ्रष्ट तंत्र को संरक्षण देने का सीधा आरोप लगाया।
नीरा यादव के तर्क
विधायक नीरा यादव ने मीडिया के सामने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े प्रहार किए। उन्होंने कहा कि जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में जिस तरह से एक के बाद एक बड़ी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं, उससे साफ है कि पूरी प्रणाली ही सवालों के घेरे में है। नीरा यादव ने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन सरकार इस पूरे मामले की जांच सीआईडी को सौंपकर केवल लीपापोती करने की कोशिश में जुटी है ताकि बड़े चेहरों को बचाया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई का दखल जरूरी है। साथ ही, उन्होंने 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा पीटी परीक्षा को तुरंत रद्द करने की मांग दोहराई।
सत्ता पक्ष का रुख
विपक्ष के इन तीखे हमलों पर कैबिनेट मंत्री सुदिव्य सोनू ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि पुरानी फाइलों का हवाला देते हुए कहा कि जब राज्य में भाजपा का शासन था, तब भी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई थीं। मंत्री सुदिव्य सोनू ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर नैतिकता की बात है, तो सबसे पहले भाजपा नेताओं को अपने उन रिश्तेदारों का इस्तीफा दिलाना चाहिए जो पिछली सरकार के समय विवादों के घेरे में आए थे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सीबीआई जांच की मांग करना केवल मामले को लटकाने और इस पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने का जरिया है। मंत्री ने विपक्ष को नसीहत दी कि वे छात्रों के भविष्य के संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति करना बंद करें।
सरकार की पहल
मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि सरकार छात्रों के हितों के प्रति बेहद गंभीर है और किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। सरकार ने आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के लिए मंत्रियों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
- सरकार के प्रतिनिधिमंडल और आंदोलनकारी छात्रों के बीच जल्द ही वार्ता होगी।
- जांच एजेंसियां अपना काम पूरी मुस्तैदी से कर रही हैं।
- युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सभी विकल्प खुले हैं।
सुधार के उपाय
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर उठने वाले विवादों ने पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता को हिला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जांच कराने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पूरी प्रणाली को दुरुस्त करना होगा।
सच्चे लोकतंत्र में युवाओं का विश्वास ही सबसे बड़ी पूंजी है, जिसे सुरक्षित रखना सरकार का प्राथमिक कर्तव्य है।
| सुधार का क्षेत्र | आवश्यक कदम |
|---|---|
| पारदर्शिता | परीक्षा आयोजन में डिजिटल और मैनुअल ऑडिट |
| सुरक्षा | प्रश्न पत्र लीक रोकने हेतु सख्त प्रोटोकॉल |
| समयबद्धता | नियुक्ति का एक वार्षिक कैलेंडर जारी करना |
अब सवाल यह है कि क्या यह राजनीतिक खींचतान मानसून सत्र के अंत तक कोई ठोस नतीजा लाएगी या फिर यह केवल आरोप-प्रत्यारोप का दौर बनकर रह जाएगी। सरकार के लिए छात्रों के गुस्से को शांत करना इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता है, वहीं विपक्ष भी इस मुद्दे को किसी भी कीमत पर छोड़ने के मूड में नहीं है।








