पूर्णियाँ,अंग भारत। पूर्णियाँ के सदर थाना क्षेत्र के आदर्श नगर कॉलोनी, खुशकीबाग, कप्तानपारा स्थित मोहिनी फूड प्रोडक्ट्स पर पुलिस ने छापेमारी कर नकली स्नैक्स बनाने वाली एक बड़ी फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में भारी मात्रा में नकली पालक पनीर रोल और विभिन्न प्रकार के पैकेजिंग मैटीरियल बरामद किए गए हैं। पुलिस ने फैक्ट्री के मालिक विवेक बैद को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है, ताकि इस अवैध कारोबार के पीछे के पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके। यह मामला न केवल कॉपीराइट उल्लंघन का है, बल्कि जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ का एक गंभीर उदाहरण भी है।
छापेमारी की पूरी घटना
सदर थाना पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि खुशकीबाग के एक रिहायशी इलाके में नामी कंपनियों के नाम पर नकली स्नैक्स तैयार किए जा रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मोहिनी फूड प्रोडक्ट्स पर दबिश दी। वहां का नजारा चौंकाने वाला था। फैक्ट्री के अंदर बड़ी तादाद में तैयार नकली पालक पनीर रोल और संदिग्ध पैकेजिंग सामग्री बिखरी पड़ी थी। मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए फैक्ट्री मालिक विवेक बैद को हिरासत में लिया। प्राथमिक पूछताछ में विवेक ने स्वीकार किया कि यह अवैध धंधा पिछले कई महीनों से चल रहा था।
अम्बे फूड्स की शिकायत
इस पूरे मामले की जानकारी तब सामने आई जब असली पालक पनीर स्नैक्स बनाने वाली दरभंगा की कंपनी, एम/एस अम्बे फूड प्रोडक्ट्स ने इस जालसाजी की शिकायत दर्ज कराई। कंपनी के ट्रेडमार्क और उत्पाद की गुणवत्ता की रक्षा के लिए कोलकाता स्थित एम/एस जीएस आईपीआर सर्विसेज़ को जिम्मा सौंपा गया था। इस एजेंसी के प्रतिनिधि श्री पंकज श्रीवास्तव ने सदर थाना में बाकायदा लिखित आवेदन दिया था। श्री पंकज श्रीवास्तव की सक्रियता के कारण ही पुलिस को इस संगठित अपराध का पता लगाने में मदद मिली।
आपूर्ति का काला कारोबार
पकड़े गए फैक्ट्री मालिक विवेक बैद ने पूछताछ के दौरान एक बड़ा खुलासा किया है। उसने बताया कि वह खुद इन रोल्स को नहीं बनाता था, बल्कि गुलाबबाग के एक सप्लायर से नकली रोल और पैकेजिंग मैटीरियल खरीदता था। अब सदर थाना पुलिस उस सप्लायर की सरगर्मी से तलाश कर रही है। पुलिस का मानना है कि यदि सप्लायर हाथ लगता है, तो नकली स्नैक्स की इस पूरी चेन का पर्दाफाश हो जाएगा।
स्वास्थ्य के लिए खतरा
- नकली स्नैक्स बनाने में उपयोग की गई सामग्री की गुणवत्ता का कोई मानक नहीं होता।
- बिना किसी लाइसेंस या एफएसएसएआई (FSSAI) मानकों का पालन किए इन्हें पैक किया जाता है।
- इनमें मिलाई जाने वाली चीजें पेट संबंधी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती हैं।
- उपभोक्ताओं को असली ब्रांड के नाम पर स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ परोसा जा रहा था।
जांच की वर्तमान स्थिति
वर्तमान में पुलिस विवेक बैद से गहन पूछताछ कर रही है। छापेमारी के दौरान बरामद किए गए नमूनों को जांच के लिए भेजने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा विभाग के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इस तरह के और कितने ठिकाने शहर में चल रहे हैं। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि इन नकली उत्पादों को किन-किन दुकानों पर सप्लाई किया जा रहा था, ताकि उन तक पहुंचकर बाजार से नकली माल को हटाया जा सके।
कानूनी कार्रवाई और परिणाम
यह मामला सीधे तौर पर इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। एम/एस जीएस आईपीआर सर्विसेज़ के श्री पंकज श्रीवास्तव द्वारा दी गई कानूनी शिकायत ने इस मामले को और भी पुख्ता कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी भी कंपनी का नाम और ब्रांड इस्तेमाल करके नकली सामान बेचा जाता है, तो यह दंडनीय अपराध है। फैक्ट्री मालिक विवेक बैद पर अब सख्त कानूनी कार्रवाई तय है, साथ ही उन सभी लोगों पर भी शिकंजा कसा जाएगा जो इस सप्लाई चेन का हिस्सा हैं।
“ग्राहकों को हमेशा पैकेट पर छपे एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर और उसकी सीलिंग की जांच कर लेनी चाहिए। नामी कंपनियों के लोगो का गलत इस्तेमाल करके आम जनता को धोखा देना अक्षम्य है।”
स्थानीय प्रशासन और पुलिस की यह कार्रवाई उन सभी लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो कम समय में ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में लोगों की जान जोखिम में डालते हैं। पुलिस ने लोगों से भी अपील की है कि अगर उन्हें बाजार में किसी भी खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता पर संदेह हो, तो तुरंत सदर थाना को सूचित करें।








