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सऊदी अरब ने रणनीतिक ‘ईस्ट-वेस्ट’ कच्चे तेल पाइपलाइन बंद की, हमलों के बाद लिया एहतियाती फैसला

रियाद,अंग भारत। सऊदी अरब ने अपनी रणनीतिक ‘ईस्ट-वेस्ट’ कच्चे तेल पाइपलाइन को एहतियाती तौर पर बंद कर दिया है। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, एक दिन पहले रियाद और मदीना क्षेत्रों में कई हमलों के बाद पाइपलाइन को बंद करने का फैसला लिया गया। हालांकि, मंत्रालय ने हमलों के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान नहीं बताई है। पाइपलाइन को कितना नुकसान पहुंचा है, इसकी जानकारी भी नहीं दी गई है।

70 लाख बैरल प्रतिदिन है क्षमता

ईरान सरकार के अंतरराष्ट्रीय समाचार नेटवर्क प्रेस टीवी के अनुसार, ‘ईस्ट-वेस्ट’ पाइपलाइन सऊदी अरब के लिए बेहद अहम है। इसकी क्षमता करीब 70 लाख बैरल कच्चे तेल प्रतिदिन की है। यह पाइपलाइन देश के तेल क्षेत्रों को लाल सागर के निर्यात टर्मिनलों से जोड़ती है। इसके जरिए फारस की खाड़ी से कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होता है।होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने के बाद इस पाइपलाइन का रणनीतिक महत्व और बढ़ गया है। सऊदी अरामको के सीईओ अमीन नासिर ने पिछले महीने कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के प्रभाव को कम करने में इस पाइपलाइन ने आपातकालीन तेल भंडार जारी करने की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

लाल सागर के रास्ते तेल परिवहन पर भी दबाव

सऊदी अरब के लाल सागर स्थित तेल निर्यात मार्ग पर भी दबाव बढ़ रहा है। यमन की ओर से सऊदी तेल ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए हमलों और समुद्री नाकेबंदी की घोषणा के बाद क्षेत्र में तेल परिवहन को लेकर चिंता बढ़ी है।गौरतलब है कि जुलाई में यमन की सेना ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की थी। इसे उसने ‘‘घेराबंदी के बदले घेराबंदी’’ की रणनीति बताया था। इसके बाद लाल सागर के रास्ते सऊदी तेल की आवाजाही पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई।

यानबू से तेल लदान छह महीने के निचले स्तर पर

जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाले आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में लाल सागर के रास्ते सऊदी तेल के प्रवाह में भारी गिरावट दर्ज की गई। पश्चिमी शहर यानबू से सऊदी कच्चे तेल और कंडेनसेट की लोडिंग छह महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई।मार्केट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म वोर्टेक्सा ने अगस्त में यानबू से तेल लदान करीब 32 लाख बैरल प्रतिदिन आंका है। वहीं, केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक यह लगभग 15 लाख बैरल प्रतिदिन रहा।

तेल उत्पादन में भी बड़ी गिरावट

पाइपलाइन बंद करने का फैसला ऐसे समय में आया है, जब सऊदी अरब के कच्चे तेल उत्पादन में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन ओपेक के अनुसार, अगस्त में सऊदी अरब का तेल उत्पादन घटकर करीब 62.4 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। जुलाई में यह लगभग 81 लाख बैरल प्रतिदिन था।यह 1990 के बाद सऊदी अरब के तेल उत्पादन का सबसे निचला स्तर बताया जा रहा है। उत्पादन में यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब सऊदी अरब और ओपेक के अन्य देश तेल उत्पादन बढ़ाने की योजना पर आगे बढ़ रहे थे।

वैश्विक तेल बाजार पर बढ़ सकता है दबाव

क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति में कमी का असर तेल बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। सप्ताह के अंत तक तेल की कीमतों में 8 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई।यदि सऊदी अरब के वैकल्पिक तेल निर्यात मार्ग भी लंबे समय तक प्रभावित रहते हैं, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति पर दबाव और बढ़ सकता है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर पड़ने की आशंका है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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