असम, अंग भारत। असम के विभिन्न हिस्सों में सोमवार रात आए भीषण तूफान, मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि ने भारी तबाही मचाई है, जिससे गुवाहाटी समेत राज्य के कई जिलों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। तेज हवाओं के कारण सैकड़ों घरों की टीन की छतें उड़ गईं, बिजली के खंभे उखड़ गए और मुख्य मार्गों पर बड़े-बड़े पेड़ गिरने से यातायात घंटों बाधित रहा। इस प्राकृतिक आपदा के कारण ग्रामीणों की संपत्ति और कृषि को अपूरणीय क्षति हुई है, हालांकि राहत की बात यह है कि प्रशासन की प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
बोको में भारी तबाही
कामरूप (ग्रामीण) जिले का बोको क्षेत्र इस तूफान की मार सबसे अधिक झेल रहा है। यहाँ 30 से अधिक गांवों में हवा की रफ्तार इतनी तेज थी कि लोग संभलने का मौका तक नहीं पा सके। कई कच्चे मकान और झोपड़ीनुमा घर पूरी तरह धराशायी हो गए। स्थानीय लोगों की मानें तो घरों का कीमती सामान और पशुओं के चारे तक को काफी नुकसान पहुंचा है।
- भेहुआ गांव में एक व्यक्ति के तीन घर पूरी तरह ढह गए, गनीमत रही कि परिवार के सदस्य सुरक्षित निकल आए।
- राशन की छोटी दुकानों की छतें उड़ने से सारा अनाज और खाद्य सामग्री बारिश में भीगकर बर्बाद हो गई।
- बिजली के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे अधिकांश गांव अंधेरे में डूबे हैं।
कृषि और संपत्ति नुकसान
पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिले के खेरनी इलाके में प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिला। जिरिम कार्बी, जिरिबासा, गोहाईं और दीथलेम गांवों में सुपारी (तामुल) और नारियल के सैकड़ों पेड़ जड़ से उखड़ गए। इन क्षेत्रों में सुपारी की खेती किसानों की आय का मुख्य स्रोत है, जिसे इस तूफान ने पूरी तरह तबाह कर दिया है। ग्रामीण अब सरकार से आर्थिक मुआवजे की मांग कर रहे हैं ताकि वे अपने नुकसान की भरपाई कर सकें।
होजाई में व्यापक असर
होजाई जिले का लंका क्षेत्र, विशेषकर 2 नंबर नेपाली बस्ती, तूफान के केंद्र में रहा। यहां न केवल आवासीय घरों को नुकसान पहुंचा, बल्कि कई छोटे गोदामों की टीन की छतें उड़ने से व्यापारिक संपत्ति भी नष्ट हो गई। जिले के अन्य हिस्सों से भी लगातार नुकसान की खबरें आ रही हैं, जहां स्थानीय लोग अपने टूटे घरों को ढंकने के लिए तिरपाल और प्लास्टिक का सहारा ले रहे हैं।
प्रशासनिक राहत कार्य
मंगलवार सुबह होते ही प्रशासन हरकत में आ गया। वन विभाग की टीमें सड़कों पर गिरे पेड़ों को काटने और उन्हें हटाने का काम कर रही हैं ताकि यातायात सामान्य हो सके। साथ ही, बिजली विभाग के कर्मचारी क्षतिग्रस्त तारों और खंभों को ठीक करने में जुटे हैं ताकि जल्द से जल्द प्रभावित क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति बहाल की जा सके।
मुआवजे की मांग
पीड़ित ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से नुकसान का आधिकारिक आकलन किया जाए। प्रशासन को प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी आश्रय और राशन की व्यवस्था करनी चाहिए ताकि वे इस कठिन समय में अपना जीवन निर्वाह कर सकें।
अभी तक नुकसान का कुल आंकड़ा सरकार द्वारा घोषित नहीं किया गया है, लेकिन विभिन्न जिलों से प्राप्त प्रारंभिक जानकारी संकेत देती है कि आर्थिक नुकसान करोड़ों में हो सकता है। सरकारी अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और प्रभावित गांवों में राहत सामग्री भेजने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।








