धमदाहा,अंग भारत| बिहार के पूर्णिया जिले के धमदाहा प्रखंड में हिंदू नव वर्ष (विक्रम संवत) के पावन अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा एक भव्य और अनुशासित पथ संचलन का आयोजन किया गया। इस गौरवशाली यात्रा में सैकड़ों की संख्या में पूर्ण गणवेश (यूनिफॉर्म) में सजे स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया, जिससे पूरा कस्बा राष्ट्रभक्ति और पारंपरिक उत्साह के रंग में सराबोर हो गया। यह आयोजन न केवल नए साल की शुरुआत का प्रतीक था, बल्कि इसका सीधा संबंध समाज में एकता, अनुशासन और राष्ट्र सेवा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना भी था। स्थानीय लोगों ने फूल बरसाकर स्वयंसेवकों का स्वागत किया और पूरा माहौल देशप्रेम के नारों से गूंज उठा।
पथ संचलन का मार्ग
यह भव्य पथ संचलन नेहरू चौक पर स्थित धर्मशाला प्रांगण से शुरू हुआ। स्वयंसेवक कदम से कदम मिलाकर अनुशासित ढंग से आगे बढ़ रहे थे। यह यात्रा मुख्य बाजार, प्रखंड परिसर, शहीद स्मारक और बनमनखी रोड से होते हुए आगे बढ़ी। इसके बाद स्वयंसेवकों का काफिला पासवान टोल और कोरियानी टोल से गुजरा। इन सभी रास्तों से गुजरते हुए अंत में यह यात्रा वापस अपने शुरुआती बिंदु नेहरू चौक पर आकर संपन्न हुई। रास्ते भर “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम” और “हिंदू नव वर्ष मंगलमय हो” जैसे गगनभेदी नारों से पूरा इलाका गूंजता रहा।
पारंपरिक तिलक और स्वागत
पथ संचलन की शुरुआत से पहले एक बेहद सुंदर और गौरवपूर्ण दृश्य देखने को मिला। दुर्गा वाहिनी की स्वयंसेविका खुशबू कुमारी और उनकी साथी महिला सहयोगियों ने राष्ट्र सेवा के पथ पर आगे बढ़ रहे स्वयंसेवकों के माथे पर तिलक लगाया। हिंदू परंपरा में तिलक को विजय और शुभ कार्यों की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। तिलक लगाने के बाद महिलाओं ने स्वयंसेवकों को नव वर्ष की मंगलकामनाओं के साथ विदा किया। जैसे ही संचलन आगे बढ़ा, मुख्य बाजार और विभिन्न टोलों में स्थानीय नागरिकों, महिलाओं और बच्चों ने अपने घरों की छतों और दरवाजों से फूलों की भारी बारिश की। सड़कों पर बिछी फूलों की पंखुड़ियां इस बात का प्रमाण थीं कि समाज में इस आयोजन को लेकर कितना गहरा लगाव था।
डॉ. हेडगेवार की जयंती
इस विशेष दिन का महत्व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए दोहरा था। दरअसल, हिंदू नव वर्ष यानी वर्ष प्रतिपदा के दिन ही संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की जयंती भी होती है। कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों ने डॉ. हेडगेवार के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया और उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। समाज को एकजुट करने और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने के लिए डॉ. हेडगेवार के विचार आज भी युवाओं के लिए मार्गदर्शक का काम कर रहे हैं। यही कारण है कि इस दिन स्वयंसेवकों का उत्साह दोगुना दिखाई दे रहा था।
अनुशासन और सामाजिक एकता
इस भव्य आयोजन के महत्व और इसके पीछे के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए संघ के खंड कार्यवाह हितेश गांधी ने विस्तार से बात की। हितेश गांधी ने कहा कि इस पथ संचलन को आयोजित करने का मूल उद्देश्य समाज में संगठन, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की भावना को और अधिक सुदृढ़ करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक अनुशासित समाज ही एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सकता है। इस तरह के आयोजनों से समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आपसी भाईचारा बढ़ता है और युवाओं को अपनी संस्कृति व परंपराओं पर गर्व करने की प्रेरणा मिलती है।
सफल और शांतिपूर्ण आयोजन
धमदाहा में आयोजित इस पूरे कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत इसका अनुशासन रही। सैकड़ों स्वयंसेवकों की मौजूदगी के बावजूद पूरी प्रक्रिया बेहद व्यवस्थित रही। यातायात व्यवस्था में कोई बाधा नहीं आई और न ही आम जनता को किसी तरह की असुविधा का सामना करना पड़ा। स्थानीय पुलिस प्रशासन और नागरिक समाज ने भी इस आयोजन को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में सहयोग दिया। अंत में, नेहरू चौक पर सभी स्वयंसेवकों ने एकत्र होकर राष्ट्र की समृद्धि और शांति के लिए प्रार्थना की और इस तरह एक ऐतिहासिक दिन का सफल समापन हुआ।
हिंदू नव वर्ष का महत्व
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हिंदू नव वर्ष यानी विक्रम संवत की शुरुआत होती है। इस दिन का न केवल धार्मिक बल्कि वैज्ञानिक और प्राकृतिक महत्व भी है। इस समय प्रकृति में नया बदलाव आता है, पेड़ों पर नए पत्ते आते हैं और फसलें पककर तैयार होती हैं। धमदाहा में इस बार इस नव वर्ष को जिस उत्साह के साथ मनाया गया, वह यह दिखाता है कि ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग अपनी सांस्कृतिक जड़ों और ऐतिहासिक विरासत से गहराई से जुड़े हुए हैं। युवा पीढ़ी का इस आयोजन में इतनी बड़ी संख्या में शामिल होना एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है।








