पश्चिमी सिहभूम,अंग भारत| चाईबासा मंडल कारा के मुख्य गेट पर हुई गोलीबारी की चर्चित घटना का पुलिस ने सफल खुलासा कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में सुजीत सिन्हा गिरोह से जुड़े एक मुख्य आरोपित समीर अंसारी उर्फ नसरू को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पुलिस के तकनीकी और मानवीय अनुसंधान का नतीजा है, जिसने कुख्यात अपराधियों के इस नेटवर्क की परतें उधेड़ दी हैं। घटना के बाद से ही इलाके में दहशत का माहौल था, लेकिन पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने अपराधियों के मनोबल को बड़ा झटका दिया है।
घटना का विवरण
6 अक्टूबर 2024 की तारीख को चाईबासा मंडल कारा का मुख्य द्वार गोलियों की गड़गड़ाहट से दहल उठा था। अज्ञात अपराधियों ने जेल गेट के समीप अंधाधुंध फायरिंग की थी, जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। इस मामले में पुलिस ने सदर थाना कांड संख्या 79/2024 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109 और आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत मुकदमा दर्ज किया था। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए विशेष टीम का गठन किया गया था।
पुलिस की प्रेस वार्ता
पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) तरुण कुमार ने रविवार को कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान पूरे मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान जब पुलिस ने तकनीकी सबूतों और खुफिया जानकारी का मिलान किया, तो समीर अंसारी का नाम प्रमुखता से सामने आया। समीर पलामू जिले के तरहसी थाना क्षेत्र के महुडंडवा गांव का रहने वाला है और उसके पिता का नाम स्वर्गीय जसीम अंसारी है। पुलिस ने उसके पास से घटना में प्रयुक्त काले रंग की पल्सर मोटरसाइकिल भी बरामद की है, जो इस केस में सबसे बड़ा साक्ष्य साबित हुई है।
सुजीत सिन्हा गिरोह कनेक्शन
पूछताछ के दौरान समीर अंसारी ने कई अहम खुलासे किए हैं। उसने स्वीकार किया है कि वह कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा के गिरोह के लिए काम करता है। पुलिस के अनुसार, गिरोह के अन्य सदस्यों के नाम भी सामने आए हैं, जिनकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। सुजीत सिन्हा गिरोह का राज्य के कई जिलों में खौफ है, और चाईबासा जेल गेट पर फायरिंग को इसी गिरोह के वर्चस्व की लड़ाई या धमकी देने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
आरोपित का आपराधिक रिकॉर्ड
समीर अंसारी उर्फ नसरू केवल एक घटना में शामिल नहीं है, बल्कि उसका एक लंबा आपराधिक इतिहास रहा है। उसके खिलाफ पूर्व में भी गंभीर मामले दर्ज हैं:
- सदर थाना डाल्टनगंज में कांड संख्या 33/2025 दर्ज है।
- यह मामला दिनांक 13 जनवरी 2025 को दर्ज किया गया था।
- उस पर धारा 111(2)(इइ) और आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-बी)(ए)/26/35 के तहत आरोप तय किए गए हैं।
न्यायिक हिरासत और कार्रवाई
गिरफ्तार आरोपित को रविवार, 15 मार्च 2026 को अदालत के आदेशानुसार न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब उन अन्य चेहरों को बेनकाब करने में जुटी है, जो इस हमले में समीर अंसारी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े थे। पुलिस का स्पष्ट कहना है कि जल्द ही बाकी अपराधी भी सलाखों के पीछे होंगे।
सफल छापेमारी टीम
इस पूरी जांच और गिरफ्तारी प्रक्रिया को अंजाम देने वाली टीम में कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल थे। इस ऑपरेशन की कमान पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) तरुण कुमार ने संभाली थी, जो सदर थाना प्रभारी का भी दायित्व देख रहे हैं। उनके साथ निम्नलिखित अधिकारियों ने मुख्य भूमिका निभाई:
| अधिकारी का नाम | पदनाम |
|---|---|
| उपेंद्र नारायण सिंह | पुलिस अवर निरीक्षक |
| श्रीकांत कुमार | अवर निरीक्षक |
इसके अलावा, सदर थाना के अन्य पुलिसकर्मियों का भी सराहनीय योगदान रहा। पुलिस की यह कार्यशैली दर्शाती है कि कानून हाथ में लेने वाले अपराधियों को झारखंड पुलिस अब और अधिक सख्ती से निपटाने की तैयारी में है।








