काराकास (वेनेजुएला),अंग भारत। वेनेजुएला में आए विनाशकारी दोहरे भूकंप ने देश की कमर तोड़ दी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मौतों का आंकड़ा 2,295 तक पहुंच गया है, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज्यादा भयावह हो सकती है। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि मलबे के नीचे दबे लोगों की बड़ी संख्या को देखते हुए मरने वालों की तादाद 10,000 के पार जा सकती है। यह आपदा न केवल मानवीय त्रासदी है, बल्कि देश के बुनियादी ढांचे के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। राहत कार्य अब भी युद्ध स्तर पर जारी हैं, लेकिन स्थितियां पल-पल बिगड़ रही हैं।
बढ़ती हुई तबाही
नेशनल असेंबली के अध्यक्ष जॉर्ज रोड्रिगेज ने आधिकारिक रूप से 2,295 मौतों की पुष्टि की है। यह संख्या कोई अंतिम आंकड़ा नहीं है। देश के सुदूर इलाकों से आ रही खबरें दिल दहला देने वाली हैं। संयुक्त राष्ट्र के स्थानीय समन्वयक जियानलुका रैम्पोला डेल टिंडारो ने स्थिति को ‘बेहद चिंताजनक’ करार दिया है। बचाव दल के लिए सबसे बड़ी समस्या उन दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचना है जहां सड़कें पूरी तरह कट चुकी हैं और संपर्क टूट चुका है।
लापता और विस्थापित
भूकंप के झटकों ने लाखों लोगों का जीवन उथल-पुथल कर दिया है। आंकड़े हैरान करने वाले हैं:
- 43,000 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं।
- 15,866 लोग बेघर होकर कैंपों में रहने को मजबूर हैं।
- 59,000 से अधिक इमारतें या तो जमींदोज हो गईं या रहने लायक नहीं बचीं।
हजारों परिवार एक पल में ही सब कुछ खो बैठे हैं। इन परिवारों के पास न तो सिर छुपाने की जगह है और न ही खाने-पीने के लिए जरूरी सामान।
आफ्टरशॉक्स का डर
24 जून को आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के इन दोहरे झटकों ने देश को हिलाकर रख दिया है। हालांकि, मुख्य भूकंप के बाद अब तक 782 आफ्टरशॉक्स दर्ज किए जा चुके हैं। ये छोटे-छोटे झटके बचाव कार्य कर रहे जवानों के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं। जब भी मलबा हटाने के लिए भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया जाता है, तो आफ्टरशॉक्स के कारण और अधिक इमारतें गिरने का डर बना रहता है। यही कारण है कि राहत अभियान की रफ्तार बहुत धीमी है।
ईंधन का संकट
विडंबना देखिए, वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है, लेकिन इस आपदा के समय वहां पेट्रोल और डीजल का भारी संकट पैदा हो गया है। ईंधन की कमी ने बचाव कार्यों की रीढ़ तोड़ दी है। भारी मशीनों को चलाने के लिए डीजल की जरूरत है, जो इस समय दुर्लभ हो चुका है। नतीजा यह है कि कई जगहों पर पीड़ित लोग अपने अपनों को ढूँढने के लिए अपने हाथों से कंक्रीट और ईंटें हटाने को मजबूर हैं।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता
इस संकट की घड़ी में दुनिया भर से मदद की कोशिशें हो रही हैं। भारत सहित कई देशों ने सहायता का हाथ बढ़ाया है। स्थिति को देखते हुए निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:
- अमेरिकी सैन्य कर्मियों के करीब 1,700 जवान राहत कार्यों में सक्रिय हैं।
- विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने 5 करोड़ डॉलर की आपातकालीन राहत राशि जुटाने की अपील की है।
- स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा चुकी हैं और उन्हें बाहरी मेडिकल मदद की सख्त जरूरत है।
भविष्य की राह
आने वाले कुछ दिन वेनेजुएला के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। मलबे के नीचे फंसे लोगों के बचने की उम्मीदें हर गुजरते घंटे के साथ कम होती जा रही हैं। सरकार और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को अब दीर्घकालिक पुनर्वास के बारे में सोचना होगा। स्वास्थ्य व्यवस्था पर पहले से ही भारी दबाव था, जो अब और भी गहरा हो गया है। यदि समय रहते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन और चिकित्सा आपूर्ति सुचारू रूप से नहीं पहुंची, तो मरने वालों का आंकड़ा संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी से भी कहीं अधिक हो सकता है। यह एक ऐसा समय है जब पूरी दुनिया को इस संकट को कम करने के लिए एकजुट होने की आवश्यकता है।







