रांची, अंग भारत। झारखंड के सात जिलों देवघर, दुमका, गिरीडीह, गोड्डा, जामताड़ा, साहिबगंज और पाकुड़ में आगामी 02 अगस्त को मूसलाधार बारिश होने की आशंका है, जिसके लिए मौसम विभाग ने बाकायदा येलो अलर्ट जारी किया है। दरअसल, 30 जुलाई से ही सूबे के कई हिस्सों में तेज हवाओं (30 से 40 किमी प्रति घंटा) और गरज के साथ आकाशीय बिजली गिरने का खतरा मंडरा रहा है। अगर आप इन इलाकों में रहते हैं या वहां की यात्रा करने वाले हैं, तो मौसम का मिजाज देखकर ही घर से बाहर निकलें। यह मौसमी बदलाव बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हो रहे एक नए सिस्टम की वजह से हो रहा है। इसके असर से राज्य के उत्तर-पूर्वी इलाकों में मॉनसून काफी तेजी से रफ्तार पकड़ रहा है। केवल भारी बारिश ही नहीं, बल्कि सबसे बड़ा खतरा वज्रपात यानी बिजली गिरने का है, जो झारखंड में अक्सर मॉनसून के दौरान जानलेवा साबित होता है।
प्रभावित होने वाले सात जिले
मौसम विभाग ने जिन सात जिलों को चिन्हित किया है, वे सभी राज्य के उत्तर-पूर्वी हिस्से में आते हैं। इन जिलों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। आइए जानते हैं कि कहां कैसा असर दिख सकता है:
- देवघर: बाबाधाम और उसके आस-पास के क्षेत्रों में तेज बौछारें पड़ने की पूरी उम्मीद है, जिससे श्रावणी मेले में आने वाले कांवरियों को भी थोड़ी सावधानी बरतनी होगी।
- दुमका: इस जिले में भी आसमान में घने बादल छाए रहने और मध्यम से तेज बारिश होने के आसार हैं।
- जामताड़ा और गिरीडीह: इन दोनों जिलों में तेज गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।
- गोड्डा, साहिबगंज और पाकुड़: गंगा नदी के किनारे बसे इन सीमावर्ती इलाकों में तेज हवाएं चलने और भारी बारिश होने की प्रबल आशंका बनी हुई है।
अलर्ट का संदेश: येलो अलर्ट का सीधा मतलब है कि मौसम का मिजाज बिगड़ सकता है। इसलिए लोग अपनी रोजमर्रा की योजनाओं को मौसम के रुख के हिसाब से ही तय करें।
येलो अलर्ट का असली मतलब
आम लोगों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि मौसम विभाग के इस ‘येलो अलर्ट’ का क्या मतलब है? आसान शब्दों में कहें तो इसका अर्थ है कि मौसम खराब होने की आशंका है और आपको अपनी सुरक्षा के प्रति सचेत हो जाना चाहिए। यह चेतावनी किसी बड़ी तबाही की नहीं, बल्कि पहले से संभल जाने की होती है। खासकर किसानों और खुले में काम करने वाले मजदूरों को इसके प्रति अधिक सजग रहना चाहिए ताकि किसी भी अनहोनी से समय रहते बचा जा सके।
वज्रपात का बढ़ता खतरा
झारखंड के ग्रामीण इलाकों में मॉनसून के दौरान आकाशीय बिजली का गिरना एक बड़ी आपदा बनकर सामने आता है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 30 जुलाई से लेकर 02 अगस्त तक राज्य के अलग-अलग हिस्सों में वज्रपात की घटनाएं बढ़ सकती हैं। जब भी आसमान में काले बादल छाएं और कड़कने की आवाज आए, तो समझ लें कि खतरा बिल्कुल करीब है। इस दौरान पेड़ों की आड़ लेना या बिजली के खंभों के पास खड़े होना भारी पड़ सकता है।
पिछली बारिश और तापमान
पिछले 24 घंटों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सूबे के कई इलाकों में हल्की से लेकर मध्यम बारिश हुई है। सबसे अधिक वर्षा पश्चिमी सिंहभूम के बंदगांव में दर्ज की गई, जहां लगभग 72 मिलीमीटर पानी बरसा। इसके विपरीत, डाल्टनगंज में गर्मी का असर सबसे ज्यादा दिखा, जहां अधिकतम तापमान 32.7 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। वहीं, लातेहार में मौसम सबसे ठंडा रहा और वहां का न्यूनतम तापमान गिरकर 20.6 डिग्री सेल्सियस तक आ गया। रांची में तो बुधवार सुबह से ही रिमझिम फुहारें गिरती रहीं, जिससे लोगों को उमस वाली गर्मी से बड़ी राहत मिली है।
शहरों का तापमान विश्लेषण
आइए देखते हैं कि बुधवार को राज्य के अलग-अलग प्रमुख शहरों का अधिकतम और न्यूनतम तापमान कैसा रहा:
| शहर का नाम | अधिकतम तापमान (डिग्री सेल्सियस) | न्यूनतम तापमान (डिग्री सेल्सियस) |
|---|---|---|
| रांची | 26.4 | 22.2 |
| जमशेदपुर | 30.4 | 25.2 |
| डाल्टनगंज | 32.7 | 24.6 |
| बोकारो | 30.5 | 24.2 |
| चाईबासा | 27.8 | 23.4 |
सुरक्षित रहने के उपाय
मौसम के इस बदलते तेवर के बीच खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन की सलाह को बिल्कुल नजरअंदाज न करें। यहाँ कुछ सीधे और सरल उपाय दिए जा रहे हैं जिनका पालन करना जरूरी है:
- आसमान में बिजली चमकने पर फौरन किसी पक्के मकान या छत के नीचे चले जाएं। कच्चे शेड या टिन की छतों के नीचे खड़ा होना सुरक्षित नहीं है।
- बिजली कड़कने के दौरान मोबाइल का उपयोग खुले आसमान के नीचे कतई न करें। घर के टीवी, फ्रिज जैसे महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्लग सॉकेट से निकाल दें।
- किसान भाई खेतों में काम करते समय मौसम खराब होते ही तुरंत सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। ऊंचे और अकेले खड़े पेड़ों के नीचे कभी शरण न लें।
- सड़कों पर पानी भरने की स्थिति में वाहन बहुत संभालकर चलाएं। कई बार जलभराव के कारण गहरे गड्ढे दिखाई नहीं देते, जो बड़े हादसों का कारण बन जाते हैं।








