नई दिल्ली,अंग भारत। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बुधवार को नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) में आयोजित होने वाले तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार ‘सौश्रुतम् 2026’ का उद्घाटन करेंगी। आयुष मंत्रालय की ओर से आयोजित यह कार्यक्रम 15 से 17 जुलाई तक चलेगा, जबकि 14 जुलाई को इसकी पूर्व-कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इस सेमिनार में भारत समेत कई देशों के विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे और आयुर्वेद तथा आधुनिक शल्य चिकित्सा को साथ लेकर आगे बढ़ने के तरीकों पर चर्चा करेंगे।
आचार्य सुश्रुत की जयंती पर हो रहा आयोजन
आयुष मंत्रालय के मुताबिक, इस सेमिनार का आयोजन शल्य चिकित्सा के जनक माने जाने वाले आचार्य सुश्रुत की जयंती के अवसर पर किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य आयुर्वेद की प्राचीन शल्य चिकित्सा पद्धतियों और आधुनिक मेडिकल साइंस के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर विचार करना है।तीन दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में देश और विदेश से आए डॉक्टर, सर्जन, शोधकर्ता और शिक्षाविद अपने अनुभव साझा करेंगे। साथ ही नई तकनीकों और शोध के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर भी चर्चा होगी।
राष्ट्रीय अध्ययन रिपोर्ट भी होगी जारी
सेमिनार के दौरान राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग (एनसीआईएसएम) की ओर से तैयार एक अहम अध्ययन रिपोर्ट भी जारी की जाएगी। यह रिपोर्ट “आयुर्वेद महिला स्नातकों के पेशेवर करियर का मूल्यांकन” विषय पर आधारित है। इसमें आयुर्वेद की पढ़ाई करने वाली महिला डॉक्टरों के करियर, रोजगार और पेशेवर चुनौतियों का आकलन किया गया है।इस रिपोर्ट से भविष्य में आयुर्वेद शिक्षा और रोजगार से जुड़ी नीतियां बनाने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
14.5 करोड़ रुपये की हाईटेक एमआरआई मशीन का भी उद्घाटन
कार्यक्रम के दौरान एआईआईए में करीब 14.5 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित अत्याधुनिक 3-टेस्ला हाई-फील्ड एमआरआई प्रणाली का भी उद्घाटन किया जाएगा। यह नई मशीन एआई आधारित वर्कफ्लो, बायोमेट्रिक सिस्टम और उन्नत इमेजिंग जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस है।इस तकनीक के इस्तेमाल से मरीजों की जांच पहले से अधिक सटीक और तेज़ हो सकेगी। डॉक्टरों को भी बीमारी की सही पहचान करने में काफी मदद मिलेगी।
सर्जरी से जुड़े कई अहम विषयों पर होगी चर्चा
तीन दिवसीय सेमिनार के दौरान मुख्य व्याख्यान, पैनल चर्चा, कार्यशालाएं और वैज्ञानिक शोध-पत्रों की प्रस्तुति होगी। विशेषज्ञ मलाशय रोग विज्ञान, पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा, एकीकृत ऑन्कोलॉजी, चिकित्सा-कानूनी मामलों और सर्जरी में बौद्धिक संपदा अधिकार जैसे विषयों पर अपने विचार रखेंगे।इसके अलावा आचार्य सुश्रुत की पारंपरिक शल्य चिकित्सा पद्धतियों जैसे घाव प्रबंधन, अग्निकर्म, क्षारसूत्र और मर्म चिकित्सा पर भी विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन विषयों के जरिए यह समझने की कोशिश होगी कि पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक चिकित्सा के साथ कैसे जोड़ा जा सकता है।
कई देशों के विशेषज्ञ होंगे शामिल
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत के अलावा थाईलैंड, इजराइल, ऑस्ट्रिया, यूनाइटेड किंगडम, श्रीलंका, इंडोनेशिया, नेपाल और ग्रीस के प्रतिष्ठित सर्जन, मेडिकल विशेषज्ञ, शोधकर्ता और शिक्षाविद हिस्सा लेंगे। इससे विभिन्न देशों के विशेषज्ञों को अपने अनुभव साझा करने और नई चिकित्सा तकनीकों पर विचार-विमर्श का अवसर मिलेगा।
कई प्रमुख हस्तियां रहेंगी मौजूद
उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अलावा केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव, दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी और आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा भी मौजूद रहेंगे।आयुष मंत्रालय का मानना है कि यह सेमिनार आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। साथ ही इससे चिकित्सा शिक्षा, शोध और मरीजों के इलाज में नई संभावनाओं के रास्ते भी खुलेंगे।










