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सर्पदंश से महिला की मौत

पूर्णियाँ,अंग भारत| सहायक खजांची थाना क्षेत्र के नेवालाल चौक के पास शुक्रवार की सुबह एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया। यहां रोज की तरह घर के आंगन और आसपास से पूजा के लिए फूल चुनकर वापस लौटी 60 वर्षीय बुजुर्ग महिला मीना देवी की संदिग्ध सर्पदंश (सांप काटने) के कारण अचानक मौत हो गई। मृतका मूल रूप से कटिहार जिले के पोठिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले समेली की रहने वाली थीं। उनके पति गणेश पोद्दार बिहार पुलिस से सेवानिवृत्त दारोगा (SI) हैं। सुबह फूल तोड़ने के दौरान ही किसी जहरीले सांप ने उन्हें काट लिया था, जिसका असर कुछ ही समय बाद दिखने लगा। गंभीर हालत में उन्हें तुरंत राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय और अस्पताल (GMCH) पूर्णिया ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों की लाख कोशिशों के बाद भी उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में शोक की लहर है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

घटना की पूरी जानकारी

मृतका के पति और सेवानिवृत्त दारोगा गणेश पोद्दार ने बताया कि वे केनगर थाना में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थे। नौकरी से रिटायर होने के बाद वे अपनी पत्नी मीना देवी के साथ पूर्णिया के नेवालाल चौक के पास एक किराए के मकान में रह रहे थे। मीना देवी बेहद धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थीं। उनका रोज का नियम था कि वे सुबह सवेरे उठती थीं और भगवान की आराधना के लिए आसपास से ताजे फूल चुनकर लाती थीं। शुक्रवार की सुबह भी वे सामान्य दिनों की तरह खुशमिजाज होकर फूल तोड़ने के लिए घर से बाहर निकली थीं। बाहर से लौटने के बाद उन्होंने रसोई में जाकर चाय बनाई और दोनों पति-पत्नी ने साथ बैठकर बड़े ही शांत माहौल में चाय पी थी।

मुंह से निकला झाग

चाय पीने के कुछ ही मिनटों बाद मीना देवी की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। उनके पति गणेश पोद्दार ने बताया कि अचानक उनकी पत्नी को घबराहट और तेज बेचैनी होने लगी। देखते ही देखते उनके मुंह से सफेद झाग निकलने लगा। शरीर में इस तरह के अचानक और डरावने लक्षण देखकर परिजन पूरी तरह घबरा गए। वे तुरंत बिना एक पल गंवाए मीना देवी को इलाज के लिए जीएमसीएच (GMCH) पूर्णिया लेकर भागे। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों ने तुरंत उनका इलाज शुरू किया, लेकिन तब तक जहरीले सांप का विष उनके खून में पूरी तरह फैल चुका था। आखिरकार इलाज के दौरान ही उन्होंने दम तोड़ दिया। परिजनों की लिखित शिकायत के बाद सहायक खजांची थाने की पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

“सुबह फूल तोड़कर लाने के बाद हम दोनों ने साथ में चाय पी थी। कुछ ही देर बाद उनके मुंह से झाग आने लगा और वह तड़पने लगीं। हमें अंदेशा है कि फूल तोड़ने के दौरान ही झाड़ियों में छिपे किसी जहरीले सांप ने उन्हें डंस लिया था, जिसे वे समझ नहीं पाईं।”

– गणेश पोद्दार, मृतका के पति (सेवानिवृत्त दारोगा)

सर्पदंश और इसके लक्षण

भारत में खासकर बिहार के सीमांचल और ग्रामीण इलाकों में सर्पदंश की घटनाएं बेहद आम हैं। बारिश और अत्यधिक नमी वाले मौसम में सांप सुरक्षित और सूखे स्थानों की तलाश में इंसानी बस्तियों के करीब आ जाते हैं। सुबह के समय जब रोशनी कम होती है, तो बगीचों या खेतों में घास के बीच छिपे सांपों पर अनजाने में पैर पड़ जाता है या हाथ चला जाता है, जिससे वे खुद के बचाव में हमला कर देते हैं। इस मामले में भी आशंका जताई जा रही है कि मीना देवी जब पौधे से फूल तोड़ रही थीं, तब झाड़ियों में छिपे सांप ने उन्हें काट लिया।

आमतौर पर सांप काटने के बाद शरीर में ये मुख्य लक्षण दिखाई देते हैं:

  • काटने वाली जगह पर सुई चुभने जैसा महसूस होना या दांतों के दो छोटे निशान दिखना।
  • तेज चक्कर आना, आंखों के सामने अंधेरा छाना और पलकों का भारी होकर गिरना।
  • सांस लेने में भारी तकलीफ और गले में कुछ फंसने जैसा महसूस होना।
  • मुंह से लगातार लार या सफेद झाग निकलना (यह न्यूरोटॉक्सिक सांप जैसे कोबरा या करैत के काटने का मुख्य लक्षण है)।

तुरंत क्या करें?

सांप के काटने पर घबराहट के कारण शरीर में रक्त संचार तेज हो जाता है, जिससे जहर तेजी से दिमाग और दिल तक पहुंचता है। इसलिए सबसे पहले पीड़ित व्यक्ति को शांत रखना और सही कदम उठाना बेहद जरूरी है।

क्या करना चाहिए क्या बिल्कुल न करें
मरीज को शांत लिटाएं और अंग को बिल्कुल न हिलने दें। काटे गए स्थान पर चीरा न लगाएं और न ही मुंह से जहर चूसने की कोशिश करें।
हाथ या पैर में पहने गए जेवर, घड़ी या तंग कपड़े तुरंत उतार दें। घाव पर बर्फ, गर्म पानी या कोई घरेलू देसी जड़ी-बूटी का लेप न लगाएं।
जितनी जल्दी हो सके मरीज को निकटतम सरकारी अस्पताल (जैसे GMCH) पहुंचाएं। मरीज को सोने न दें और न ही उसे चाय, कॉफी या कोई अन्य नशीली चीज दें।

झाड़-फूंक से बचें

आज भी समाज में शिक्षा की कमी के कारण लोग सर्पदंश होने पर सबसे पहले ओझा-गुनी या तांत्रिकों के पास जाकर झाड़-फूंक कराने लगते हैं। यह अंधविश्वास मरीज के लिए जानलेवा साबित होता है। सांप के जहर का एकमात्र वैज्ञानिक और प्रामाणिक इलाज एंटी-स्नेक वेनम (ASV) इंजेक्शन है। यह जीवनरक्षक इंजेक्शन सभी बड़े सरकारी अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध होता है। ओझा के पास जाकर समय बर्बाद करने से जहर पूरे शरीर में फैल जाता है और मरीज को बचाना नामुमकिन हो जाता है। गणेश पोद्दार ने समझदारी दिखाई और तुरंत अस्पताल गए, हालांकि जहर बहुत घातक होने के कारण इलाज बेअसर रहा।

अस्पताल की तैयारी

जीएमसीएच पूर्णिया के डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल में एंटी-स्नेक वेनम की पर्याप्त खुराक हर समय उपलब्ध रहती है। लोगों को बस इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वे घटना के तुरंत बाद बिना समय गंवाए सीधे अस्पताल आएं। स्थानीय प्रशासन भी समय-समय पर लोगों से अपील करता है कि सुबह के समय खेतों, बगीचों या झाड़ियों की तरफ जाते समय हमेशा पैरों में मोटे जूते पहनें, हाथ में लाठी रखें और रोशनी के लिए टॉर्च का उपयोग जरूर करें ताकि ऐसे हादसों से बचा जा सके। फिलहाल, मीना देवी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की अंतिम पुष्टि की जाएगी।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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