रांची,अंग भारत। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) सिविल सेवा परीक्षा 2025 के अंतिम परिणामों ने झारखंड के होनहार युवाओं के लिए सफलता का नया अध्याय लिख दिया है। इस साल राज्य के कई प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों ने कठिन संघर्ष और अटूट संकल्प के दम पर देशभर में अपना परचम लहराया है। दुमका की सुदीपा दत्ता ने 41वीं रैंक हासिल कर पूरे राज्य में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है, जबकि लातेहार के बिपुल गुप्ता और रांची के इस्तियाक रहमान जैसे मेधावियों ने यह साबित कर दिया है कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से छोटे शहरों के छात्र भी देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा में जगह बना सकते हैं।
सुदीपा दत्ता की उपलब्धि
झारखंड के लिए सबसे गौरवान्वित करने वाला पल दुमका की सुदीपा दत्ता ने दिया। उन्होंने यूपीएससी में 41वीं रैंक हासिल कर एक मिसाल कायम की है। सुदीपा की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने बड़े शहरों में कोचिंग लेने के बजाय अपने गृह जिले दुमका में रहकर ही तैयारी की।
- तैयारी का माध्यम: दुमका की स्टेट लाइब्रेरी में घंटों बैठकर स्वाध्याय।
- पारिवारिक पृष्ठभूमि: पिता सच्चिदानंद दत्ता सहायक पोस्टमास्टर हैं और माता गृहिणी हैं।
- पूर्व अनुभव: वह जेपीएससी के माध्यम से सीडीपीओ के पद पर भी कार्यरत थीं, लेकिन उनका लक्ष्य आईएएस था जिसे उन्होंने तीसरे प्रयास में हासिल किया।
बिपुल गुप्ता का संघर्ष
लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड के चटकपुर गांव के रहने वाले बिपुल गुप्ता ने 103वीं रैंक हासिल कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में अपना स्थान पक्का किया है। बिपुल के पिता पवन कुमार गुप्ता और माता दीपा गुप्ता के लिए यह क्षण बेहद भावुक करने वाला रहा।
बिपुल का सफर काफी धैर्य भरा रहा है। वर्ष 2024 में उन्हें 368वीं रैंक मिली थी, जिससे वे भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के लिए चुने गए थे। हालांकि, उनका मन आईएएस बनने में लगा था, जिसके लिए उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और इस बार अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लिया।
इस्तियाक रहमान की प्रेरणा
राजधानी रांची के डोरंडा स्थित मानिटोटोला, फिरदौस नगर के निवासी इस्तियाक रहमान ने ऑल इंडिया रैंक 354 हासिल कर शहर का मान बढ़ाया है। इस्तियाक की कहानी नौकरी के साथ तैयारी करने वाले छात्रों के लिए किसी सबक से कम नहीं है।
सामाजिक संगठन फ्रेंड्स ऑफ वीकर सोसाइटी के अध्यक्ष तनवीर अहमद ने प्रेस बयान जारी कर इस्तियाक की तारीफ की। तनवीर अहमद ने बताया कि इस्तियाक पिछले करीब छह महीनों से मिनिस्ट्री ऑफ होम अफ़ेयर्स के अंतर्गत हैदराबाद एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन ऑफिसर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। तनवीर अहमद के अनुसार, इस्तियाक की सफलता रांची के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है और यह साबित करता है कि कठिन से कठिन लक्ष्य को मेहनत और लगन से हासिल किया जा सकता है।
साहिबगंज की निहारिका
साहिबगंज की निहारिका सिन्हा ने भी 365वीं रैंक प्राप्त कर साबित कर दिया कि पारिवारिक पृष्ठभूमि सफलता की राह में कभी बाधा नहीं बनती। कुलीपाड़ा निवासी निहारिका के पिता निरंजन सिन्हा एक दर्जी हैं, और उनकी मां शबनम कुमारी स्वास्थ्य विभाग में अनुबंध पर नर्स हैं।
निहारिका की शिक्षा का सफर: संत जेवियर स्कूल, साहिबगंज से 10वीं, जवाहर विद्या मंदिर श्यामली, रांची से 12वीं और कोलकाता के संत जेवियर कॉलेज से राजनीति शास्त्र में स्नातक।
2024 में पहले प्रयास में असफलता हाथ लगने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और दूसरे प्रयास में माता-पिता के सपनों को हकीकत में बदल दिया।
धनबाद की श्रुति मोदी
धनबाद की श्रुति मोदी ने 569वीं रैंक के साथ सफलता का परचम लहराया है। श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी), दिल्ली से बीकॉम ऑनर्स करने वाली श्रुति वर्तमान में बैंक में क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं। नौकरी और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाकर सफलता हासिल करना उनकी कड़ी मेहनत को दर्शाता है। वर्णवाल सेवा समिति बाघमारा ने उनके इस विशेष मुकाम तक पहुँचने पर उन्हें बधाई दी है।
सफलता का मूल मंत्र
झारखंड के इन अभ्यर्थियों की सफलता से कुछ महत्वपूर्ण बातें सीखने को मिलती हैं:
- धैर्य: कई अभ्यर्थियों ने पहले प्रयास की असफलता से घबराए बिना दोबारा परीक्षा दी।
- संसाधन: लाइब्रेरी और सेल्फ स्टडी का सही उपयोग करना।
- संतुलन: नौकरी के साथ तैयारी करके भी सफलता पाई जा सकती है।
इन सभी युवाओं ने यह संदेश दिया है कि यदि युवा सही दिशा में तैयारी करें, तो वे न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे राज्य का नाम राष्ट्रीय पटल पर रोशन कर सकते हैं। अभिभावकों को भी अपने बच्चों को उच्च शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं में जाने के लिए निरंतर प्रोत्साहित करते रहना चाहिए।








