नई दिल्ली,अंग भारत। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि पर देश भर में उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए राजनेताओं और वैज्ञानिकों ने उनके अद्वितीय योगदान को याद किया। केवल एक राष्ट्रपति के रूप में नहीं, बल्कि एक ‘मिसाइल मैन’ और ‘पीपल्स प्रेसिडेंट’ के तौर पर उन्होंने भारत को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान दी। आज भी उनके शब्द—”सपने वे नहीं जो नींद में आते हैं, सपने वे हैं जो आपको सोने न दें”—करोड़ों युवाओं के लिए सफलता का मंत्र बने हुए हैं। डॉ. कलाम का जीवन इस बात का प्रमाण है कि साधारण पृष्ठभूमि से आने वाला व्यक्ति भी अपनी मेहनत और दूरदर्शिता से पूरे राष्ट्र की दिशा बदल सकता है।
एक महान वैज्ञानिक का सफर
डॉ. कलाम का सफर रामेश्वरम की तंग गलियों से शुरू होकर राष्ट्रपति भवन तक पहुंचा। उन्होंने भारत के अंतरिक्ष और रक्षा अनुसंधान को जिस ऊंचाई पर पहुंचाया, वह आज भी एक मिसाल है। उनके नेतृत्व में भारत ने न केवल स्वदेशी मिसाइलें विकसित कीं, बल्कि परमाणु शक्ति के रूप में खुद को स्थापित किया।
- अग्नि और पृथ्वी: भारत की स्वदेशी मिसाइल तकनीक का आधार तैयार किया।
- पोखरण-II: भारत को एक परमाणु संपन्न राष्ट्र के रूप में वैश्विक स्तर पर मजबूती दी।
- SLV-3: भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव रखने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई।
- रोहिणी उपग्रह: अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाया।
राष्ट्र निर्माण में योगदान
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उनके वैज्ञानिक योगदान के साथ-साथ उनके अनुशासन और राष्ट्रप्रेम को सराहा। डॉ. कलाम का मानना था कि भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए युवा पीढ़ी का शिक्षित और नवाचारी होना आवश्यक है। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम क्षण भी एक शिक्षक के रूप में छात्रों के बीच बिताए, जो उनकी शिक्षा के प्रति अटूट समर्पण को दर्शाता है।
“विज्ञान से मानवता का भला होना चाहिए और शिक्षा से राष्ट्र का निर्माण, यही डॉ. कलाम के जीवन का मूल दर्शन था।”
सादगी का प्रतीक व्यक्तित्व
आज के दौर में जब सत्ता और पद का अहंकार अक्सर देखने को मिलता है, डॉ. कलाम का जीवन एक आइने की तरह है। वे अपनी सादगी और निस्वार्थ सेवा के लिए जाने जाते थे। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें याद करते हुए कहा कि उनका सादगी भरा जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मार्गदर्शक शक्ति है। वे एक ऐसे राष्ट्रपति थे जिन्हें जनता अपना ही मानती थी, इसीलिए उन्हें प्यार से ‘पीपल्स प्रेसिडेंट’ कहा गया।
युवाओं के लिए प्रेरणा
विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों, जैसे मध्य प्रदेश के मोहन यादव और राजस्थान के भजनलाल शर्मा ने भी उन्हें नवाचार का प्रतीक बताया। अरविंद केजरीवाल ने उनके उस सपने को दोहराया जिसमें उन्होंने शिक्षा को भारत के विकास का मुख्य आधार माना था। उनकी प्रेरणा के कुछ मुख्य बिंदु हैं:
- लक्ष्य के प्रति निरंतर समर्पण।
- असफलता से न डरकर उससे सीखना।
- हमेशा एक छात्र बने रहना, चाहे आप किसी भी पद पर हों।
- राष्ट्रहित को व्यक्तिगत लाभ से ऊपर रखना।
भारत के भविष्य का स्वप्न
डॉ. कलाम का सपना था कि भारत 2020 तक एक विकसित राष्ट्र बने। हालांकि हम उस समय सीमा को पार कर चुके हैं, लेकिन उनके द्वारा दिखाए गए आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा करने का काम आज भी जारी है। नितिन गडकरी और जेपी नड्डा जैसे नेताओं ने उनके योगदान को याद करते हुए इस बात पर जोर दिया कि विज्ञान और शिक्षा का सही तालमेल ही भारत को एक ‘विश्व गुरु’ बना सकता है।
अंत में, डॉ. कलाम केवल एक व्यक्ति नहीं थे, बल्कि वे विचारों का एक पुंज थे। उनके दिए गए मंत्रों को अपनाकर ही देश सही मायने में उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित कर सकता है। हमें उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानवीय मूल्यों को अपनी कार्यशैली में उतारने की जरूरत है, ताकि हम एक सशक्त, समृद्ध और समावेशी भारत का निर्माण कर सकें।







