गुवाहाटी,अंग भारत। असम विधानसभा के उपाध्यक्ष नुमल मोमिन ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों पर तीखा प्रहार करते हुए इसे महिलाओं के प्रति उनकी दोहरी मानसिकता का प्रमाण बताया है। मोमिन का मानना है कि संसद में इस बिल पर जिस तरह का विरोधाभासी रवैया विपक्ष ने अपनाया, वह उनके उन तमाम दावों की पोल खोलता है जो वे वर्षों से महिला सशक्तिकरण के नाम पर करते आए हैं। उनके अनुसार, यह बिल केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि आधी आबादी को मुख्यधारा की राजनीति में समान भागीदारी दिलाने का एक ऐतिहासिक अवसर था जिसे विपक्ष ने अपनी संकीर्ण राजनीति की भेंट चढ़ा दिया।
राजनीतिक पाखंड पर सवाल
नुमल मोमिन ने सीधे शब्दों में कहा कि कांग्रेस और उनके सहयोगी दलों का असली चेहरा जनता के सामने आ चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि दशकों तक सत्ता में रहने के दौरान कांग्रेस ने महिलाओं के अधिकारों की सिर्फ बातें कीं, लेकिन जब धरातल पर बदलाव लाने का समय आया, तो वे पीछे हट गए। मोमिन के अनुसार:
- विपक्ष का महिला आरक्षण का विरोध केवल राजनीतिक लाभ के लिए किया गया एक प्रयास है।
- संसद में सकारात्मक चर्चा के बजाय व्यवधान डालना उनकी कार्यसंस्कृति का हिस्सा बन गया है।
- महिला सशक्तिकरण के बड़े-बड़े विज्ञापनों और वास्तविकता के बीच एक बहुत गहरी खाई है।
प्रधानमंत्री के नजरिए का समर्थन
असम विधानसभा के उपाध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संसद में दी गई प्रतिक्रिया का पुरजोर समर्थन किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री ने विपक्ष की जिस मानसिकता को उजागर किया था, आज वही सच साबित हो रही है। मोमिन का तर्क है कि अगर विपक्ष वास्तव में देश की आधी आबादी के प्रति गंभीर होता, तो वे राजनीति से ऊपर उठकर इस बिल के पक्ष में एकजुट नजर आते। लेकिन उन्होंने विकास कार्यों में बाधा डालने की मानसिकता को प्राथमिकता दी, जिससे यह साफ होता है कि उनके लिए ‘परिवारवाद’ और ‘पद’ देश के हित से ऊपर हैं।
राहुल गांधी पर कड़ा प्रहार
इस पूरे मामले पर बात करते हुए मोमिन ने राहुल गांधी की कार्यशैली को भी निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी देश के गौरव और बड़े फैसलों की बात आती है, राहुल गांधी अक्सर विदेश यात्राओं पर होते हैं और वहां भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली बातें करते हैं। मोमिन के मुताबिक, एक विपक्षी नेता के रूप में यह जिम्मेदारी बनती है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश के सकारात्मक फैसलों के साथ खड़ा हो, न कि उसे नीचा दिखाने का कोई अवसर न छोड़े।
विपक्ष की नकारात्मक राजनीति
नुमल मोमिन ने कुछ प्रमुख बिंदु उठाए हैं जो विपक्ष की घेराबंदी करते हैं:
| आरोप | प्रभाव |
|---|---|
| संसदीय व्यवधान | लोकतांत्रिक प्रक्रिया में देरी |
| विदेशी मंचों पर आलोचना | देश की वैश्विक छवि पर असर |
| सुधारों का विरोध | महिला भागीदारी का नुकसान |
सशक्तिकरण की नई राह
असम विधानसभा के उपाध्यक्ष ने यह स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव में रुकने वाली नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भले ही विपक्ष का एक वर्ग इसमें राजनीति ढूंढ रहा हो, लेकिन केंद्र सरकार आने वाले समय में सशक्तिकरण के लिए और भी बड़े और ठोस कदम उठाएगी। उनका मानना है कि आने वाले चुनावों और भविष्य की राजनीति में महिलाएं इस भेदभाव को याद रखेंगी।
अंत में, यह बहस केवल एक बिल तक सीमित नहीं है। यह इस बात का प्रतीक है कि भारत की राजनीति में अब आमजन और विशेषकर महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही हैं। जो दल आज इस बदलाव का रास्ता रोक रहे हैं, उन्हें भविष्य में इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। नुमल मोमिन की ये टिप्पणियां न केवल असम की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर महिला आरक्षण के भविष्य पर एक बड़ी बहस को जन्म दे रही हैं।








