रांची,अंग भारत। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 16वें दिन की कार्यवाही के दौरान विधायक सरयू राय ने जमशेदपुर के मानगो क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित पेयजल परियोजना में हो रही अत्यधिक देरी का मामला जोर-शोर से उठाया। वर्ष 2009 में शुरू हुई यह महत्वपूर्ण जलापूर्ति योजना आज भी अधूरी है, जिससे लाखों की आबादी प्रभावित है। सदन में सरयू राय ने साफ तौर पर कहा कि 2019 से 2024 के बीच इस प्रोजेक्ट को पूरी तरह से उपेक्षित रखा गया, जिसके कारण जलमीनारें आधी-अधूरी पड़ी हैं और इंटेक वेल में जमा बालू की सफाई तक नहीं हुई है।
परियोजना में प्रशासनिक लापरवाही
सरयू राय ने विधानसभा में विस्तार से बताया कि मानगो पेयजल परियोजना की दुर्दशा के पीछे लापरवाही का एक बड़ा चक्र है। उनके अनुसार, पुराने मोटरों को समय पर नहीं बदला गया, जिससे जलापूर्ति तंत्र पूरी तरह चरमरा गया है। सबसे गंभीर स्थिति यह है कि यह योजना क्षेत्र की जनता की प्यास बुझाने में सक्षम नहीं है, जिस वजह से आज भी एमजीएम अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों तक पानी पहुँचाने के लिए टैंकरों का सहारा लेना पड़ता है। यह सरकारी तंत्र की विफलता का सीधा उदाहरण है कि एक दशक से अधिक समय बीतने के बाद भी जनता को बुनियादी पेयजल सुविधा नसीब नहीं हो सकी है।
मंत्री का जवाब और आश्वासन
विधायक के सवालों का जवाब देते हुए मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने परियोजना में देरी के लिए केंद्र सरकार से एनओसी (NOC) मिलने में हुई देरी को मुख्य कारण बताया। उन्होंने सदन को आश्वासन दिया कि सरकार इस दिशा में कार्य कर रही है और मार्च 2026 तक हर हाल में मानगो पेयजल परियोजना को पूरा कर लिया जाएगा।
- एमजीएम अस्पताल को वर्तमान में प्रतिदिन 72 हजार लीटर पानी टैंकरों के माध्यम से भेजा जा रहा है।
- परियोजना के फ़ेज-2 का निर्माण अब अनिवार्य हो गया है ताकि पानी की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।
- सरकार ने भविष्य में जलापूर्ति को सुदृढ़ करने के लिए तकनीकी बाधाओं को दूर करने की बात कही है।
नगर पंचायत का मुद्दा
पेयजल संकट के अलावा, सरयू राय ने कोडरमा के डोमचांच को नगर पंचायत घोषित करने की अधिसूचना को रद्द करने की मांग रखी। इस मांग पर मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने स्पष्ट किया कि जनगणना की नई रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले पर कोई ठोस निर्णय लिया जा सकेगा। वर्तमान में सरकार इस रिपोर्ट का इंतज़ार कर रही है ताकि प्रशासनिक सीमाओं के निर्धारण में स्पष्टता बनी रहे।
अभियंताओं के वेतन का विवाद
सदन की कार्यवाही के दौरान विधायक आलोक कुमार चौरसिया ने पथ निर्माण विभाग में सहायक अभियंताओं (AE) की नियुक्ति, पदस्थापन और वेतन भुगतान से जुड़े गंभीर प्रश्न उठाए। यह मामला मुख्य रूप से सहायक अभियंताओं के कार्यभार ग्रहण करने से पहले की अवधि के वेतन भुगतान से संबंधित है।
चार बिंदुओं पर स्पष्टीकरण
आलोक कुमार चौरसिया ने मंत्री से निम्नलिखित चार प्रमुख बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी की मांग की:
- वित्त विभाग के 20 मई 2022 के संकल्प संख्या 1337 का पालन।
- क्या प्रशासी विभाग बिना वित्त विभाग की सहमति के पदस्थापन या प्रभार रहित अवधि को विनियमित कर सकता है?
- 2007 बैच के सहायक अभियंताओं की नियुक्ति से पदभार ग्रहण तक की अवधि को ‘अनिवार्य प्रतीक्षा’ माना जाए।
- वर्ष 2022 में नियुक्त सहायक अभियंताओं को वेतन भुगतान न करने का आधार।
सरकार का आधिकारिक रुख
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने माना कि यह मामला अभी विभागीय प्रक्रिया के अधीन है। उन्होंने संकेत दिए कि विभाग इस विषय पर संवेदनशीलता के साथ समीक्षा कर रहा है। आलोक कुमार चौरसिया द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर उन्होंने भरोसा दिलाया कि नियमानुसार ही आगे की कार्यवाही की जाएगी। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सहायक अभियंताओं के मनोबल और विभाग की कार्यक्षमता सीधे तौर पर इन प्रशासनिक निर्णयों से जुड़ी हुई है। सदन में इन मुद्दों का उठना यह दर्शाता है कि विपक्षी विधायक विकास कार्यों और विभागीय विसंगतियों को लेकर सरकार पर दबाव बनाए रखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।








