नई दिल्ली,अंग भारत। संसद के केंद्रीय बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले ही दिन आज लोकसभा में एक बड़ा राजनीतिक मुकाबला देखने को मिल रहा है, जहां विपक्षी सांसद मोहम्मद जावेद, के. सुरेश और डॉ. मल्लू रवि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (हटाने का नोटिस) पेश कर रहे हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि अध्यक्ष का रवैया पक्षपातपूर्ण रहा है। यह सत्र दो अप्रैल तक चलना है और पहले ही दिन होने वाली इस जंग पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं। चूंकि मौजूदा लोकसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास 290 से अधिक सांसदों का भारी-भरकम बहुमत है, इसलिए इस प्रस्ताव का पास होना लगभग असंभव है, लेकिन विपक्ष इसके जरिए सरकार को घेरने की पूरी कोशिश में है।
अविश्वास प्रस्ताव का मुख्य कारण
आखिर विपक्ष ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया? इसकी कहानी पिछले महीने बजट सत्र के पहले चरण के दौरान शुरू हुई थी। तब विपक्ष के 118 सांसदों ने मिलकर लोकसभा के महासचिव को एक नोटिस सौंपा था। इस नोटिस में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला पर सीधे तौर पर पक्षपात करने और विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया गया था। इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वालों में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), डीएमके और वामपंथी दलों के प्रमुख नेता शामिल थे। अब इसमें नया मोड़ यह आया है कि ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने भी इस प्रस्ताव को अपना खुला समर्थन दे दिया है। टीएमसी के पास लोकसभा में 29 सांसद हैं, जिससे विपक्ष की ताकत थोड़ी और बढ़ती दिख रही है।
सदन में अंकों का गणित
राजनीति में सब कुछ अंकों के खेल पर टिका होता है। लोकसभा अध्यक्ष को उनके पद से हटाने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के साधारण बहुमत की जरूरत होती है। नीचे दिए गए आंकड़ों से समझिए कि इस समय सदन की स्थिति क्या है:
| पक्ष/गठबंधन | सांसदों की संख्या | रणनीतिक स्थिति |
|---|---|---|
| सत्तारूढ़ एनडीए (भाजपा व सहयोगी) | 290+ | मजबूत स्थिति में, प्रस्ताव गिराने के लिए पर्याप्त |
| प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वाले दल | 118 | प्रस्ताव के मुख्य प्रस्तावक |
| तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) | 29 | विपक्ष के समर्थन में वोट करेगी |
इस तालिका से साफ है कि विपक्ष के पास भले ही मुद्दे हों, लेकिन नंबर गेम पूरी तरह सरकार के पाले में है। 290 से ज्यादा सांसदों वाली एनडीए सरकार को इस प्रस्ताव से कोई सीधा खतरा नहीं दिखाई दे रहा है।
अध्यक्ष के बिना कैसे चलेगी कार्यवाही?
भारतीय संविधान के नियमों के अनुसार, जब भी लोकसभा अध्यक्ष को हटाने का प्रस्ताव सदन में विचाराधीन होता है, तो वह खुद आसन पर नहीं बैठ सकते। आज की चर्चा के दौरान ओम बिरला अध्यक्ष की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे। वह सदन में नीचे सत्तापक्ष के अन्य सांसदों के साथ बैठेंगे। वहां बैठकर वह अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब खुद देंगे।
संविधान के अनुच्छेद 96 के तहत, जब स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव विचाराधीन हो, तो वे सदन में बोल सकते हैं और कार्यवाही में भाग ले सकते हैं, लेकिन वे अध्यक्षता नहीं कर सकते। उन्हें पहली बार में मतदान करने का अधिकार भी होता है, लेकिन मत बराबर होने की स्थिति में वे निर्णायक मत नहीं दे सकते।
चूंकि इस समय लोकसभा में उपाध्यक्ष (डिप्टी स्पीकर) का पद खाली पड़ा है, इसलिए सदन की कार्यवाही को चलाने की जिम्मेदारी पैनल ऑफ चेयरपर्सन (सभापतियों के पैनल) में शामिल सांसदों पर होगी। वे बारी-बारी से सदन का संचालन करेंगे और इस गर्मागर्म बहस को संभालेंगे।
दोनों तरफ से व्हिप जारी
इस टकराव को देखते हुए दोनों ही खेमों ने अपने-अपने सांसदों को एकजुट रखने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने सभी सांसदों के लिए 9 और 10 मार्च के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है। इसका मतलब है कि सभी भाजपा सांसदों को इन दो दिनों में सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहना होगा और पार्टी के निर्देशानुसार वोट करना होगा। दूसरी तरफ, मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने भी पीछे न रहते हुए अपने सांसदों को 9 से 11 मार्च तक सदन में मौजूद रहने के लिए व्हिप थमा दिया है। व्हिप का उल्लंघन करने पर सांसदों की सदस्यता पर भी खतरा मंडरा सकता है, इसलिए कोई भी दल ढिलाई नहीं बरत रहा है।
आगे क्या होने वाला है?
इस प्रस्ताव के आने से संसद के इस सत्र में कामकाज पर गहरा असर पड़ने की आशंका है। विपक्ष इस बहस के बहाने सरकार की नीतियों, बेरोजगारी, और महंगाई जैसे मुद्दों पर घेराबंदी करेगा। हालांकि, यह प्रस्ताव गिरना तय है, लेकिन इसके राजनीतिक मायने बहुत बड़े हैं। विपक्षी दल जनता को यह संदेश देना चाहते हैं कि वे संसद के भीतर उनके मुद्दों को उठाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। दूसरी ओर, सरकार इसे विपक्ष की हताशा बताकर खारिज करने की रणनीति पर काम कर रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि लोकसभा के भीतर का यह घमासान सड़क पर क्या रंग लाता है।








