रायपुर,अंग भारत। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को राजनीतिक माहौल गरम रहने वाला है। कांग्रेस विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करेगी। विपक्ष का कहना है कि सरकार जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी है और कई अहम मुद्दों पर पूरी तरह नाकाम रही है। ऐसे में सरकार के खिलाफ सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया गया है।नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा है कि प्रदेश की जनता का सरकार से भरोसा उठ चुका है। उनका आरोप है कि कानून-व्यवस्था, बिजली, किसानों की समस्याएं, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं जैसे कई मुद्दों पर सरकार संतोषजनक काम नहीं कर पाई है। इसी वजह से कांग्रेस सरकार को सदन के भीतर जवाब देने के लिए मजबूर करेगी।
इन मुद्दों पर सरकार से मांगे जाएंगे जवाब
अविश्वास प्रस्ताव के साथ ही कांग्रेस विधानसभा में कई दूसरे अहम मुद्दे भी उठाएगी। प्रश्नकाल के दौरान जल जीवन मिशन की प्रगति, रायपुर शहर की पेयजल व्यवस्था, प्रदेश में बढ़ रही औद्योगिक दुर्घटनाएं, शराब दुकानों के संचालन, सरकारी आयोजनों पर किए जा रहे खर्च और प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों के खाली पड़े पदों को लेकर सरकार से जवाब मांगा जाएगा।कांग्रेस का कहना है कि इन सभी मामलों में सरकार की कार्यशैली सवालों के घेरे में है और जनता इन समस्याओं का लगातार सामना कर रही है।
नवा रायपुर की बुलडोजर कार्रवाई पर भी घिरेगी सरकार
कांग्रेस नवा रायपुर के नकटी गांव में गरीब परिवारों के मकानों पर हुई बुलडोजर कार्रवाई का मामला भी विधानसभा में उठाएगी। इस मुद्दे पर विपक्ष स्थगन प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। कांग्रेस का आरोप है कि गरीबों को बिना उचित व्यवस्था किए उनके घरों से बेदखल किया गया, जो पूरी तरह गलत है।इसके अलावा प्रदेश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और बढ़ते अपराधों को लेकर भी सरकार को घेरने की रणनीति बनाई गई है। विपक्ष का कहना है कि प्रदेश में अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और लोग खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं।
बिजली संकट और किसानों की परेशानी भी बनेगी बड़ा मुद्दा
कांग्रेस विधानसभा में प्रदेश के बिजली संकट और बढ़े हुए बिजली बिल का मामला भी जोर-शोर से उठाएगी। विपक्ष का कहना है कि आम लोगों पर बिजली की बढ़ी हुई दरों का सीधा असर पड़ रहा है। कई इलाकों में बिजली कटौती की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं।किसानों से जुड़े मुद्दे भी कांग्रेस की प्राथमिकता में रहेंगे। उर्वरक और बीज की कमी, समय से पहले सरसों खरीद बंद होने से किसानों को हुए नुकसान और खेती से जुड़ी दूसरी परेशानियों को लेकर सरकार से जवाब मांगा जाएगा।इसके साथ ही हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला खनन के लिए हो रही वनों की कटाई का मुद्दा भी सदन में उठेगा। कांग्रेस का कहना है कि जंगलों की कटाई से पर्यावरण और वहां रहने वाले लोगों पर गंभीर असर पड़ रहा है।
कांग्रेस विधायक दल की बैठक में लिया गया था फैसला
अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला कांग्रेस विधायक दल की बैठक में लिया गया था। बैठक के बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने साफ कर दिया था कि 14 जुलाई को विधानसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जाएगा। कांग्रेस का कहना है कि सरकार को जनता से जुड़े हर मुद्दे पर जवाब देना होगा।
संख्या बल भाजपा के पक्ष में, लेकिन बहस रहेगी अहम
हालांकि विधानसभा में संख्या बल भाजपा के पक्ष में है। 90 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के 54 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के 35 विधायक हैं। एक विधायक गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का है। ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव के पारित होने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है, लेकिन इस प्रस्ताव के जरिए विपक्ष सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की पूरी कोशिश करेगा।छत्तीसगढ़ विधानसभा के इतिहास में यह 10वां अविश्वास प्रस्ताव होगा। इससे पहले नौ बार अलग-अलग सरकारों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए जा चुके हैं, लेकिन हर बार सरकारें बहुमत साबित करने में सफल रही हैं। पहली विधानसभा में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी की सरकार के खिलाफ भाजपा ने 2002 और 2003 में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। इसके बाद डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ कांग्रेस ने पांच बार और भूपेश बघेल सरकार के खिलाफ भाजपा दो बार अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई। सभी प्रस्तावों पर लंबी चर्चा हुई, लेकिन कोई भी प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।अब एक बार फिर विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने होंगे। सदन में तीखी बहस होने के आसार हैं और प्रदेश से जुड़े कई अहम मुद्दों पर सरकार को विपक्ष के सवालों का सामना करना पड़ेगा।










