नवादा,अंग भारत। बिहार के नवादा जिले के कौआकोल प्रखंड के भोरमबाग गांव निवासी विक्रम कुमार ने बनारस में आयोजित एथलेटिक्स नेशनल चैंपियनशिप की 200 मीटर दौड़ प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। बुधवार को मेडल जीतकर नवादा पहुंचे इस युवा चैंपियन का स्थानीय लोगों और खेल प्रेमियों ने ढोल-नगाड़ों और फूल-मालाओं के साथ जोरदार स्वागत किया। देवनगढ़ पंचायत के पंचायत समिति सदस्य दिलीप रविदास के बेटे विक्रम ने राष्ट्रीय स्तर पर लगातार दूसरी बार सोना जीतकर यह साबित कर दिया है कि अगर मन में पक्का इरादा हो, तो ग्रामीण इलाकों की तंग गलियों से निकलकर भी देश के सबसे बड़े खेल मंचों पर तिरंगा लहराया जा सकता है।
पारिवारिक संघर्ष और सपोर्ट
विक्रम की इस बड़ी जीत के पीछे उनके पिता दिलीप रविदास का अटूट भरोसा और पूरे परिवार का समर्पण है। भोरमबाग जैसे एक साधारण ग्रामीण इलाके में खेल की बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। न तो वहां सिंथेटिक ट्रैक हैं और न ही दौड़ने के लिए महंगे जूते या आधुनिक जिम। इसके बावजूद, विक्रम के पिता ने अपने सीमित संसाधनों के बावजूद बेटे के सपनों में कभी रुकावट नहीं आने दी। दिलीप रविदास ने बताया कि विक्रम बचपन से ही खेलकूद में बहुत तेज था और उसका ध्यान हमेशा दौड़ने पर रहता था। पिता के इसी प्रोत्साहन ने विक्रम को विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानने का हौसला दिया।
लगातार दूसरा नेशनल गोल्ड
विक्रम कुमार की यह सफलता कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि ट्रैक पर बहाए गए उनके पसीने की गवाही देती है। इससे पहले भी उन्होंने मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में आयोजित एक और राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शानदार दौड़ लगाते हुए गोल्ड मेडल जीता था। लगातार दो राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीतना उनकी बेहतरीन फिटनेस, निरंतरता और कड़े अनुशासन को दर्शाता है। 200 मीटर की रेस में धावक को न सिर्फ शुरुआत में तेज गति हासिल करनी होती है, बल्कि रेस के अंतिम 50 मीटर में अपनी पूरी ताकत झोंकनी पड़ती है, जिसे विक्रम ने बखूबी कर दिखाया।
पटना में कड़ा प्रशिक्षण
विक्रम की इस प्रतिभा को तराशने का काम बिहार की राजधानी पटना में हुआ। वर्तमान में वे नवादा के हिसुआ स्थित टीएस कॉलेज से बीए पार्ट-2 की पढ़ाई कर रहे हैं। अपनी पढ़ाई के साथ-साथ तालमेल बिठाते हुए वे पटना में रहकर नियमित रूप से पेशेवर ट्रेनिंग लेते हैं। पटना के गांधी मैदान और अन्य ट्रैक पर उन्होंने अपने कोच की देखरेख में अपनी रनिंग तकनीक, पैरों की मूवमेंट और एंड्यूरेंस (सहनशक्ति) को सुधारा है। सुबह और शाम की कड़ी मेहनत ने ही उन्हें आज इस मुकाम पर पहुंचाया है जहां देश भर के धावक उनकी रफ्तार के आगे पीछे छूट गए।
धावक का ट्रैक रिकॉर्ड
नीचे दी गई तालिका में विक्रम कुमार की अब तक की मुख्य उपलब्धियों और उनके सफर की जानकारी दी गई है:
| प्रतियोगिता | आयोजन स्थल | परिणाम | वर्तमान शिक्षा व प्रशिक्षण |
|---|---|---|---|
| एथलेटिक्स नेशनल चैंपियनशिप | बनारस (उत्तर प्रदेश) | स्वर्ण पदक (प्रथम स्थान) | बीए पार्ट-2 (टीएस कॉलेज, हिसुआ) |
| राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता | मुरैना (मध्य प्रदेश) | स्वर्ण पदक (प्रथम स्थान) | नियमित प्रशिक्षण: पटना (बिहार) |
200 मीटर दौड़ की तकनीक
सप्रिंट रेस में 200 मीटर की दौड़ सबसे रोमांचक और कठिन मानी जाती है। इसमें धावक को एक मोड़ (Curve) से होकर गुजरना पड़ता है। मोड़ पर दौड़ते समय शरीर का संतुलन बनाए रखना और अपनी गति को कम न होने देना एक कला है। विक्रम ने इस तकनीक पर महारत हासिल की है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस दूरी को तय करने के लिए धावक के पास जबरदस्त विस्फोटक ताकत और आखिरी पलों तक सांस थामकर दौड़ने की क्षमता होनी चाहिए, जो विक्रम के प्रदर्शन में साफ नजर आती है।
“ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें सही मार्गदर्शन और थोड़े से समर्थन की जरूरत होती है। विक्रम की यह जीत पूरे नवादा जिले के युवाओं को आगे बढ़ने की राह दिखाएगी।”
क्षेत्र में उत्सव का माहौल
बुधवार को जब विक्रम मेडल के साथ नवादा रेलवे स्टेशन और फिर अपने गांव पहुंचे, तो पूरा इलाका उनके स्वागत में उमड़ पड़ा। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, खेल प्रेमियों और ग्रामीणों ने उन्हें मिठाई खिलाकर बधाई दी। ग्रामीणों का कहना है कि विक्रम ने न केवल अपने माता-पिता का नाम रोशन किया है, बल्कि पूरे नवादा जिले का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। खेल प्रेमियों का मानना है कि विक्रम जैसे होनहार युवाओं को अगर राज्य सरकार की तरफ से आधुनिक सुविधाएं और वित्तीय सहायता मिले, तो वे जल्द ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश का मान बढ़ाएंगे। विक्रम की यह सफलता आज बिहार के उन तमाम उभरते हुए एथलीटों के लिए एक खुली प्रेरणा है जो देश के लिए कुछ करना चाहते हैं।







