रजौन/बांका/अंग भारत। रजौन प्रखंड के धौनी-बामदेव पंचायत अंतर्गत वार्ड नंबर 7, उत्तरी महादा गांव में जल-जमाव की समस्या ने अब एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले लिया है, जहां गंदा पानी सड़कों पर जमा होने से ग्रामीणों का दैनिक जीवन नारकीय हो गया है। इस समस्या के त्वरित समाधान के लिए ग्रामीणों ने मंगलवार को प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) को लिखित आवेदन सौंपा है। यह स्थिति न केवल आवागमन में बाधा बन रही है, बल्कि गांव में संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा भी पैदा कर रही है, जिसके विरोध में ग्रामीणों ने अब प्रशासन को ठोस कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
समस्या का विकराल रूप
उत्तरी महादा गांव की मुख्य सड़क पर लंबे समय से पानी जमा है, जिसके निकासी का कोई उचित मार्ग नहीं है। यह जमा हुआ पानी केवल बारिश का नहीं, बल्कि घरों से निकलने वाला गंदा पानी है जो सड़क के बीचों-बीच एक तालाब जैसा बन गया है। स्थिति इतनी खराब है कि लोग अपने ही घरों से बाहर निकलने में संकोच कर रहे हैं। पैदल चलने वाले राहगीरों के लिए तो यह और भी अधिक जोखिम भरा है, क्योंकि गंदे पानी के अंदर छिपे गड्ढों और कचरे से चोट लगने का डर हमेशा बना रहता है।
स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव
जल-जमाव की इस स्थिति ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को जन्म दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जल-जमाव के कारण उत्पन्न हुई तीव्र दुर्गंध से सांस लेना दूभर हो गया है। इसके अलावा, ठहरे हुए गंदे पानी में मच्छरों का प्रजनन तेजी से हो रहा है, जिससे इलाके में डेंगू, मलेरिया और अन्य जलजनित बीमारियों के फैलने का भय ग्रामीणों को सता रहा है। बच्चे और बुजुर्ग विशेष रूप से प्रभावित हो रहे हैं, जिनका स्वास्थ्य लगातार गिरता जा रहा है।
ग्रामीणों का आधिकारिक आग्रह
स्थानीय निवासी बजरंगी साह, विनय कुमार साह, पवन साह, नौरंगी साह, सिंधु देवी, नवलेश कुमार, कुमोद साह, ललन भगत, पवन कुमार भगत, योगेंद्र प्रसाद भगत और हीरा लाल भगत सहित अन्य ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से प्रखंड विकास पदाधिकारी के समक्ष अपनी बात रखी है। आवेदन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई, तो गांव में बड़ी महामारी फैल सकती है।
प्रशासन को चेतावनी
ग्रामीणों ने अब केवल गुहार लगाने तक ही खुद को सीमित नहीं रखा है। उन्होंने प्रशासन को सख्त चेतावनी दी है कि यदि अविलंब जल निकासी के लिए नालियों का निर्माण या पानी की निकासी सुनिश्चित नहीं की जाती है, तो वे सड़क पर उतरकर धरना-प्रदर्शन करेंगे। ग्रामीणों का मानना है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण ही यह समस्या अब नियंत्रण से बाहर होती जा रही है।
स्थानीय प्रशासन की भूमिका
महादा गांव में जल-जमाव की इस समस्या के पीछे जल निकासी तंत्र (Drainage System) का अभाव मुख्य कारण है। इस मामले में धौनी-बामदेव पंचायत के जनप्रतिनिधियों को भी सक्रिय होने की आवश्यकता है। वर्तमान स्थिति यह है कि:
- सड़क पर जमा पानी से आवागमन पूरी तरह बाधित है।
- मच्छरों के प्रकोप के कारण स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों की संख्या बढ़ सकती है।
- सफाई व्यवस्था के अभाव में गंदगी सड़ रही है।
इस संकट के समाधान के लिए अब बीड़ीओ को यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित विभाग जल निकासी के लिए तत्काल सर्वेक्षण करे। अस्थायी रूप से पानी पंप करके निकालने की आवश्यकता है, जबकि स्थायी रूप से पक्की नालियों का निर्माण अनिवार्य हो गया है। गांव वालों का धैर्य अब जवाब दे रहा है, और आने वाले कुछ दिनों में यदि कार्य धरातल पर नहीं दिखता है, तो स्थिति और तनावपूर्ण हो सकती है।
“हम प्रशासन से कोई बड़ी मांग नहीं कर रहे हैं, बस जीने के लिए मूलभूत सुविधा चाहते हैं। जल-जमाव से घर से निकलना भी अब एक बड़ी चुनौती बन गया है।” – ग्रामीणों की पीड़ा का सार।
आगामी दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्थानीय प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है और कब तक महादा गांव के इन वार्ड नंबर 7 के निवासियों को जल-जमाव की इस नारकीय स्थिति से मुक्ति मिलती है।








