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मेदांता अस्पताल पहुंचे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, छात्र गोलीकांड को बताया लोकतंत्र पर हमला

पटना के मेदांता अस्पताल में सिवान छात्र गोलीकांड के पीड़ित घायल छात्रों से मुलाकात कर उनका हालचाल जानते बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम।

पटना,अंग भारत। सिवान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस firing के बाद बिहार की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजेश राम सोमवार को पटना के मेदांता अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल छात्रों से मुलाकात कर उनका हाल-चाल जाना। इस घटना को लेकर कांग्रेस ने सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार पर निशाना साधा है और इसे लोकतंत्र पर एक बड़ा हमला करार दिया है। पार्टी का साफ कहना है कि हक की मांग कर रहे निहत्थे युवाओं पर गोलियां चलाना सरकार के तानाशाही रवैये को दिखाता है, जिसकी जितनी भी निंदा की जाए वह कम है।

सिवान गोलीकांड का पूरा मामला

बिहार में युवा और छात्र हमेशा से अपनी मांगों को लेकर मुखर रहे हैं। सिवान में भी छात्र अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे थे। लेकिन स्थानीय प्रशासन और पुलिस की कथित बर्बरता के कारण हालात अचानक बिगड़ गए। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सीधे गोलियां चला दीं, जिसमें कई छात्र गंभीर रूप से जख्मी हो गए। स्थानीय स्तर पर प्राथमिक इलाज के बाद, जख्मी छात्रों की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें पटना के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस गोलीबारी ने सरकार के सुरक्षा दावों की पोल खोलकर रख दी है।

मेदांता अस्पताल पहुंचे कांग्रेसी नेता

सोमवार को मेदांता अस्पताल का माहौल बेहद गमगीन था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रेमचंद सिंह और रंजीत कुमार बाल्मीकि भी अस्पताल पहुंचे। नेताओं ने घायल छात्रों के सिर पर हाथ रखकर ढांढस बंधाया और डॉक्टरों से उनके इलाज के बारे में विस्तृत बातचीत की। राजेश राम ने पीड़ित परिवारों से मिलकर उन्हें भरोसा दिलाया कि कांग्रेस पार्टी इस कठिन समय में उनके साथ खड़ी है और उन्हें इंसाफ दिलाकर ही दम लेगी।

“तानाशाही के दम पर युवाओं की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर गोलियां चलाना अमानवीय है और इस बर्बर कार्रवाई के जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी ही चाहिए।” – राजेश राम, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष

कांग्रेस की पांच मुख्य मांगें

इस घटना को लेकर विपक्ष ने सरकार को चारों तरफ से घेर लिया है। कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने नीतीश सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं, जिन पर तुरंत अमल करने को कहा गया है:

  • उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच: पूरे गोलीकांड की जांच हाई कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज या स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए, ताकि पूरी सच्चाई जनता के सामने आ सके।
  • दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई: जिन पुलिस अधिकारियों के आदेश पर यह गोलीबारी हुई, उन्हें तुरंत निलंबित किया जाए और उन पर हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज हो।
  • इलाज का पूरा खर्च: मेदांता और अन्य निजी अस्पतालों में भर्ती सभी घायल छात्रों के इलाज का एक-एक पैसा राज्य सरकार अपनी तरफ से दे।
  • झूठे मुकदमे वापस हों: आंदोलन के दौरान और उसके बाद जिन भी छात्रों पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है, उसे बिना किसी शर्त के तुरंत रद्द किया जाए।
  • मुआवजा और आर्थिक मदद: पीड़ित परिवारों को मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के एवज में तुरंत उचित आर्थिक सहायता दी जाए।

पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल

इस पूरी घटना ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब भी कोई भीड़ या प्रदर्शन बेकाबू होता है, तो उसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस के पास आंसू गैस के गोले, वाटर कैनन या लाठीचार्ज जैसे कई विकल्प होते हैं। लेकिन सिवान में सीधे गोलियां चला दी गईं। आखिर ऐसी क्या इमरजेंसी थी कि सीधे छात्रों के शरीर को निशाना बनाया गया? कांग्रेस नेता प्रेमचंद सिंह ने कहा कि सीधे बल प्रयोग यह साबित करता है कि स्थानीय प्रशासन और सरकार के बीच संवाद का पूरी तरह अभाव था। रंजीत कुमार बाल्मीकि ने भी इसे क्रूरता की हद बताया।

छात्र आंदोलन का गौरवशाली इतिहास

बिहार का इतिहास गवाह है कि जब-जब छात्रों और युवाओं ने अंगड़ाई ली है, तब-तब सत्ता के सिंहासन डोले हैं। जेपी आंदोलन से लेकर हाल के वर्षों तक, बिहार के युवाओं ने हमेशा राज्य और देश को नई दिशा दी है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी बात रखना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। जब युवा अपनी पढ़ाई, परीक्षा प्रणाली या रोजगार की बात करते हैं, तो सरकार का दायित्व उनके साथ बैठकर बात करने का होता है, न कि उन पर गोलियां बरसाने का। इतिहास से सबक न लेकर युवाओं का दमन करना किसी भी चुनी हुई सरकार को शोभा नहीं देता।

मामले के मुख्य बिंदु

इस गंभीर मामले को आसानी से समझने के लिए नीचे दी गई तालिका में मुख्य बातों को स्पष्ट किया गया है:

मुख्य विषय घटनाक्रम और विवरण कांग्रेस का रुख और मांग
घटना का स्थान सिवान जिला, बिहार दोषी पुलिसकर्मियों पर तुरंत कानूनी एक्शन हो
घायलों का इलाज मेदांता अस्पताल, पटना पूरा इलाज सरकारी खर्चे पर मुफ्त कराया जाए
दर्ज एफआईआर आंदोलनकारी छात्रों पर मुकदमे सभी केस तुरंत और बिना शर्त वापस लिए जाएं
जांच का स्वरूप स्थानीय पुलिस की जांच हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज से निष्पक्ष जांच हो

आगे की राजनीतिक राह

सिवान का यह मामला आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक रूप लेने वाला है। विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सड़क से लेकर बिहार विधानसभा तक सरकार को घेरने की बड़ी तैयारी कर रहे हैं। छात्रों और उनके अभिभावकों का भी हौसला टूटा नहीं है, उनका कहना है कि वे अपनी जायज मांगों के लिए लड़ते रहेंगे। अब गेंद नीतीश कुमार के पाले में है। देखना होगा कि सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है। क्या वह आरोपी पुलिस अधिकारियों को बचाती है या घायल छात्रों को समय पर न्याय और मुआवजा देकर अपनी साख बचा पाती है। कांग्रेस ने दो टूक कह दिया है कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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