रांची,अंग भारत। झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 17वें दिन सदन में राशन डीलरों के कमीशन में बढ़ोतरी और आउटसोर्सिंग नियुक्तियों में हो रहे भ्रष्टाचार का मामला छाया रहा। इस दौरान बरकट्ठा के विधायक अमित कुमार यादव ने डीलरों के कम कमीशन का मुद्दा उठाते हुए सरकार से राहत की मांग की, वहीं विधायक प्रदीप यादव ने आउटसोर्सिंग कंपनियों द्वारा युवाओं से अवैध वसूली और शोषण का गंभीर आरोप लगाया। इन सवालों पर खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सरकार का पक्ष रखते हुए सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया है।
राशन डीलरों का कमीशन
विधानसभा में राशन डीलरों की दयनीय आर्थिक स्थिति पर चर्चा करते हुए बरकट्ठा के विधायक अमित कुमार यादव ने तीखे सवाल किए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वर्तमान में डीलरों को मिलने वाला कमीशन इतना कम है कि उनका घर चलाना मुश्किल हो गया है। अमित कुमार यादव ने सदन में तंज कसते हुए यह भी कहा कि अगर सिस्टम के दबाव में डीलर दो किलो अनाज कम तौल देता है, तो उसे अपराधी की तरह देखा जाता है, जबकि सच्चाई यह है कि सरकार उन्हें पर्याप्त वेतन ही नहीं दे रही है।
मंत्री का जवाब
इस पर राज्य के खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने अपना जवाब रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार डीलरों को प्रति यूनिट डेढ़ रुपये का कमीशन दे रही है। डॉ. इरफान अंसारी ने विपक्ष पर मुद्दे को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार राशन डीलरों के प्रति संवेदनशील है और मौजूदा वितरण प्रणाली में सुधार के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
आउटसोर्सिंग में भ्रष्टाचार
राशन के बाद सदन का माहौल तब और गरमा गया जब आउटसोर्सिंग के माध्यम से की जा रही भर्तियों में अनियमितता का मुद्दा उठा। विधायक प्रदीप यादव ने सदन को बताया कि आउटसोर्सिंग कंपनियां स्थानीय युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कंपनियों द्वारा नौकरी के नाम पर अवैध वसूली की जा रही है और बेरोजगार युवाओं का शोषण हो रहा है।
नियमावली का उल्लंघन
प्रदीप यादव ने सरकार से सीधा सवाल किया कि जब आउटसोर्सिंग के लिए स्पष्ट नियमावली बनी हुई है, तो फिर उसका पालन क्यों नहीं हो रहा है? उन्होंने कहा कि मीडिया में लगातार खबरें आने के बावजूद इन कंपनियों पर कोई ठोस कार्रवाई न होना सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने पारदर्शिता की कमी को राज्य के युवाओं के लिए बड़ा खतरा बताया।
सरकार का आधिकारिक पक्ष
विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि सरकार आउटसोर्सिंग कर्मियों के शोषण को रोकने के लिए पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने सदन को सूचित किया कि:
- कैबिनेट द्वारा आउटसोर्सिंग के लिए स्पष्ट नियमावली पहले से तैयार है।
- वर्तमान में विभागों के लिए जैप आईटी प्रणाली के माध्यम से 14 एजेंसियों को पैनल में शामिल किया गया है।
- यदि कोई एजेंसी निर्धारित शुल्क से अधिक राशि की मांग करती है, तो दोषी पाए जाने पर उसे तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट किया जाएगा।
पारदर्शिता और आरक्षण
इस बहस के दौरान मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने भी अपनी बात रखी। सुदिव्य कुमार सोनू ने स्वीकार किया कि यह एक गंभीर मामला है। उन्होंने विशेष रूप से आरक्षण रोस्टर के पालन में हो रही ढिलाई पर चिंता जताई और कहा कि इसे सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियुक्तियों में पारदर्शिता लाना सरकार की प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
स्थानीय युवाओं की प्राथमिकता
बहस के अंत में सरकार की ओर से यह आश्वासन दिया गया कि आउटसोर्सिंग के माध्यम से की जाने वाली नियुक्तियों में झारखंड के स्थानीय युवाओं को पहली प्राथमिकता दी जाएगी। हालांकि, विपक्ष इस बात पर अड़ा रहा कि केवल आश्वासन काफी नहीं है, बल्कि जमीन पर नियमावली का पालन दिखना चाहिए। विधानसभा की कार्यवाही में इन मुद्दों का उठना यह दर्शाता है कि राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था और पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक हलकों में गहरी चिंता बनी हुई है।








