ग्लासगो, अंग भारत। राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत के स्टार भारोत्तोलक वल्लुरी अजय बाबू ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों के 79 किलोग्राम भारवर्ग में रजत पदक (Silver Medal) अपने नाम कर लिया है। बेहद रोमांचक और अंतिम क्षणों तक खिंचे इस मुकाबले में अजय बाबू ने कुल 330 किलोग्राम (स्नैच में 149 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 181 किग्रा) का वजन उठाया। हालांकि, वह बेहद मामूली अंतर से स्वर्ण पदक जीतने से चूक गए। मलेशिया के मुहम्मद एरी हिदायत ने अंतिम प्रयास में खेलों का एक नया रिकॉर्ड बनाते हुए कुल 331 किलोग्राम वजन उठाकर सोने का तमगा अपने नाम किया। केवल 1 किलोग्राम के इस बारीक अंतर ने इस मैच को राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास के सबसे रोमांचक मुकाबलों में से एक बना दिया।
कांटे की टक्कर
इस भारवर्ग में मुकाबला शुरू से ही त्रिकोणीय लग रहा था, जिसमें भारत, मलेशिया और इंग्लैंड के एथलीटों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। तीनों ही देशों के खिलाड़ी एक-दूसरे को पछाड़ने के लिए पूरा जोर लगा रहे थे। नीचे दी गई तालिका से आप इस ऐतिहासिक मुकाबले के अंतिम नतीजों और प्रदर्शन को आसानी से समझ सकते हैं:
| खिलाड़ी का नाम | देश | स्नैच स्कोर | क्लीन एंड जर्क | कुल वजन | पदक |
|---|---|---|---|---|---|
| मुहम्मद एरी हिदायत | मलेशिया | – | 184 किग्रा (नया रिकॉर्ड) | 331 किग्रा | स्वर्ण (Gold) |
| वल्लुरी अजय बाबू | भारत | 149 किग्रा (नया रिकॉर्ड) | 181 किग्रा | 330 किग्रा | रजत (Silver) |
| क्रिस मरे | इंग्लैंड | – | – | 325 किग्रा | कांस्य (Bronze) |
स्नैच में नया रिकॉर्ड
मुकाबले की शुरुआत स्नैच राउंड से हुई, जहां भारतीय भारोत्तोलक वल्लुरी अजय बाबू ने अपनी ताकत का लोहा मनवाया। उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में शानदार तकनीक दिखाई। हालांकि दूसरे प्रयास में वह असफल रहे थे, जिससे भारतीय प्रशंसकों की धड़कनें थोड़ी बढ़ गई थीं। लेकिन असली चैंपियन वही होता है जो दबाव के क्षणों में वापसी करना जानता है। अजय बाबू ने तीसरे प्रयास में दोबारा उसी मानसिक दृढ़ता के साथ मंच संभाला और सफलतापूर्वक 149 किलोग्राम वजन उठाकर स्नैच राउंड का नया राष्ट्रमंडल खेल रिकॉर्ड स्थापित कर दिया। इस रिकॉर्ड तोड़ लिफ्ट के साथ वे स्नैच राउंड की समाप्ति के बाद अंक तालिका में शीर्ष स्थान पर काबिज हो गए।
क्लीन एंड जर्क
स्नैच में बढ़त हासिल करने के बाद असली परीक्षा क्लीन एंड जर्क राउंड में थी। यहां अजय बाबू ने गजब का संयम और निरंतरता दिखाई। उन्होंने अपने तीनों प्रयासों को पूरी सफाई और ताकत के साथ पूरा किया, जिससे उनके अंक लगातार बढ़ते गए।
अजय बाबू ने क्लीन एंड जर्क के तीनों प्रयासों में क्रमशः 174 किलोग्राम, 178 किलोग्राम और 181 किलोग्राम का भार उठाकर भारतीय खेमे में उत्साह भर दिया।
छह में से पांच प्रयासों को सफलतापूर्वक पूरा करना यह दर्शाता है कि उनकी ट्रेनिंग और शारीरिक तैयारी किस उच्च स्तर की थी। कुल 330 किलोग्राम के स्कोर के साथ वे स्वर्ण पदक की बेहद करीब पहुंच चुके थे और पूरा देश उनकी इस जीत की उम्मीद कर रहा था।
ऐसे चूका स्वर्ण
खेलों में अंतिम क्षणों का रोमांच अक्सर सांसे रोक देने वाला होता है। इस मुकाबले में भी कुछ ऐसा ही उतार-चढ़ाव देखने को मिला। मलेशिया के मुहम्मद एरी हिदायत ने भारतीय खिलाड़ी को कड़ी टक्कर दी। हिदायत को स्वर्ण पदक जीतने के लिए अपने आखिरी प्रयास में हर हाल में 184 किलोग्राम उठाना ही था। दबाव के इस चरम क्षण में मलेशियाई लिफ्टर ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी और 184 किलोग्राम का सफल लिफ्ट कर नया खेल रिकॉर्ड बना दिया। इस दमदार लिफ्ट के साथ उनका कुल स्कोर 331 किलोग्राम पहुंच गया, जो अजय बाबू से मात्र एक किलोग्राम अधिक था। इसी एक किलोग्राम की महीन दूरी ने अजय बाबू को स्वर्ण से दूर कर दिया, लेकिन उनके इस जुझारू प्रदर्शन ने रजत पदक को भी स्वर्ण जैसी चमक दे दी। इंग्लैंड के क्रिस मरे 325 किलोग्राम के कुल वजन के साथ तीसरे स्थान पर रहे और उन्हें कांस्य पदक मिला।
खेल की बारीकियां
भारोत्तोलन केवल शारीरिक ताकत का खेल नहीं है, बल्कि यह दिमाग और तकनीक का भी अनूठा मेल है। स्नैच में जहां बारबेल को एक ही झटके में सिर के ऊपर उठाना होता है, वहीं क्लीन एंड जर्क में इसे दो चरणों में पूरा किया जाता है। अजय बाबू ने स्नैच में जो 149 किग्रा का नया रिकॉर्ड बनाया, उसने यह साफ कर दिया कि उनकी तकनीक कितनी सटीक थी। क्लीन एंड जर्क में उनके लगातार तीन सफल प्रयास (174, 178 और 181 किग्रा) दिखाते हैं कि उनके कोचों ने उनकी रिकवरी और स्टेमिना पर कितना बारीक काम किया था। यह प्रदर्शन साबित करता है कि आने वाले समय में वे दुनिया के बड़े-बड़े लिफ्टर्स को कड़ी चुनौती देने का माद्दा रखते हैं।
मजबूत खेल परंपरा
भारत का राष्ट्रमंडल खेलों में भारोत्तोलन के क्षेत्र में हमेशा से दबदबा रहा है। अजय बाबू का यह रजत पदक इस बात का गवाह है कि भारत में युवा वेटलिफ्टर्स की नई पौध अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का मान बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है। किसी भी बड़े खेल आयोजन में एक-एक किलोग्राम की यह जंग खिलाड़ियों को मानसिक रूप से और मजबूत बनाती है। रजत पदक जीतने के बाद भी अजय बाबू की इस ऐतिहासिक भिड़ंत को खेल प्रेमी लंबे समय तक याद रखेंगे। उनकी यह सफलता देश के अन्य युवा एथलीटों को प्रेरित करेगी कि कैसे विषम परिस्थितियों और कड़े मुकाबले में भी हार न मानते हुए अंत तक मुकाबला किया जाता है।








