वाशिंगटन,अंग भारत। अमेरिका में मिड टर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स की बड़ी जीत के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें बढ़ गई हैं। रिपब्लिकन पार्टी को हाउस और सीनेट दोनों में करारा झटका लगा है। अब पार्टी के अंदर ही ईरान युद्ध को हार की सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है और ट्रंप के सामने इस युद्ध को लेकर फैसले के सीमित विकल्प बचे हैं।अमेरिकी मीडिया एक्सिओस की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने खुद भी मान लिया है कि ईरान से चल रहा टकराव चुनाव में नुकसान की बड़ी वजह बना है। महंगी गैस, बढ़ती महंगाई और लंबे युद्ध से जनता नाराज थी, जिसका असर वोट में दिखा। अब सवाल ये है कि ट्रंप आगे क्या करेंगे – समझौता, बमबारी या फिर मौजूदा हालात को खींचते रहना।
ट्रंप के सामने तीन रास्ते, तीनों में पेंच -: व्हाइट हाउस के करीबियों के मुताबिक ट्रंप के पास तीन विकल्प हैं।पहला- सीधा हमला: ईरान पर बड़े पैमाने पर बमबारी की जाए। लेकिन इससे जनता और नाराज होगी, क्योंकि लोग पहले ही युद्ध से थक चुके हैं। इससे तेल और गैस के दाम और बढ़ेंगे और कोई ठोस सैन्य जीत भी हाथ न लगे।दूसरा- बातचीत से समझौता: कतर के जरिए ईरान से डील की कोशिश हो रही है। लेकिन दिक्कत ये है कि ईरान चुनाव में ट्रंप की हार को अपनी जीत मान रहा है। ऐसे में वो ज्यादा शर्तें रख सकता है, जिससे ट्रंप के लिए झुकना मुश्किल हो जाएगा।तीसरा- नाकाबंदी जारी रखो: फिलहाल जैसे नौसैनिक नाकाबंदी और कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगे हैं, उन्हें जारी रखा जाए और ईरान को अंदर से घुटने पर लाया जाए। ये रास्ता सुरक्षित तो है, लेकिन इसमें नतीजा आने में महीनों लग सकते हैं। ट्रंप खुद कह रहे हैं कि वो चुनाव के बाद किसी न किसी तरह इस लड़ाई को खत्म करेंगे।
वेंस ने खुलकर बोला – युद्ध की वजह से हारे -: इस बीच उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बयान ने सियासी हलचल तेज कर दी है। वेंस ने बुधवार सुबह सोशल मीडिया X पर लिखा – “हम इसलिए हारे क्योंकि युद्ध चल रहा था। खुद राष्ट्रपति ने भी यही बात कही।”वेंस ने इजरायल के साथ अमेरिका के रिश्तों को भी रिपब्लिकन के लिए मुसीबत बताया। उन्होंने कहा कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ईरान के मामले में हर बात पर गलत हैं। वेंस पहले से ही ट्रंप को समझौते की सलाह दे रहे थे और चेतावनी दे रहे थे कि ये युद्ध चुनाव हरवा देगा।ट्रंप ने भी वेंस की बात को काफी हद तक सही माना, लेकिन कहा – “हमारे पास कोई और विकल्प नहीं था। आप ईरान को परमाणु हथियार नहीं लेने दे सकते।” जब उनसे पूछा गया कि युद्ध कब खत्म करेंगे तो उन्होंने कहा – “जब मैं चाहूं, लेकिन सही तरीके से।
“पर्दे के पीछे क्या चल रहा है -: सूत्रों का कहना है कि ट्रंप मिड टर्म से पहले ही ईरान पर हमला करना चाहते थे, क्योंकि नेतन्याहू उन पर दबाव बना रहे थे, लेकिन उन्होंने इंतजार करने का फैसला किया। वहीं अमेरिकी सेना फिर से बड़े ऑपरेशन की तैयारी कर रही है और खाड़ी में और संसाधन भेजे जा रहे हैं। दूसरी तरफ कतर दोनों देशों के बीच समझौते के मसौदे पर बातचीत करा रहा है।ईरान में जश्न का माहौल है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने लिखा – “ईरानी राष्ट्र ने ट्रंप को युद्ध के मैदान और वाशिंगटन में राजनीतिक हार दी है।”विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान को ट्रंप की राजनीतिक कमजोरी को सैन्य कमजोरी समझने की गलती नहीं करनी चाहिए। अगर वाशिंगटन समझौते को तैयार है तो यही सही मौका है।
डेमोक्रेट्स की बड़ी जीत, GOP में हलचल -: सीबीएस न्यूज के मुताबिक डेमोक्रेट्स को हाउस में 251 से 268 सीटें और सीनेट में कम से कम 54 सीटें मिलने का अनुमान है। टेक्सास और कंसास में दशकों बाद डेमोक्रेटिक सीनेटर जीते हैं। हार के बाद हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने कहा है कि वो अगला कार्यकाल नहीं मांगेंगे। वहीं ट्रंप अपने युद्ध सचिव पीट हेगसेथ के भविष्य पर भी सलाह ले रहे हैं।








