गुवाहाटी,अंग भारत। असम सरकार ने राज्य की सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के अपने अभियान को बड़ी सफलता बताते हुए दावा किया है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान 200 वर्ग किलोमीटर से अधिक भूमि कब्जेदारों से वापस ली गई है। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने हाल ही में आयोजित उच्चस्तरीय बैठकों के दौरान यह जानकारी साझा करते हुए बताया कि राज्य की खाली कराई गई जमीन का इस्तेमाल अब जनहित की योजनाओं और विकास कार्यों में किया जाएगा। यह कदम न केवल राज्य की संपदा को सुरक्षित करने के लिए है, बल्कि सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और व्यवस्था सुधारने का भी एक बड़ा उदाहरण है।
अभियान की जमीनी हकीकत
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच सालों में 200 वर्ग किलोमीटर का आंकड़ा पार करना कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। यह भूमि असम के विभिन्न जिलों में फैली हुई थी, जिस पर लंबे समय से अवैध निर्माण या खेती का कब्जा था। सरकार ने अब स्पष्ट कर दिया है कि खाली कराई गई जमीनों को केवल खाली नहीं छोड़ा जाएगा।
- अतिक्रमण मुक्त जमीन पर भविष्य में दोबारा कब्जा न हो, इसके लिए डिजिटल मैपिंग और बाड़बंदी की जा रही है।
- खाली की गई भूमि का उपयोग स्कूल, अस्पताल और खेल के मैदान बनाने के लिए किया जा रहा है।
- कब्जाधारियों के खिलाफ कानून सम्मत कार्रवाई करके सरकारी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाएं
मुख्यमंत्री ने बुनियादी ढांचा विकास को नई रफ्तार देने के लिए केंद्र की ‘व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण’ (VGF) योजना पर विशेष जोर दिया है। शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसी परियोजनाएं तैयार करें जो राज्य के हर नागरिक तक पहुंच सकें।
VGF योजना का महत्व
VGF यानी ‘वायबिलिटी गैप फंडिंग’ का सीधा अर्थ है उन प्रोजेक्ट्स में सरकारी निवेश बढ़ाना जो जनहित में तो हैं, लेकिन निजी निवेश के लिए शायद तत्काल फायदेमंद न हों। असम सरकार इस योजना के जरिए बड़े प्रोजेक्ट्स में आने वाली वित्तीय अड़चनों को दूर कर रही है, जिससे राज्य में बिजली की निर्बाध आपूर्ति और बेहतर सड़क नेटवर्क का सपना साकार हो सके।
कृषि और निर्यात क्षमता
असम की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है। डॉ. सरमा ने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है कि असमिया किसान केवल स्थानीय बाजारों पर निर्भर न रहें। सरकार जीआई-टैग वाले उत्पादों को विश्व स्तर पर प्रमोट कर रही है ताकि किसानों को उनकी फसल का उचित दाम मिल सके।
“निर्यात को बढ़ावा देने का सीधा असर किसानों की जेब पर पड़ेगा। जब हमारा ऑर्गेनिक अदरक या कोई खास चावल वैश्विक बाजार में बिकेगा, तो राज्य की समृद्धि स्वतः बढ़ेगी,” मुख्यमंत्री का मानना है।
एग्रीकल्चर फंड का सदुपयोग
‘एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड’ (AIF) के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता को सीधे तौर पर कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस और प्रोसेसिंग यूनिट्स बनाने में खर्च किया जाएगा। अक्सर किसानों की फसल भंडारण की कमी के कारण खराब हो जाती है। इस फंड से ऐसी संरचनाएं तैयार की जा रही हैं ताकि उपज को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके।
| क्षेत्र | मुख्य लक्ष्य |
|---|---|
| अतिक्रमण मुक्त भूमि | सरकारी योजनाओं के लिए उपयोग |
| कृषि उत्पाद | निर्यात में वृद्धि और ग्लोबल ब्रांडिंग |
| बुनियादी ढांचा | VGF के जरिए बिजली और स्वास्थ्य सुविधा |
किसानों की आय में वृद्धि
सरकार का विजन केवल फसल पैदा करना नहीं, बल्कि उसे सही दाम पर बेचना भी है। कृषि उत्पादक संगठनों (FPO) को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि छोटे किसान एक साथ आकर बड़े स्तर पर व्यापार कर सकें। जब FPO और निर्यातकों के बीच सीधा तालमेल होगा, तो बीचौलियों का प्रभाव खत्म हो जाएगा। इससे किसानों को मिलने वाली आय में सीधे बढ़ोतरी होगी। सरकार का यह स्पष्ट निर्देश है कि अगले कुछ वर्षों में असम के कृषि उत्पादों को एक ‘ग्लोबल पहचान’ मिलनी चाहिए। राज्य का हर हिस्सा, चाहे वह चाय के बागान हों या धान के खेत, अब विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।








