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चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर रजौन में आरएसएस का भव्य पथसंचलन, युगाब्द 5128 और विक्रम संवत 2083 का हर्षोल्लास के साथ स्वागत

रजौन/बांका/अंग भारत। बांका जिले के रजौन प्रखंड में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, हिंदू नववर्ष और बासंतिक चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के रजौन खंड द्वारा एक भव्य और अनुशासित पथसंचलन का आयोजन किया गया। इस उत्सव के साथ ही युगाब्द 5128 और विक्रम संवत 2083 का हर्षोल्लास के साथ स्वागत किया गया, जो ब्रह्मांडीय और वैज्ञानिक काल गणना पर आधारित है। 19 मार्च दिन गुरुवार को नववर्ष की शुरुआत हुई, जिसके ठीक बाद रविवार को आयोजित इस संचलन में दर्जनों स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में कदमताल मिलाते हुए समाज को एकता और राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया। इस अवसर पर स्थानीय लोगों ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक-दूसरे को बधाई संदेश भेजे और नए वर्ष में सुख-समृद्धि की कामना की।

पथसंचलन का मुख्य मार्ग

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का यह संचलन रजौन प्रखंड मुख्यालय मैदान से प्रारंभ हुआ। इसमें चार दर्जन से अधिक पूर्ण गणवेशधारी स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। हाथों में भगवा ध्वज और कदम से कदम मिलाते हुए स्वयंसेवक मुख्य मार्ग से आगे बढ़े। यह यात्रा चकसपिया मोड़ से गुजरते हुए प्रसिद्ध डीएन सिंह महाविद्यालय तक गई। वहां से अनुशासन के साथ वापस घूमकर यह पुनः प्रखंड मुख्यालय मैदान में आकर संपन्न हुई। इस दौरान रास्ते में खड़े स्थानीय नागरिकों ने स्वयंसेवकों का गर्मजोशी से स्वागत किया, जो इस बात का प्रतीक है कि समाज में अपनी संस्कृति के प्रति कितना गहरा जुड़ाव है।

भारतीय नववर्ष का महत्व

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सिंहनान निवासी एवं एसएम कॉलेज भागलपुर के सेवानिवृत्त प्राध्यापक छविलाल यादव ने भारतीय काल गणना की गहराई पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि हमारा नया साल केवल एक तारीख बदलना नहीं है, बल्कि यह नौ ग्रहों और 27 नक्षत्रों की सटीक चाल पर आधारित है। जब पूरी प्रकृति खिल उठती है, पेड़ों पर नए पत्ते आते हैं, फसलें पकती हैं, तब हमारा नववर्ष शुरू होता है। यह पूरी तरह वैज्ञानिक और प्रकृति के अनुकूल है। इसके बाद स्वयंसेवक जीवनदीप ने अपने प्रेरणादायी अमृतवचन पढ़े, जिससे उपस्थित लोगों में ऊर्जा का संचार हुआ। इसके साथ ही अवधेश कुमार ने राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत एक सुंदर एकल गीत प्रस्तुत किया, जिसने कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह राष्ट्रमय कर दिया।

संघ स्थापना और इतिहास

इस बौद्धिक सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में भागलपुर विभाग के सह संघचालक एवं रसायन विभाग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर राणा प्रताप सिंह ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने देश पर हुए विदेशी आक्रमणकारियों के अत्याचारों का इतिहास सामने रखा। उन्होंने बताया कि कैसे विषम परिस्थितियों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक और आद्य सरसंघचालक डॉ. केशव राव बलिराम हेडगेवार ने हिंदू समाज को संगठित करने का बीड़ा उठाया था। संयोग से, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के ही दिन यानी 1 अप्रैल 1889 को डॉ. हेडगेवार का जन्म हुआ था। यही कारण है कि संघ के स्वयंसेवकों के लिए यह दिन वैचारिक और ऐतिहासिक रूप से बेहद खास बन जाता है। प्रोफेसर राणा प्रताप सिंह ने स्वयंसेवकों को याद दिलाया कि कैसे संघ ने अपने 100 वर्षों के संघर्षपूर्ण सफर में राष्ट्र निर्माण और सामाजिक सुधार में अहम भूमिका निभाई है।

पंच परिवर्तन के संकल्प

अपने संबोधन में प्रोफेसर राणा प्रताप सिंह ने संघ के शताब्दी वर्ष के संकल्पों का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिन्हें ‘पंच परिवर्तन’ का नाम दिया गया है। इन संकल्पों का सीधा उद्देश्य समाज को अंदर से मजबूत बनाना और हर नागरिक को उसके दायित्वों का एहसास कराना है।

  • सामाजिक समरसता: समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलना और जाति-पाति के भेदभाव को पूरी तरह समाप्त करना।
  • पर्यावरण संरक्षण: जल संचय करना, प्लास्टिक का उपयोग बंद करना और अधिक से अधिक पेड़ लगाना।
  • कुटुंब प्रबोधन: अपने परिवारों में बच्चों को अच्छे संस्कार देना और आपसी प्रेम को बढ़ावा देना।
  • स्व-आधारित जीवन: स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करना और अपनी जड़ों से जुड़े रहना।
  • नागरीक कर्तव्य: समाज और देश की भलाई के लिए अपने नागरिक कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना।

उपस्थित प्रमुख दायित्वधारी

इस बड़े आयोजन को सफल बनाने में आरएसएस के कई स्थानीय और जिला स्तर के पदाधिकारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से जिला सह कार्यवाह अमरेंद्र कुमार साह, खंड कार्यवाह रंजीत कुमार साह, और सह खंड कार्यवाह जितेंद्र ठाकुर मौजूद रहे। व्यवस्था की जिम्मेदारी खंड व्यवस्था प्रमुख अवधेश कुमार साह और मुख्य शिक्षक चंदन कुमार ने संभाली। इसके अलावा रजौन मंडल कार्यवाह प्रीतम कुमार राव भी इस दौरान पूरी तरह सक्रिय दिखे।

इसके साथ ही क्षेत्र के कई सम्मानित और वरिष्ठ स्वयंसेवकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनमें कुमुद रंजन राव, दिलीप कुमार मंडल, श्रीकांत रजक, ओमप्रकाश सिंह, संदीप कुमार, ई. मनीष कुमार, मधुकर साह, संतोष कुमार साह, मुकेश, सूरज, जीतू, अर्पित, नारायण और सक्षम शामिल थे। इन सभी कार्यकर्ताओं के संयुक्त प्रयास से पूरा आयोजन अनुशासित और सफल रहा, जिसने रजौन के स्थानीय लोगों के मन में राष्ट्रभक्ति और अपनी गौरवशाली सनातनी परंपरा के प्रति एक नई चेतना जगाने का काम किया।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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