नई दिल्ली,अंगभारत। लोकसभा की कार्यवाही सोमवार को विपक्षी सदस्यों के पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष पर चर्चा कराने की मांग को लेकर किए गए हंगामे के कारण पहले दो बार स्थगित होने के बाद मंगलवार को पूर्वाह्न 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी। सदन में भारी शोर-शराबे और नारेबाजी के चलते विधायी कार्य पूरे नहीं हो सके। सुबह 11 बजे जैसे ही कार्यवाही का आगाज हुआ, विपक्षी बेंचों से पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात, भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वहां फंसे प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए गए।
सदन का गतिरोध
विपक्ष ने सरकार से मांग की कि वह इस वैश्विक संकट पर विस्तार से अपनी नीति स्पष्ट करे। सदन में हंगामे का आलम यह रहा कि पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल को बार-बार व्यवस्था बनाए रखने की गुजारिश करनी पड़ी। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के नारे लगाने पर जगदंबिका पाल ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सदन को याद दिलाया कि विदेश मंत्री ने पहले ही स्थिति पर विस्तृत जानकारी साझा कर दी है।
संसदीय गतिरोध के प्रमुख बिंदु नीचे दी गई तालिका में देखे जा सकते हैं:
| समय | घटना |
|---|---|
| पूर्वाह्न 11 बजे | विपक्ष का हंगामा शुरू, पहली बार स्थगन। |
| अपराह्न 3 बजे | दोबारा कार्यवाही शुरू, नारेबाजी जारी। |
| दिन के अंत में | मंगलवार 11 बजे तक पूर्ण स्थगन। |
विदेश मंत्री का रुख
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सदन में सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि भारत सरकार खाड़ी देशों से अपने नागरिकों को वापस लाने की हर संभव कोशिश कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इस पूरे सैन्य संघर्ष में शांति और संवाद का पक्षधर है। ओवैसी समेत एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं ने बार-बार इस मुद्दे पर विशेष स्पष्टीकरण मांगा, जिसके बाद मंत्री ने राज्यसभा और लोकसभा दोनों सदनों में अपनी बात रखी।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सदन में कहा कि इस समय ईरानी नेतृत्व से संपर्क साधने में चुनौतियां हैं, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर भारत अपनी पूरी सक्रियता बनाए हुए है।
सदन में गतिरोध के अन्य महत्वपूर्ण कारण निम्नलिखित हैं:
- विपक्ष का आरोप है कि ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार के पास कोई ठोस दीर्घकालिक योजना नहीं है।
- सरकार का कहना है कि विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव के नाम पर सदन का समय बर्बाद कर रहा है।
- विदेशी धरती पर फंसे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर विपक्ष की चिंताएं लगातार बनी हुई हैं।
- पीठासीन अधिकारी के निर्देशों की बार-बार अनदेखी के कारण संसदीय मर्यादा प्रभावित हुई।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर भी चर्चा की बात उठी थी, लेकिन हंगामे ने पूरी प्रक्रिया को पटरी से उतार दिया। एस. जयशंकर ने जोर देकर कहा कि सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति और नागरिकों की निकासी को अपनी प्राथमिकता सूची में रखा है। फिर भी, विपक्षी सांसदों ने “वी वॉन्ट डिस्कशन” के नारे लगाना बंद नहीं किया। हंगामे का स्तर इतना बढ़ गया था कि कार्यवाही को सुचारू रूप से आगे बढ़ाना असंभव हो गया था। जिसके बाद पीठासीन अधिकारी ने सदन को मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित करना ही एकमात्र विकल्प पाया।








