नई दिल्ली,अंग भारत। भारत में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का शनिवार को भारत मंडपम में आगाज हुआ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आधिकारिक तौर पर शिखर सम्मेलन की शुरुआत की। भारत के लिए अहम कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में ब्रिक्स के सदस्य देशों ने लंबी बातचीत के बाद साझा बयान जारी करने पर सहमति बना ली है।
तड़के चार बजे तक चली बातचीत
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, बातचीत के दौरान कई विवादित मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच मतभेद सामने आए। इसके बावजूद भारत ने अलग-अलग विचारों के बीच तालमेल बैठाने और आम सहमति बनाने के लिए लगातार प्रयास किए। यह बातचीत तड़के करीब चार बजे तक चली। इसके बाद सदस्य देश संयुक्त बयान जारी करने पर सहमत हुए।
पश्चिम एशिया के मुद्दे पर बड़ी चुनौती
भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे देशों के बीच सहमति बनाने की थी। तीनों देश एक ही मंच का हिस्सा हैं, लेकिन कई क्षेत्रीय और भू-राजनीतिक मुद्दों पर उनके विचार अलग हैं और उनके बीच गहरे मतभेद भी रहे हैं।पश्चिम एशिया में जारी संकट और बढ़ते तनाव के बीच इन देशों के बीच सहमति बनाना आसान नहीं था। इसके बावजूद भारत की कूटनीतिक कोशिशों से इन मतभेदों को ब्रिक्स की प्रक्रिया पर हावी नहीं होने दिया गया। सदस्य देशों के बीच भू-राजनीतिक मुद्दों पर व्यापक मतभेद के बावजूद साझा बयान पर सहमति बनना भारत के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता मानी जा रही है।
11 पूर्ण सदस्य, 10 साझेदार देश
ब्रिक्स में वर्तमान में 11 सदस्य देश शामिल हैं। इनमें ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। ये देश सामूहिक रूप से दुनिया की करीब 49.5 फीसदी आबादी, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के करीब 40 फीसदी और विश्व व्यापार के 26 फीसदी का प्रतिनिधित्व करते हैं।दिल्ली के भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को आयोजित हो रहे दो दिवसीय 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में 11 पूर्ण सदस्य देशों के अलावा 10 साझेदार देशों के नेता भी हिस्सा ले रहे हैं। इस तरह सम्मेलन में कुल 21 देशों के नेताओं की भागीदारी है।







