सुपौल,अंग भारत। बिहार के सुपौल न्याय मंडल में 14 मार्च को वर्ष के पहले राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन किया जा रहा है, जिसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष अनंत सिंह के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित होने वाले इस लोक अदालत में आपसी सुलह और समझौते के आधार पर मुकदमों के त्वरित निपटारे के लिए कुल 14 विशेष बेंचों का गठन किया गया है। इनमें से 11 बेंच सुपौल न्यायमंडल मुख्य परिसर में और 3 बेंच वीरपुर अनुमण्डलीय न्यायालय में काम करेंगी, जहां चेक बाउंस, बिजली बिल विवाद, बैंक लोन रिकवरी और वाहन दुर्घटना क्लेम जैसे सभी प्रकार के शमनीय (सुलह योग्य) मामलों का बिल्कुल मुफ्त और तुरंत निपटारा किया जाएगा।
कोर्ट कचहरी से मुक्ति
लंबे समय से कोर्ट के चक्कर काट रहे लोगों के लिए यह एक बड़ा मौका है। भारत में अदालतों पर मुकदमों का भारी बोझ है। ऐसे में लोक अदालतें आम जनता के लिए राहत की सांस बनकर आती हैं। सुपौल के जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष अनंत सिंह की देखरेख में इस बार का आयोजन काफी बड़े स्तर पर हो रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य बिना किसी खर्च के, दोनों पक्षों की आपसी सहमति से विवाद को हमेशा के लिए समाप्त करना है। मुकदमों के चक्कर में लोगों का पैसा और समय दोनों बर्बाद होता है, जिससे बचने के लिए लोक अदालत सबसे बेहतरीन जरिया है।
बेंचों की पूरी जानकारी
मामलों की भारी संख्या को देखते हुए प्रशासन ने इस बार काम को व्यवस्थित तरीके से बांट दिया है। इसके लिए कुल 14 बेंच तैयार हैं जो अलग-अलग मामलों की सुनवाई करेंगी:
- सुपौल न्यायमंडल: मुख्य व्यवहार न्यायालय परिसर में कुल 11 बेंच काम करेंगी।
- वीरपुर अनुमंडल: वीरपुर अनुमण्डलीय न्यायालय में स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए 3 बेंच बनाई गई हैं।
इन सभी बेंचों पर न्यायिक अधिकारियों के साथ-साथ अनुभवी सुलहकर्ताओं को नियुक्त किया गया है, ताकि हर मामले को संवेदनशीलता के साथ सुना जा सके और दोनों पक्षों के बीच बिना किसी विवाद के सहमति बनाई जा सके।
कौन से मामले सुलझेंगे?
इस राष्ट्रीय लोक अदालत में ऐसे मामलों को प्राथमिकता दी जा रही है जो समझौते के योग्य हैं। यदि आपका कोई मामला नीचे दी गई श्रेणियों में आता है, तो आप इसका लाभ उठा सकते हैं:
- बैंक ऋण मामले: विभिन्न बैंकों के कर्ज से जुड़े विवाद और लोन रिकवरी के पुराने मामले।
- बिजली एवं पानी बिल: बिजली विभाग से जुड़े बकाया बिल और बिजली चोरी के शमनीय केस।
- चेक बाउंस विवाद: धारा 138 (एनआई एक्ट) के तहत आने वाले चेक बाउंस के मामले।
- वाहन दुर्घटना दावा: मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) के तहत लंबित मुआवजे के मामले।
- शमनीय आपराधिक मामले: छोटे-मोटे विवाद, मारपीट या पारिवारिक झगड़े जो कानूनन सुलह योग्य हैं।
लोक अदालत के फायदे
आम अदालतों की तुलना में लोक अदालत में मामला सुलझाना कई गुना बेहतर माना जाता है। इसके कुछ बड़े फायदे इस प्रकार हैं:
लोक अदालत का फैसला दोनों पक्षों की आपसी सहमति से होता है। इसलिए इसमें किसी की हार नहीं होती और न ही किसी की जीत होती है। दोनों पक्ष हंसते-मुस्कुराते कोर्ट से बाहर आते हैं और उनके बीच का आपसी मनमुटाव हमेशा के लिए खत्म हो जाता है।
यहाँ कोई अदालती फीस नहीं लगती। अगर आपने पहले कोई कोर्ट फीस जमा की है, तो फैसला होने पर वह भी वापस मिल जाती है। इसके अलावा, लोक अदालत के फैसले के खिलाफ कहीं कोई अपील नहीं होती। इसका मतलब है कि मुकदमेबाजी का दौर वहीं खत्म हो जाता है और सालों का मानसिक तनाव मिनटों में दूर हो जाता है।
हेल्प डेस्क की सुविधा
अक्सर कोर्ट परिसर में आने वाले गरीब और ग्रामीण लोगों को यह समझ नहीं आता कि उन्हें किस काउंटर पर जाना है या उनके केस की सुनवाई किस बेंच पर हो रही है। इस समस्या को दूर करने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। सुपौल न्याय मंडल के पुराने भवन (ओल्ड बिल्डिंग) और नए भवन (न्यू बिल्डिंग) दोनों के प्रांगण में विशेष ‘हेल्प डेस्क’ स्थापित किए जाएंगे। इन हेल्प डेस्क पर तैनात कर्मचारी और स्वयंसेवक आने वाले हर फरियादी की मदद करेंगे, उनके दस्तावेजों की जांच करेंगे और उन्हें सही बेंच तक पहुंचाएंगे ताकि उनका समय बर्बाद न हो।
सुबह 10 बजे उद्घाटन
राष्ट्रीय लोक अदालत की शुरुआत 14 मार्च की सुबह ठीक 10 बजे होगी। सुपौल व्यवहार न्यायालय के प्रांगण में एक सादे और गरिमापूर्ण समारोह में दीप प्रज्वलित कर इसका विधिवत उद्घाटन किया जाएगा। इस दौरान न्यायिक सेवा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहेंगे। उद्घाटन के तुरंत बाद सभी 14 बेंचों पर मुकदमों की सुनवाई शुरू हो जाएगी। अगर आपके पास भी कोई नोटिस आया है या आप अपना कोई पुराना लंबित मामला सुलझाना चाहते हैं, तो सुबह समय पर पहुंचकर इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाएं।








