Founder – Mohan Milan

असम में बाढ़ का प्रकोप गहराया,10 जिलों में लाखों लोग प्रभावित

असम में बाढ़ के कारण जलमग्न हुए गांव और राहत शिविरों में शरण लिए लोग, जहां तबाही के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है

गुवाहाटी,अंग भारत। असम में आई भीषण बाढ़ का पानी अब धीरे-धीरे कम जरूर हो रहा है, लेकिन ऊपरी असम के कई हिस्सों में हालात अब भी बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में पिछले 24 घंटों में 4 और लोगों की मौत के बाद जान गंवाने वालों का कुल आंकड़ा 66 तक पहुंच गया है। राज्य के 10 जिलों में रहने वाले 6.5 लाख से अधिक लोग इस प्राकृतिक आपदा की सीधी चपेट में हैं। शिवसागर में दिखौ नदी और नुमलीगढ़ में धनसिरी नदी अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जो स्थानीय प्रशासन और निवासियों के लिए लगातार गंभीर चुनौती बनी हुई हैं।

बाढ़ की वर्तमान स्थिति

मौसम में हल्के बदलाव के बाद कुछ मैदानी इलाकों से पानी का उतरना शुरू हुआ है, लेकिन जमीन पर तबाही के निशान साफ देखे जा सकते हैं। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) की 25 जुलाई की रिपोर्ट बताती है कि ऊपरी असम के जिलों में पानी जमा होने से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है। नदियों का जलस्तर कुछ जगहों पर थमा है, मगर बहाव की गति अभी भी डराने वाली है। स्थानीय लोग अपने घरों को छोड़कर ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं।

प्रभावित जिले और नुकसान

इस विनाशकारी बाढ़ ने असम के एक बड़े हिस्से को अपनी आगोश में ले लिया है। वर्तमान में कुल 10 जिलों के लोग इस त्रासदी को सीधे तौर पर झेल रहे हैं। प्रभावित जिलों की सूची में ये क्षेत्र शामिल हैं:

  • गोलाघाट और चराईदेव
  • कामरूप और कामरूप (मेट्रो)
  • होजाई और डिब्रूगढ़
  • शिवसागर और जोरहाट
  • शोणितपुर और नगांव

इन 10 जिलों के कुल 28 राजस्व मंडलों के अंतर्गत आने वाले 810 गांव पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं। इस आपदा ने कुल 6,54,838 लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। सबसे बड़ा झटका खेती-किसानी को लगा है, जहां 34,970.8 हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूब चुकी है। इससे आने वाले समय में किसानों के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा होना तय है।

राहत शिविरों की हकीकत

बेघर हुए लोगों को तुरंत सहायता पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर राहत शिविरों का जाल बिछाया है। आंकड़ों के अनुसार, कुल 274 शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें 90 सक्रिय राहत शिविर और 184 राहत वितरण केंद्र शामिल हैं। इन शिविरों में फिलहाल 18,902 लोगों ने शरण ले रखी है। इसके अलावा, जो लोग अपने घरों में फंसे हैं या शिविरों के बाहर हैं, ऐसे 1,23,114 गैर-शिविर निवासियों को भी राहत वितरण केंद्रों के जरिए जरूरी मदद पहुंचाई जा रही है।

चराईदेव और शिवसागर जिलों में स्थिति सबसे नाजुक बनी हुई है। 25 जुलाई को बाढ़ के पानी से चार शव बरामद किए गए, जिनमें से चराईदेव में एक और शिवसागर में तीन शव मिले हैं। इन मौतों से स्थानीय लोगों में डर और हताशा का माहौल है।

पशुधन पर भारी मार

यह बाढ़ केवल इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि बेजुबान जानवरों के लिए भी काल बनकर आई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कुल 4,54,071 जानवर इस बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इनमें 93,751 बड़े पशु, 57,897 छोटे पशु और पोल्ट्री (मुर्गी-पालन) क्षेत्र के 3,02,423 पक्षी शामिल हैं।

सबसे दुखद पहलू यह है कि बाढ़ की तेज लहरों में कुल 3,021 जानवर बह गए। इनमें से अकेले चराईदेव जिले में 3,016 पशु बहे हैं, जबकि जोरहाट जिले से 5 पशुओं के बहने की खबर है। चराईदेव में इतनी बड़ी संख्या में पशुओं का बह जाना स्थानीय डेयरी उद्योग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है।

बचाव और राहत कार्य

आपदा की इस घड़ी में राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चलाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा के सीधे निर्देश पर पूरी सरकारी मशीनरी मुस्तैद है। शनिवार रात को हुई असम कैबिनेट की बैठक में राहत कार्यों को तेज करने और नुकसान का सही आकलन करने की रणनीति बनाई गई। मैदान पर काम कर रही एजेंसियों की बात करें तो बचाव कार्य में ये टीमें जुटी हुई हैं:

  • राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF)
  • जिला आपदा प्रतिक्रिया बल (DDRF)
  • राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल (NDRF)
  • असम पुलिस और नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवक
  • अग्निशमन और आपातकालीन सेवाएं (F&ES)

बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बनाए रखने के लिए कुल 210 मेडिकल टीमों को तैनात किया गया है, जो पानी से फैलने वाली बीमारियों को रोकने के लिए काम कर रही हैं। इसके साथ ही, 55 नावें लगातार गश्त कर रही हैं। हाल ही में इन नावों की मदद से पानी में फंसे 13 लोगों और 22 मवेशियों का सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है।

राहत सामग्री का वितरण

प्रभावित आबादी तक भुखमरी की नौबत न आए, इसके लिए प्रशासन द्वारा बड़े पैमाने पर राशन और पशु चारा बांटा जा रहा है। सरकार द्वारा वितरित की गई सामग्री का ब्योरा नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:

सामग्री का नाम वितरित मात्रा
चावल 1668.682 क्विंटल
दाल 286.985 क्विंटल
नमक 83.7545 क्विंटल
सरसों का तेल 7,995.01 लीटर
पशुओं का चारा (गेहूं का चोकर) 13,254.831 क्विंटल
पशुओं का चारा (चावल का चोकर) 5.84 क्विंटल

बुनियादी ढांचे को क्षति

बाढ़ का पानी जैसे-जैसे कम हो रहा है, सड़कों, पुलों और सरकारी इमारतों को हुआ नुकसान साफ दिखाई देने लगा है। कई जिलों में संपर्क मार्ग पूरी तरह टूट चुके हैं, जिससे राहत सामग्री पहुंचाने में भी बाधा आ रही है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री पवित्र मार्घेरिटा ने जोरहाट जिले में स्थानीय सांसदों, विधायकों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में स्पष्ट किया गया कि पानी उतरते ही सबसे पहला काम सड़कों और पुलों की मरम्मत का होगा, ताकि जनजीवन को दोबारा पटरी पर लाया जा सके। मंत्रियों और विधायकों को सीधे प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है ताकि जमीनी हकीकत पर पैनी नजर रखी जा सके।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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