Founder – Mohan Milan

25 सितंबर से शुरू होगा पितृपक्ष मेला, 70 हजार श्रद्धालुओं के ठहरने की तैयारी

पटना,अंग भारत। मोक्ष की भूमि गयाजी में विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला 25 सितंबर से शुरू होगा। 10 अक्टूबर तक चलने वाले मेले में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे और पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करेंगे। सामान्य श्रद्धालुओं के लिए पितृपक्ष 16 दिनों का होगा, जबकि त्रैपाक्षिक श्राद्ध करने वालों के धार्मिक अनुष्ठान 11 अक्टूबर तक चलेंगे। श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन करीब 70 हजार लोगों के ठहरने की क्षमता विकसित कर रहा है।

अलग-अलग दिनों में होंगे पिंडदान के कर्मकांड

श्रद्धालु अपनी सुविधा और धार्मिक परंपरा के अनुसार एक, तीन, पांच, सात या नौ दिनों तक गयाजी में रहकर पिंडदान करते हैं। गयापाल पंडा एवं विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति के सदस्य मणिलाल बारिक के अनुसार, 25 सितंबर से पिंडदान और श्राद्ध का सिलसिला शुरू होगा।25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर पुनपुन में पिंडदान और गयापाल तीर्थपुरोहित की पांव पूजा होगी। 26 सितंबर को फल्गु स्नान, श्राद्ध और पांव पूजा तथा 27 सितंबर को ब्रह्मकुंड में जौ के चूर्ण से पिंडदान, प्रेतशिला, रामशिला और रामकुंड में श्राद्ध होगा।28 सितंबर को पंचतीर्थ श्राद्ध के तहत उत्तरमानस, उदीची, कनखल, दक्षिणमानस और जिह्वालोल में कर्मकांड होगा। 29 सितंबर को सरस्वती स्नान, पंचरत्न दान, मातंगवापी और धर्मारण्य कूप में श्राद्ध तथा बोधगया में बोधितरू दर्शन का विधान है। 30 सितंबर को ब्रह्मसरोवर और काकबली श्राद्ध के साथ आम्रसिंचन में पिंडदान किया जाएगा।1 अक्टूबर को रुद्रपद, ब्रह्मपद और विष्णुपद में खीर और मावा के पिंड से श्राद्ध तथा पांव पूजा होगी। 2 अक्टूबर को कार्तिकपद, दक्षिणाग्निपद और गार्हपत्याग्निपद तथा 3 अक्टूबर को सूर्यपद, चंद्रपद, गणेशपद, संध्याग्निपद, आवसंध्याग्निपद और दधीचीपद में श्राद्ध होगा।4 अक्टूबर को कण्वपद, मातंगपद, क्रौंचपद, अगस्त्यपद, इन्द्रपद, कश्यपपद और गजकर्णपद में श्राद्ध के साथ सीताकुंड में बालू से पिंडदान, रामगया श्राद्ध, दूध तर्पण और अन्नदान होगा। 5 अक्टूबर को गयासिर और गयाकूप में त्रिपिंडी श्राद्ध किया जाएगा।6 अक्टूबर को मुण्डपृष्ठा, आदि गदाधर और धौतपद, जबकि 7 अक्टूबर को भीमगया, गौप्रचार और गदालोल श्राद्ध होगा। 8 अक्टूबर को भगवान विष्णु का पंचामृत स्नान-पूजन और फल्गु में दुग्ध तर्पण किया जाएगा। 9 अक्टूबर को वैतरणी सरोवर पर गोदान और तर्पण तथा 10 अक्टूबर को अमावस्या पर अक्षयवट में श्राद्ध, खीर से पिंडदान, सुफल और पितृ विसर्जन होगा। त्रैपाक्षिक श्राद्ध करने वालों के लिए 11 अक्टूबर को गायत्री घाट पर दही-चावल से पिंडदान और पितृ विदाई होगी।

70 हजार लोगों के ठहरने की व्यवस्था

मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए गांधी मैदान में 2,500 बेड की टेंट सिटी तैयार की जा रही है। जीविका दीदियों की रसोई के माध्यम से 25 रुपये में भरपेट भोजन उपलब्ध कराने की योजना है। पर्यटन विभाग अस्थायी पर्यटक सूचना केंद्र, हेल्पलाइन, प्रशिक्षित गाइड और ई-रिक्शा की व्यवस्था करेगा। फल्गु नदी के तट पर महाआरती, ई-पिंडदान और यात्रा पैकेज की सुविधा भी उपलब्ध कराने की तैयारी है।

स्वच्छता और पेयजल पर विशेष जोर

मेला क्षेत्र को स्वच्छता व्यवस्था के लिए पांच जोन और 54 सेक्टर में बांटा गया है। यहां 364 स्थायी और 579 प्री-फैब्रिकेटेड अस्थायी शौचालय, 134 स्नानागार और 74 चेंजिंग रूम बनाए जा रहे हैं। नगर निगम 53 पथों और पथ निर्माण विभाग 35 मुख्य सड़कों की मरम्मत करा रहा है। पेयजल के लिए 280 चापाकल, 54 प्याऊ, 890 नल, 22 वाटर टैंकर और दो वाटर एटीएम उपलब्ध रहेंगे।

73 स्वास्थ्य शिविर, 125 डॉक्टर तैनात

श्रद्धालुओं के लिए 73 स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे। इनमें 125 डॉक्टर, 178 पैरामेडिकल कर्मी और 52 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात रहेंगे। आवागमन के लिए 50 रिंग बस और 150 ई-रिक्शा निशुल्क चलेंगे। बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को पिंडवेदी तक पहुंचाने में स्काउट-गाइड, एनएसएस और एनसीसी के स्वयंसेवक व्हीलचेयर के साथ मदद करेंगे। प्रमुख घाटों पर एसडीआरएफ की टीम रहेगी और 24 घंटे हेल्पलाइन व कंट्रोल रूम संचालित किया जाएगा।

विष्णुपद के आसपास कॉरिडोर का प्रस्ताव

गयाजी में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विष्णुपद मंदिर के चारों ओर काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विश्वस्तरीय कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव है। करीब 120 करोड़ रुपये की लागत से 1,000 बेड वाली आधुनिक गयाजी धर्मशाला बनाने की भी योजना है। मुख्यमंत्री होमस्टे प्रोत्साहन योजना में विष्णुपद मंदिर, महाबोधि मंदिर, डुंगेश्वरी मंदिर और गुरपा पहाड़ी को शामिल किया गया है। पात्र लाभार्थियों को 11 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता देने का प्रावधान है।धार्मिक मान्यता के अनुसार गयाजी में पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण करने से पितरों का उद्धार होता है और पितृदोष से मुक्ति मिलती है। विष्णुपद मंदिर में भगवान विष्णु के चरणचिह्न प्रतिष्ठित हैं। इसी धार्मिक आस्था के कारण पितृपक्ष के दौरान गयाजी में देश-विदेश से श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ जुटती है। प्रशासन का लक्ष्य इस वर्ष श्रद्धालुओं को सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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