कोलकाता, अंग भारत। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को केष्टोपुर में गणेश पूजा का उद्घाटन करते हुए बांग्ला और गैर-बांग्ला के नाम पर होने वाली विभाजन की राजनीति पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राज्य में लंबे समय तक सनातनी संस्कृति और परंपराओं की गलत व्याख्या की गई। अब सभी तरह के भेदभाव को खत्म कर ‘सनातनी बंगाल’ के निर्माण के लिए काम किया जाएगा।
‘गणपति बप्पा पूरे देश के सनातनियों के आराध्य’
गणेश पूजा के उद्घाटन के बाद संबोधन में शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान भाषा, जाति और त्योहारों के नाम पर बंगालियों और सनातनियों को बांटने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि यह धारणा बनाई गई कि गणेश पूजा केवल महाराष्ट्र की परंपरा है, जबकि गणपति बप्पा पूरे देश के सनातनियों के आराध्य हैं।उन्होंने कहा कि इसी तरह दुर्गा पूजा को केवल कोलकाता तक सीमित बताना भी सही नहीं है। छठ पूजा को केवल बिहारियों का पर्व मानने की धारणा पर भी उन्होंने सवाल उठाया। उनके अनुसार, धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को किसी क्षेत्र या भाषा की सीमा में बांधना उचित नहीं है।
‘सभी सनातनी और हिंदुस्तानी’
मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाल में रहने वाले अलग-अलग समुदायों की अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं हैं। उन्होंने कहा कि अब बांग्ला, गुजराती या किसी अन्य पहचान के नाम पर खड़ी की गई दीवारों को तोड़ दिया गया है। सभी लोग सनातनी और हिंदुस्तानी हैं।
‘धर्म को अफीम कहते थे वामपंथी’
वामपंथी शासन पर निशाना साधते हुए शुभेंदु ने कहा कि 34 वर्षों तक कम्युनिस्टों ने धर्म को ‘अफीम’ बताने वाली विचारधारा के साथ शासन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान पूजा-पाठ, पंचांग, शास्त्र, पुरोहित और मंत्रोच्चार जैसी सनातनी परंपराओं को कमजोर किया गया। दुर्गा पूजा और महालया जैसी परंपराओं से भी लोगों को दूर करने का प्रयास किया गया।उन्होंने कहा कि वह श्यामा प्रसाद मुखर्जी और स्वामी प्रणबानंद की परंपरा, संस्कृति और विरासत को फिर से स्थापित करना चाहते हैं। विभाजन की त्रासदी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अविभाजित बंगाल के लोगों को देश के विभाजन से भारी नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदू समुदाय से जुड़े घटनाक्रम का भी जिक्र किया और कहा कि वहां की परिस्थितियों ने सनातनियों की चिंताएं बढ़ाई हैं।
तृणमूल पर भी साधा निशाना
शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 15 वर्षों के शासन के शुरुआती दौर में भले ही स्थिति ऐसी नहीं थी, लेकिन बाद के वर्षों में बंगाल की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को बदलने की कोशिश की गई।उन्होंने आरोप लगाया कि एक वर्ष मुहर्रम के कारण विजयादशमी के दिन प्रतिमा विसर्जन की तिथि में बदलाव किया गया था। शुभेंदु ने कहा कि धार्मिक आयोजनों की तिथियां पंचांग और परंपराओं के अनुसार ही तय होनी चाहिए।उन्होंने यह भी कहा कि अब पितृपक्ष में पूजा उद्घाटन करने जैसी परंपराएं स्वीकार नहीं की जाएंगी।
धार्मिक पहचान की रक्षा का आह्वान
मुख्यमंत्री ने लोगों से अपनी पहचान, धर्म, संस्कार और परंपराओं की रक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सभी को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी उनकी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान तथा परंपराओं को बदल न सके। उन्होंने सभी भेदभाव समाप्त कर सनातनी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण पर जोर दिया।







