Founder – Mohan Milan

गंगा-कोसी के बढ़ते जलस्तर से बढ़ी चिंता, प्रशासन अलर्ट

भागलपुर के नवगछिया में गंगा और कोसी नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण तटबंधों पर मंडराता बाढ़ का खतरा और अलर्ट पर तैनात प्रशासन।

भागलपुर,अंग भारत। भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल में गंगा और कोसी नदियों के जलस्तर में हो रही लगातार बढ़ोतरी से तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। नदियों का पानी अब सीधे तौर पर प्रमुख तटबंधों के ऊपरी हिस्सों और निचले मैदानी इलाकों को छूने लगा है, जिससे नदी किनारे बसे गांवों में रहने वाले हजारों लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। हालांकि, जल संसाधन विभाग के अभियंताओं और अधिकारियों का दावा है कि स्थिति नियंत्रण में बनी हुई है और सभी तटबंध फिलहाल सुरक्षित हैं। कोसी और गंगा दोनों ही नदियों में लगातार बढ़ते पानी ने प्रशासनिक मशीनरी को हाई अलर्ट पर ला खड़ा किया है, क्योंकि पानी कई जगहों पर चेतावनी स्तर को पार कर गया है।

कोसी का बढ़ता रौद्र रूप

मंगलवार सुबह छह बजे जल संसाधन विभाग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि जेबी चोरहर में कोसी नदी का उफान सबसे अधिक डराने वाला साबित हो रहा है। यहाँ कोसी का जलस्तर 5 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी के साथ 30.85 मीटर के स्तर पर पहुंच गया है। यह जलस्तर चेतावनी के स्तर, जो कि 30.77 मीटर है, से पूरे 8 सेंटीमीटर ऊपर चला गया है। हालाँकि इस क्षेत्र में खतरे का लाल निशान 31.77 मीटर पर तय किया गया है, जिसके करीब पहुँचने से पहले ही स्थानीय प्रशासन सचेत हो गया है। लगातार बढ़ते इस पानी के दबाव के कारण प्रसिद्ध बागजान जमींदारी बांध के कई संवेदनशील बिंदुओं पर नदी का पानी तटबंध को छूने लगा है, जिससे कटाव की आशंका बढ़ गई है। इसके साथ ही मदरौनी इलाके में भी कोसी नदी तेजी से पैर पसार रही है। मदरौनी में बीते चौबीस घंटों में कोसी के जलस्तर में 9 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे नदी का वर्तमान बहाव 30.12 मीटर के स्तर पर पहुंच गया है। निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों ने अपने मवेशियों और जरूरी सामान को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाना शुरू कर दिया है।

गंगा नदी का बढ़ा वेग

कोसी के साथ-साथ गंगा नदी के जलस्तर में भी भारी तेजी देखी जा रही है। गंगा नदी के इस अचानक बढ़े वेग ने नवगछिया अनुमंडल के कई हिस्सों में चिंता की रेखाएं खींच दी हैं। इस्माईलपुर-बिंद टोली क्षेत्र में गंगा नदी का पानी 13 सेंटीमीटर की छलांग लगाकर 30.43 मीटर पर बह रहा है। इस बिंदु पर गंगा नदी का चेतावनी स्तर 30.60 मीटर और खतरे का अंतिम निशान 31.60 मीटर निर्धारित है। यहाँ स्थिति इस वजह से संवेदनशील हो गई है क्योंकि गंगा का पानी अब तटबंध के सबसे निचले हिस्से यानी टो तक पहुँच चुका है। यदि पानी का दबाव इसी तरह बना रहा तो मिट्टी के कटाव की गति तेज हो सकती है। इसके अलावा, राघोपुर क्षेत्र में तो गंगा के पानी में और भी भारी उछाल देखने को मिला है। यहाँ पिछले चौबीस घंटों के भीतर गंगा का जलस्तर 20 सेंटीमीटर तक ऊपर उठ गया है, जिससे यह 31.45 मीटर पर पहुँच गया है। स्थानीय ग्रामीणों के लिए थोड़ी राहत की बात केवल यह है कि फिलहाल काजीकोरैया-राघोपुर मार्जिनल बांध सुरक्षित अवस्था में है और पानी को रोकने में सक्षम बना हुआ है।

स्थान का नाम संबंधित नदी वर्तमान जलस्तर (मीटर) वृद्धि (सेंटीमीटर) चेतावनी स्तर (मीटर)
जेबी चोरहर कोसी 30.85 5 30.77
मदरौनी कोसी 30.12 9
इस्माईलपुर-बिंद टोली गंगा 30.43 13 30.60
राघोपुर गंगा 31.45 20

प्रशासनिक सतर्कता और गश्त

बाढ़ की इस गंभीर आशंका को देखते हुए भागलपुर जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग के अभियंताओं की टीम पूरी तरह मुस्तैद हो गई है। विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट आदेश जारी कर सभी कनिष्ठ अभियंताओं, सहायक अभियंताओं और संबंधित कर्मियों को चौबीसों घंटे यानी ‘अलर्ट मोड’ में रहने को कहा है। इस्माईलपुर-बिंद टोली, राघोपुर और जेबी चोरहर जैसे बेहद संवेदनशील माने जाने वाले स्थानों पर पानी के बढ़ते दबाव को देखते हुए सुरक्षात्मक तटबंधों पर गश्त (पेट्रोलिंग) की गति को दोगुना कर दिया गया है। अभियंता रात-दिन बांधों की निगरानी कर रहे हैं ताकि किसी भी प्रकार के रिसाव या कटाव की स्थिति में तुरंत बालू की बोरियों और बोल्डर क्रेट्स की मदद से स्थिति को संभाला जा सके। प्रशासन का मानना है कि यदि पहाड़ी और मैदानी इलाकों में बारिश का दौर इसी प्रकार जारी रहा, तो बांधों पर पानी का दबाव और अधिक बढ़ सकता है। इस संभावित संकट से निपटने के लिए आपातकालीन बाढ़ नियंत्रण सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित कर ली गई है।

तटबंध सुरक्षा के उपाय

  • संवेदनशील स्थलों पर चौबीस घंटे लगातार गश्त और निगरानी बढ़ाना।
  • कटाव रोकने के लिए पर्याप्त संख्या में बालू की बोरियों और बोल्डर की व्यवस्था।
  • जल संसाधन विभाग के सभी अभियंताओं के अवकाश पर अस्थायी रोक।
  • तटवर्ती ग्रामीणों के साथ निरंतर संपर्क और आपातकालीन नंबरों का सक्रिय होना।

जल संसाधन विभाग के अभियंताओं के अनुसार, सभी प्रमुख सुरक्षा बांध नियंत्रण में हैं। ग्रामीणों को घबराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन नदी के पास जाने से बचने की सलाह दी जाती है।

नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी का सीधा प्रभाव नवगछिया अनुमंडल के निचले हिस्सों में स्थित कृषि भूमि पर पड़ता है। इन दियारा इलाकों में बड़े पैमाने पर मक्के, केले और अन्य खरीफ फसलों की खेती की जाती है। पानी के फैलाव के कारण कई खेतों में पानी घुसने की खबरें भी आने लगी हैं, जिससे किसानों को फसलों के नुकसान का डर सताने लगा है। गंगा का बढ़ता जलस्तर दियारा क्षेत्र के संपर्क मार्गों को भी प्रभावित कर सकता है। ऐसे में स्थानीय प्रशासन ने नाविकों और लाइफ जैकेट की व्यवस्था को दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा सके। बाढ़ नियंत्रण कक्ष को भी सक्रिय कर दिया गया है, जहाँ से हर घंटे नदियों के स्तर की रिपोर्ट ली जा रही है। अभियंताओं की टीमें निरंतर वायरलेस सेट और मोबाइल के जरिए आपस में जुड़ी हुई हैं ताकि किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में तुरंत राहत कार्य शुरू किए जा सकें।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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