नई दिल्ली, अंग भारत। राजधानी दिल्ली के रोहिणी इलाके में क्राइम ब्रांच ने एलपीजी गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए 57 सिलेंडर जब्त किए हैं और एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई तब हुई जब पुलिस को राम विहार में गैस की अवैध रिफिलिंग और जमाखोरी की गुप्त सूचना मिली थी। आरोपी, जो खुद एक गैस एजेंसी में डिलीवरी मैन का काम करता था, सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर महंगे दामों पर गैस बेच रहा था। पुलिस की इस मुस्तैदी ने न केवल एक आपराधिक गिरोह को पकड़ा है, बल्कि रिफिलिंग के दौरान होने वाले संभावित बड़े हादसों को भी टाल दिया है।
छापेमारी की पूरी कहानी
क्राइम ब्रांच (एनआर-1) यूनिट को काफी समय से रोहिणी और उसके आसपास के इलाकों में गैस की कालाबाजारी की खबरें मिल रही थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए डीसीपी पंकज कुमार ने तुरंत एक विशेष टीम बनाई। एसीपी अशोक शर्मा और इंस्पेक्टर पुखराज सिंह के नेतृत्व में पुलिस ने एक जाल बिछाया और सेक्टर-22 स्थित सूरसुमन गैस एजेंसी के पास छापा मारा। मौके पर लोकपाल नाम का 55 वर्षीय आरोपी रंगे हाथों पकड़ा गया, जो राजीव नगर का रहने वाला है।
क्या कुछ हुआ बरामद
पुलिस की तलाशी में अवैध धंधे का एक बड़ा जखीरा सामने आया। बरामदगी की सूची निम्नलिखित है:
- कुल सिलेंडर: 57 एलपीजी गैस सिलेंडर (50 भरे हुए, 2 खाली, 5 आंशिक रूप से भरे हुए)।
- परिवहन साधन: एक टाटा पिकअप गाड़ी का इस्तेमाल गैस की ढुलाई के लिए किया जा रहा था।
- रिफिलिंग उपकरण: गैस ट्रांसफर करने वाली पाइप, नोजल और वजन करने वाली मशीनें।
ये उपकरण किसी भी रिहायशी इलाके के लिए बम के गोले से कम नहीं हैं। अवैध तरीके से गैस ट्रांसफर करना न केवल गैर-कानूनी है, बल्कि इसमें जरा सी लापरवाही से भीषण आग या धमाका हो सकता है।
डिलीवरी मैन का खेल
जांच में जो बात सामने आई, वह चौंकाने वाली है। आरोपी एजेंसी का एक अधिकृत डिलीवरी मैन था, जिसका काम ग्राहकों तक सिलेंडर सुरक्षित पहुंचाना था। लेकिन उसने अपनी जिम्मेदारी को कमाई का जरिया बना लिया। वह सीधे घर तक सिलेंडर ले जाने के बजाय उन्हें बीच रास्ते में अपने वाहन में उतार लेता था। बड़े सिलेंडर से छोटी गैस निकालने की तकनीक का उपयोग करके वह एक ही सिलेंडर से कई ग्राहकों की गैस चोरी करता था। फिर इन खाली या कम गैस वाले सिलेंडरों को बाजार में मोटी रकम पर बेचा जाता था।
सुरक्षा और कानून
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और आवश्यक वस्तु अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। कानून के जानकारों का कहना है कि एलपीजी जैसे ज्वलनशील पदार्थ के साथ छेड़छाड़ करना सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है।
“गैस एजेंसी की मिलीभगत की भी जांच की जा रही है। ऐसे मामलों में केवल डिलीवरी मैन ही नहीं, बल्कि उस लाइसेंस होल्डर की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए जिसके तहत यह गोरखधंधा चल रहा था।” – एक स्थानीय कानून विशेषज्ञ का सुझाव।
आगे क्या होगा?
क्राइम ब्रांच अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस धंधे में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। क्या एजेंसी का मालिक इस रिफिलिंग प्रक्रिया से अनजान था, या फिर इसे एक संगठित अपराध की तरह चलाया जा रहा था? पुलिस का कहना है कि जल्द ही मामले में अन्य गिरफ्तारियां भी संभव हैं। यह कार्रवाई आम जनता के लिए भी एक सबक है—अगर आपको लगता है कि आपका सिलेंडर कम वजन का है या उस पर सील के साथ छेड़छाड़ की गई है, तो तुरंत अपने वितरक से शिकायत करें और जरूरत पड़ने पर पुलिस को सूचित करें। आपकी सतर्कता ही ऐसे गिरोहों की कमर तोड़ सकती है।








