सुपौल,अंग भारत| सुपौल व्यवहार न्यायालय परिसर से जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सौजन्य से एक विशेष जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आगामी 14 मार्च 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत के प्रति आम जनता को जागरूक करना है, ताकि लोग अपने लंबित वादों का निपटारा सुलह-समझौते के माध्यम से करा सकें। इस अवसर पर न्यायालय के शीर्ष अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की कि वे इस अवसर का लाभ उठाकर कोर्ट-कचहरी के चक्करों से मुक्ति पाएं और अपने पारिवारिक एवं आर्थिक विवादों को सौहार्दपूर्ण वातावरण में समाप्त करें।
न्यायिक अधिकारियों की उपस्थिति
इस जागरूकता रथ को रवाना करने के दौरान सुपौल न्यायपालिका के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनंत सिंह, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय राहुल उपाध्याय, और जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अफजल आलम ने संयुक्त रूप से रथ को हरी झंडी दिखाई। कार्यक्रम में न्यायिक अनुशासन और लोक अदालत के महत्व को रेखांकित करते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम दिलीप सिंह, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनय शंकर और मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी रामचंद्र प्रसाद भी मौजूद रहे। इन अधिकारियों की सक्रिय उपस्थिति ने यह स्पष्ट किया कि जिला प्रशासन लोक अदालत की सफलता को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
लोक अदालत का उद्देश्य
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनंत सिंह ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत न्याय प्रणाली का एक अभिन्न अंग है, जो ‘सुलह और समझौता’ के सिद्धांत पर कार्य करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत का प्रयास है कि कोर्ट में लंबित सुलहनीय मामलों को आपसी सहमति से सुलझाया जाए। इससे न केवल समय की बचत होती है, बल्कि दोनों पक्षों के बीच कड़वाहट भी समाप्त होती है। यह एक ऐसा मंच है जहाँ कोई हारता नहीं है, बल्कि दोनों पक्षों की जीत होती है।
किन मामलों का निपटारा?
लोक अदालत में किन-किन मुकदमों पर सुनवाई होगी, इसे लेकर व्यापक जानकारी दी गई। मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रकृति के मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी:
- बैंक लोन से संबंधित मामले: जहां बैंकों के साथ कर्ज निपटान (One Time Settlement) की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
- चेक बाउंस के मामले: एनआई एक्ट के तहत लंबित सुलहनीय विवाद।
- बिजली बिल विवाद: बिजली विभाग से संबंधित राजस्व या अन्य सुलहनीय मामले।
- पारिवारिक विवाद (मैट्रोमोनियल): पति-पत्नी के बीच के विवाद जिन्हें आपसी बातचीत से सुलझाया जा सके।
- आपराधिक सुलहनीय मामले: वे मामले जो कानून के दायरे में रहकर आपसी समझौते के योग्य हैं।
चिह्नित मामलों का विवरण
जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अफजल आलम ने आंकड़ों के माध्यम से तैयारी की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आगामी लोक अदालत के लिए अब तक 3300 से अधिक मामलों को विशेष रूप से चिह्नित किया गया है। इसके अलावा, बैंक लोन से जुड़े मामलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसके तहत 13,660 मामलों में संबंधित पक्षकारों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इतनी बड़ी संख्या में नोटिस जारी करना यह दर्शाता है कि इस बार विभाग बड़े पैमाने पर पुराने लंबित मुकदमों को खत्म करने की तैयारी में है।
आम जनता से अपील
न्यायिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि लोक अदालत में आने वाले किसी भी पक्षकार को कानूनी प्रक्रियाओं की जटिलताओं में नहीं फंसना पड़ेगा। सुलह के लिए अलग-अलग बेंच बनाई जाएंगी, जहां संबंधित न्यायिक दंडाधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहेंगे।
“कोर्ट से वास्ता रखने वाले अधिक से अधिक लोग आगामी 14 मार्च 2026 को लोक अदालत में आएं और अपने सुलहनीय मामलों का निष्पादन कराएं। यह एक सुनहरा अवसर है अपने पुराने विवादों को हमेशा के लिए समाप्त करने का।” – अनंत सिंह, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सुपौल।
यदि आपका कोई मामला न्यायालय में लंबित है, तो आप अपने संबंधित वकील या जिला विधिक सेवा प्राधिकार के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। समय पर दी गई सूचना और उपस्थिति आपको भविष्य के लंबे कानूनी संघर्षों से बचा सकती है। सुपौल जिले के नागरिकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण मौका है कि वे लोक अदालत की इस सुविधा का लाभ उठाएं और न्याय प्रणाली में अपना सहयोग दें।








