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मुजफ्फरपुर में बागमती नदी खतरे के निशान से ऊपर, बाढ़ का खतरा गहराया

मुजफ्फरपुर के कटौझा में उफान पर बागमती नदी का जलस्तर और बाढ़ के खतरे से घिरे निचले इलाकों के गांव

मुजफ्फरपुर,अंग भारत। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में बागमती नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है, जिससे औराई, कटरा और गायघाट जैसे निचले इलाकों में बाढ़ का भारी खतरा मंडराने लगा है। जिला आपातकालीन संचालन केन्द्र की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार सुबह 6:00 बजे कटौझा में बागमती नदी का जलस्तर 55.75 मीटर दर्ज किया गया, जो इसके खतरे के स्तर (55.00 मीटर) से 0.75 मीटर ऊपर है। नदी का पानी लगातार बढ़ रहा है, जिसके कारण स्थानीय प्रशासन ने तटवर्ती और निचले इलाकों के ग्रामीणों को तुरंत सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की चेतावनी जारी की है।

बागमती का बदलता मिजाज

बागमती नदी का चरित्र उत्तर बिहार की अन्य नदियों से थोड़ा अलग है। नेपाल की पहाड़ियों से निकलकर यह नदी जब बिहार के मैदानी इलाकों में प्रवेश करती है, तो अपने साथ भारी मात्रा में गाद और पानी लेकर आती है। पहाड़ों पर होने वाली भारी बारिश का असर सीधे मुजफ्फरपुर के कटौझा में देखने को मिलता है। इस बार भी ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार हुई बारिश की वजह से नदी का पानी तेजी से बढ़ा है। जलस्तर में प्रति घंटे हो रही बढ़ोतरी ने बांध के भीतर बसे गांवों के लोगों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। अगर पहाड़ी इलाकों में बारिश नहीं थमी, तो आने वाले 24 से 48 घंटे मुजफ्फरपुर के कई गांवों के लिए बेहद नाजुक साबित हो सकते हैं।

प्रभावित होने वाले इलाके

बागमती के उफान पर आते ही सबसे पहले औराई, कटरा और गायघाट प्रखंडों के निचले गांवों में पानी घुसना शुरू हो जाता है। इन इलाकों की भौगोलिक बनावट ऐसी है कि नदी के जरा से बढ़ते ही खेतों में लगी धान और चारे की फसलें पूरी तरह जलमग्न हो जाती हैं। कई पंचायतों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूटने की कगार पर पहुंच गया है। कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों के सामने सबसे बड़ा संकट अपने मवेशियों को बचाने और सुरक्षित चारे का इंतजाम करने का है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हर साल की तरह इस बार भी बाढ़ की आहट ने उनकी रात की नींद छीन ली है।

नदियों की वर्तमान स्थिति

मुजफ्फरपुर जिले से गुजरने वाली प्रमुख नदियों की ताजा स्थिति को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है:

नदी का नाम मापन स्थल वर्तमान जलस्तर खतरे का निशान पानी का रुख
बागमती कटौझा 55.75 मीटर 55.00 मीटर बढ़ रहा है
बूढ़ी गंडक सिकंदरपुर 48.46 मीटर 52.53 मीटर घट रहा है
गंडक रेवाघाट 52.89 मीटर 54.41 मीटर घट रहा है

गंडक और बूढ़ी गंडक

बागमती नदी के रौद्र रूप के बीच थोड़ी राहत सिकंदरपुर और रेवाघाट से मिल रही है। यहां बहने वाली बूढ़ी गंडक और गंडक नदियों का मिजाज फिलहाल पूरी तरह शांत है। सिकंदरपुर में बूढ़ी गंडक का जलस्तर खतरे के निशान से करीब चार मीटर नीचे बह रहा है, वहीं रेवाघाट में गंडक नदी भी सुरक्षित दायरे में है। अच्छी बात यह है कि इन दोनों नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे नीचे की ओर गिर रहा है। इससे मुजफ्फरपुर शहर और पश्चिमी हिस्सों के लोगों को फिलहाल कोई तात्कालिक खतरा नहीं दिख रहा है, जिससे प्रशासन ने भी राहत महसूस की है।

प्रशासनिक तैयारी और कदम

मुजफ्फरपुर समाहरणालय में बना जिला बाढ़ नियंत्रण कक्ष इस समय चौबीसों घंटे सक्रिय मोड में काम कर रहा है। जल निस्सरण प्रमंडल के इंजीनियर और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी लगातार संवेदनशील बांधों और तटबंधों का मुआयना कर रहे हैं। तटबंधों पर जहां भी रिसाव या कमजोरी की आशंका दिख रही है, वहां तुरंत बालू की बोरियां डालने का काम शुरू कर दिया गया है। निचले इलाकों में नावों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है ताकि आपातकालीन स्थिति में लोगों को तेजी से निकाला जा सके। डॉक्टरों की टीम और जरूरी दवाओं का स्टॉक भी तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।

बाढ़ से बचाव के उपाय

बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा के समय घबराने के बजाय सही जानकारी और मुस्तैदी ही सबसे बड़ा बचाव है। प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को इन बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए:

  • सरकारी घोषणाओं और आधिकारिक चेतावनियों पर ही भरोसा करें, सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों से बचें।
  • पीने के पानी को हमेशा उबालकर या क्लोरीन की गोली डालकर ही पिएं ताकि जलजनित बीमारियों से बचा जा सके।
  • सूखी खाद्य सामग्री जैसे चूड़ा, गुड़, सत्तू और माचिस-मोमबत्ती को पॉलीथीन में पैक करके सुरक्षित स्थान पर रख लें।
  • अपने मोबाइल फोन, पावर बैंक और आपातकालीन लाइट को हमेशा चार्ज रखें।
  • पानी बढ़ने पर सांप और जहरीले कीड़े सूखे स्थानों की तलाश में घरों की तरफ आते हैं, इसलिए जमीन पर सोने से बचें और सावधानी रखें।

“बाढ़ संभावित इलाकों में रहने वाले लोग प्रशासन द्वारा दी जा रही सूचनाओं का पालन करें। तटबंधों की सुरक्षा के लिए टीमें लगातार गश्त कर रही हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है।”
– जिला बाढ़ नियंत्रण कक्ष, मुजफ्फरपुर

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