Founder – Mohan Milan

जसपाल राणा के निधन पर शोक की लहर, राष्ट्रपति मुर्मु से लेकर खेल मंत्री तक ने दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली,अंग भारत। पूर्व अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज और बेहतरीन कोच जसपाल राणा के निधन की खबर ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। महज 49 साल की उम्र में उनका जाना भारतीय खेलों के लिए एक बेहद निजी और गहरी क्षति है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और खेल मंत्री मनसुख मांडविया समेत देश की तमाम बड़ी हस्तियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। जसपाल राणा केवल एक नाम नहीं, बल्कि भारतीय शूटिंग की उस पीढ़ी के प्रतीक थे जिसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की पहचान को मजबूती से स्थापित किया था।

एक शानदार करियर की झलक

जसपाल राणा का नाम सुनते ही सबसे पहले 90 के दशक की वो यादें ताजा हो जाती हैं, जब भारतीय निशानेबाजी अपने शुरुआती दौर में थी। उन्होंने न केवल खुद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐसा रोडमैप तैयार किया जो आज भी युवा खिलाड़ियों के काम आता है।

  • एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने भारत को कई बार गौरवान्वित किया।
  • एक सटीक निशानेबाज होने के साथ-साथ, उन्होंने अपने खेल में गजब का संयम और अनुशासन दिखाया।
  • संन्यास के बाद उन्होंने कोच की भूमिका को बखूबी निभाया और कई विश्व स्तरीय निशानेबाज तैयार किए।

राष्ट्रपति की मार्मिक श्रद्धांजलि

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें युवाओं के लिए एक बड़ा प्रेरणास्रोत बताया। राष्ट्रपति ने कहा कि एक खिलाड़ी और मार्गदर्शक के रूप में जसपाल राणा का समर्पण आने वाली पीढ़ियों को हमेशा रास्ता दिखाता रहेगा। उनका जाना सिर्फ एक कोच का नहीं, बल्कि एक ऐसे मार्गदर्शक का जाना है जिसने कई युवा सपनों को नई उड़ान दी थी।

ओम बिरला का भावुक संदेश

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने खास तौर पर 2006 के एशियाई खेलों में उनके शानदार प्रदर्शन को याद किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह का जज्बा राणा साहब ने दिखाया था, वह आज भी किसी भी भारतीय खिलाड़ी के लिए एक मिसाल है। उनके निधन से जो शून्य पैदा हुआ है, उसे भर पाना फिलहाल नामुमकिन सा लग रहा है।

खेल मंत्री ने क्या कहा

केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने उन्हें एक ‘चैंपियन’ करार दिया। उन्होंने कहा कि राणा का योगदान केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने शूटिंग को भारत के छोटे-छोटे शहरों तक लोकप्रिय बनाने का काम किया। उनकी बनाई गई विरासत को संजोकर रखना ही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

नेताओं का गहरा शोक

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जसपाल राणा के व्यक्तिगत गुणों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वह मैदान पर जितने सख्त निशानेबाज थे, असल जिंदगी में उतने ही सरल और नेक इंसान थे। वहीं, जेपी नड्डा ने भी उनके योगदान को नमन करते हुए कहा कि राणा की अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां हमेशा भारतीय खेलों की गौरव गाथा का हिस्सा रहेंगी।

अनुशासन और सफलता का संगम

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उनके कोचिंग करियर पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कोच के तौर पर उन्होंने जिस तरह से नई प्रतिभाओं को तराशा, वह बेमिसाल है। उन्होंने अनुशासन को ही अपनी सफलता का मूल मंत्र बनाया था और यही कारण है कि आज उनके शिष्य दुनिया भर में भारत का तिरंगा ऊंचा कर रहे हैं।

खेल जगत में अमिट छाप

जसपाल राणा के निधन से खेल जगत में जो मायूसी छाई है, वह स्वाभाविक है। उन्होंने निशानेबाजी को केवल एक खेल के रूप में नहीं, बल्कि एक कला के रूप में जीया था।

उनका जाना भारतीय निशानेबाजी का एक युग खत्म होने जैसा है। वह एक ऐसे योद्धा थे जिन्होंने बिना किसी दिखावे के, पूरी मेहनत से देश के लिए पदकों की झड़ी लगाई।

भले ही जसपाल राणा आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी तकनीक, उनका अनुशासन और उनका जीतने का जज्बा उन हजारों युवाओं के दिलों में हमेशा जीवित रहेगा जो उन्हें अपना आदर्श मानते हैं। उनकी कमी भारतीय खेल बिरादरी को लंबे समय तक खलती रहेगी।

Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram
Picture of अंग भारत • रिपोर्टर

अंग भारत • रिपोर्टर

‘अंग भारत’ एक हिंदी दैनिक समाचार पत्र है, जो मिलन ग्रुप द्वारा संचालित एक बहुआयामी मीडिया संगठन का हिस्सा है। हमारा कॉर्पोरेट कार्यालय बिहार के ऐतिहासिक अंग प्रदेश के पवित्र स्थान बांका में स्थित है। हमारा उद्देश्य निष्पक्ष, विश्वसनीय और जनहित से जुड़ी खबरों को पाठकों तक पहुंचाना है।”

Related Posts
Recent Posts
App Icon