नई दिल्ली,अंग भारत। भारत के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि पर आज पूरा देश उन्हें याद कर रहा है। देश के राष्ट्रपति भवन से लेकर सुदूर गांवों के स्कूलों तक, हर जगह ‘मिसाइल मैन’ और ‘पीपल्स प्रेसिडेंट’ को भावभीनी श्रद्धांजलि दी जा रही है। डॉ. कलाम सिर्फ एक वैज्ञानिक या राष्ट्राध्यक्ष नहीं थे, बल्कि वे करोड़ों भारतीय युवाओं के दिलों की धड़कन और एक महान मार्गदर्शक थे। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत देश के तमाम बड़े नेताओं ने उनके अतुलनीय योगदान को याद किया। उनका जीवन इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि कैसे रामेश्वरम के एक गरीब परिवार का लड़का अपनी मेहनत और साफ नीयत के दम पर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का सिरमौर बन सकता है।
कलाम का शुरुआती सफर
रामेश्वरम के एक साधारण नाविक के बेटे अबुल पाकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम का बचपन काफी अभावों में बीता। सुबह जल्दी उठकर अखबार बांटना और फिर स्कूल जाना, यह उनकी रोज की दिनचर्या थी। लेकिन उनके सपनों का दायरा बहुत बड़ा था। उन्होंने कभी परिस्थितियों को अपने आड़े नहीं आने दिया। वे कहते थे कि सपने वो नहीं जो हम सोते हुए देखते हैं, बल्कि सपने वो हैं जो हमें सोने ही नहीं देते। कलाम साहब का पूरा जीवन इसी एक लाइन के इर्द-गिर्द घूमता रहा। उन्होंने भौतिक विज्ञान और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और देश की सेवा में खुद को समर्पित कर दिया।
मिसाइल और स्पेस मिशन
भारत को रक्षा और अंतरिक्ष के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना डॉ. कलाम का सबसे बड़ा लक्ष्य था। उन्होंने इसरो और डीआरडीओ के साथ मिलकर जो काम किए, उनके बिना आज के मजबूत भारत की कल्पना करना भी नामुमकिन है। आइए उनके मुख्य तकनीकी योगदानों को एक तालिका के जरिए समझते हैं:
| योगदान का क्षेत्र | मुख्य उपलब्धि | देश पर प्रभाव |
|---|---|---|
| SLV-3 प्रोजेक्ट | भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान | अंतरिक्ष क्लब में भारत की एंट्री हुई |
| रोहिणी उपग्रह | देश के पहले उपग्रह का सफल प्रक्षेपण | स्वदेशी स्पेस तकनीक का जन्म |
| मिसाइल विकास | अग्नि और पृथ्वी मिसाइलों का निर्माण | रक्षा क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भर बना |
| पोखरण-II | परमाणु परीक्षणों का सफल नेतृत्व | भारत वैश्विक परमाणु शक्ति बना |
इस तरह डॉ. कलाम ने भारत को एक ऐसी सुरक्षा ढाल दी, जिससे आज कोई भी दुश्मन देश भारत की तरफ आंख उठाने की हिम्मत नहीं करता। 1998 का पोखरण परमाणु परीक्षण उनके जीवन के सबसे साहसिक फैसलों में से एक था, जिसने पूरी दुनिया के सामने भारत की ताकत का लोहा मनवाया।
राजनेताओं की श्रद्धांजलि
उनकी पुण्यतिथि पर देश के गृह मंत्री अमित शाह ने याद करते हुए कहा कि डॉ. कलाम का जीवन सादगी और कर्तव्यनिष्ठा का पर्याय था। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उनके राष्ट्रप्रेम को याद करते हुए कहा कि कलाम साहब ने हमेशा देश को सर्वोपरि रखा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उनका सादगी भरा जीवन हर नागरिक के लिए प्रेरणा स्रोत है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी उन्हें याद किया और युवाओं से उनके बताए रास्ते पर चलने की अपील की। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उनके शिक्षा के प्रति प्रेम को रेखांकित किया।
“विज्ञान से मानवता का भला होना चाहिए और शिक्षा से राष्ट्र का निर्माण, यही डॉ. कलाम के जीवन का मूल दर्शन था।”
सादगी की मिसाल
राष्ट्रपति जैसे बड़े पद पर रहने के बाद भी डॉ. कलाम का रहन-सहन बेहद साधारण था। जब वे राष्ट्रपति भवन छोड़कर जा रहे थे, तब उनके पास केवल दो सूटकेस थे, जिनमें उनकी कुछ किताबें और कपड़े थे। उन्होंने कभी भी पद का रसूख अपने परिवार के लोगों को नहीं लेने दिया। वे खुद अपनी चाय का पैसा अपनी जेब से देते थे, जब भी उनके रिश्तेदार उनसे मिलने राष्ट्रपति भवन आते थे। आज के इस दौर में जहां छोटे से पद पर आते ही लोगों में अहंकार आ जाता है, डॉ. कलाम का यह चरित्र हमें जमीन से जुड़े रहने की सीख देता है।
युवाओं को पांच मंत्र
डॉ. कलाम को बच्चों और युवाओं से बात करना सबसे ज्यादा पसंद था। वे देश के हर कोने में जाकर छात्रों से मिलते थे। उन्होंने युवाओं को आगे बढ़ने के लिए कुछ बेहद जरूरी बातें बताई थीं, जिन्हें हर किसी को अपने जीवन में उतारना चाहिए:
- हमेशा बड़ा सोचें, क्योंकि छोटा लक्ष्य रखना एक अपराध की तरह है।
- लगातार ज्ञान हासिल करते रहें, क्योंकि ज्ञान ही आपको दूसरों से अलग बनाता है।
- कठिन परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है, इसलिए मेहनत से कभी पीछे न हटें।
- मुश्किलों और असफलताओं से डरने के बजाय उनसे लड़ना और सीखना सीखें।
- हमेशा अपने काम के प्रति वफादार रहें और राष्ट्रहित को सबसे आगे रखें।
आत्मनिर्भर भारत का सपना
कलाम साहब का विजन बिल्कुल साफ था। वे भारत को एक विकसित राष्ट्र बनते देखना चाहते थे। उनका मानना था कि जब तक देश के ग्रामीण इलाकों का विकास नहीं होगा, तब तक देश आगे नहीं बढ़ सकता। इसके लिए उन्होंने ‘PURA’ (प्रोवाइडिंग अर्बन एमेनिटीज इन रूरल एरियाज) का मॉडल दिया था, जिसका मकसद गांवों में भी शहरों जैसी सुविधाएं पहुंचाना था। आज जब देश आत्मनिर्भर भारत और डिजिटल इंडिया की बात कर रहा है, तो इसकी बुनियाद में कहीं न कहीं डॉ. कलाम के ही विचार काम कर रहे हैं। नितिन गडकरी और जेपी नड्डा ने भी कहा कि विज्ञान, तकनीक और शिक्षा के सही इस्तेमाल से ही हम भारत को फिर से विश्व गुरु बना सकते हैं।
आज डॉ. कलाम हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, उनकी लिखी पुस्तकें और उनका जीवन दर्शन हमेशा देश का मार्गदर्शन करता रहेगा। उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद करने का सबसे अच्छा तरीका यही होगा कि हम उनके दिखाए मार्ग पर चलें, विज्ञान और तकनीक का इस्तेमाल देश की भलाई के लिए करें और एक मजबूत, साक्षर और समृद्ध भारत बनाने में अपना योगदान दें।








