शिलांग,अंग भारत। इंदौर के व्यवसायी राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी और उनकी पत्नी सोनम को मिली जमानत के खिलाफ पीड़ित परिवार अब मेघालय हाई कोर्ट में चुनौती देने जा रहा है। परिवार का सीधा आरोप है कि सोनम इस हत्याकांड की मास्टरमाइंड है, इसलिए उन्हें जमानत मिलना न्याय प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ है। इसके साथ ही, परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की अपनी पुरानी मांग को और अधिक आक्रामक तरीके से उठाना शुरू कर दिया है।
जमानत पर उठे सवाल
राजा रघुवंशी के भाई विपिन रघुवंशी ने अदालत के इस फैसले पर गहरी निराशा और नाराजगी जताई है। परिवार का तर्क है कि जिस मामले में इतने पुख्ता सबूत होने की बात पुलिस ने की है, उसमें मुख्य आरोपी को राहत मिलना चिंताजनक है।
- पीड़ित परिवार कानूनी विशेषज्ञों की सलाह पर हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेगा।
- परिवार का मानना है कि सोनम के बाहर आने से केस के गवाह प्रभावित हो सकते हैं।
- जांच एजेंसियों के काम करने के तरीके और प्रक्रियात्मक खामियों पर भी सवाल उठाए गए हैं।
गिरफ्तारी का आधार
जमानत सुनवाई के दौरान सोनम के वकीलों ने एक तकनीकी पहलू का इस्तेमाल किया। उन्होंने तर्क दिया कि मेघालय पुलिस ने गिरफ्तारी करते समय सोनम को उसके संवैधानिक अधिकारों और गिरफ्तारी के वास्तविक कारणों की उचित जानकारी नहीं दी थी। अदालत ने इस तकनीकी चूक को आधार बनाकर सोनम को राहत दी। हालांकि, मृतक के परिजन इसे केवल एक बहाना मानते हैं और उनका कहना है कि हत्या जैसे संगीन अपराध में प्रक्रियागत बारीकियों के नाम पर न्याय को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
हनीमून बना त्रासदी
यह पूरा मामला 23 मई, 2025 को शुरू हुआ, जब राजा रघुवंशी अपने हनीमून के दौरान मेघालय के सुंदर वादियों में पहुंचे थे। वहां से उनके अचानक लापता होने की खबर ने हर किसी को चौंका दिया। लगभग दो सप्ताह की गहन खोजबीन के बाद, 2 जून को सोहरा इलाके में एक झरने के पास गहरी खाई से उनका शव बरामद किया गया। पुलिस की शुरुआती जांच में ही यह स्पष्ट हो गया था कि यह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित हत्या थी जिसे बहुत ही बेरहमी से अंजाम दिया गया था।
आरोपपत्र और साक्ष्य
घटना के कुछ दिनों बाद, 9 जून 2025 को सोनम को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से हिरासत में लिया गया था। वह करीब दस महीने तक शिलांग की जेल में बंद रही। पुलिस ने इस केस को लेकर एक बहुत विस्तृत 790 पन्नों की चार्जशीट तैयार की है, जिसमें सोनम समेत आठ लोगों को नामजद किया गया है। मुख्य आरोपी के साथ राज कुशवाह का नाम भी इसमें शामिल है। परिवार का आरोप है कि उन्हें आज तक इस चार्जशीट की कॉपी तक नहीं दी गई है, जिससे उन्हें साक्ष्यों की पूरी जानकारी नहीं मिल पा रही है।
न्याय की गुहार
राजा रघुवंशी की मां उमा रघुवंशी ने इस पूरी स्थिति पर कहा है कि उनका बेटा अब वापस नहीं आएगा, लेकिन वे दोषियों को सजा दिलाकर ही दम लेंगी। मां के लिए यह फैसला किसी बड़े सदमे से कम नहीं है। परिवार का साफ कहना है कि स्थानीय पुलिस की जांच में कई जगह उन्हें गड़बड़ियां और ढिलाई दिख रही है।
क्यों चाहिए CBI जांच?
परिवार के अनुसार, जब मामला इतना बड़ा और बहुराज्यीय (multi-state) हो, तो स्वतंत्र एजेंसी से जांच होना ही एकमात्र रास्ता बचता है। उनका मानना है कि:
CBI की जांच से उन तमाम पहलुओं की परतें खुलेंगी जो शायद अभी स्थानीय पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। परिवार को स्थानीय तंत्र पर भरोसा कम हो गया है और वे केंद्र सरकार से दखल की मांग कर रहे हैं।
अभी यह देखना बाकी है कि मेघालय हाई कोर्ट पीड़ित परिवार की इस याचिका को किस तरह देखता है और क्या सोनम की जमानत पर कोई नया आदेश आता है या नहीं। पूरे मामले की हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर अब लोगों की नजर टिकी है।








