रांची,अंग भारत। हजारीबाग वन भूमि घोटाला मामले में निलंबित आईएएस अधिकारी विनय चौबे को झारखंड हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। मंगलवार को न्यायमूर्ति अनुभा रावत चौधरी की अदालत में सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया गया।
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सुनवाई के बाद सुरक्षित रखा गया था फैसला
इस मामले में पिछले सप्ताह गुरुवार को सुनवाई पूरी हो गई थी। उस दौरान अदालत ने विनय चौबे और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनी थीं। इसके बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाते हुए जमानत याचिका को खारिज कर दिया गया।
वन भूमि की अवैध खरीद-फरोख्त का आरोप
यह पूरा मामला एसीबी द्वारा दर्ज कांड संख्या 11/2025 से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि हजारीबाग में उपायुक्त (डीसी) के पद पर रहते हुए विनय चौबे ने वन भूमि की अवैध खरीद-फरोख्त और जमाबंदी में अनियमितताएं कीं। जांच एजेंसियों के अनुसार, उन्होंने नियमों के विपरीत पांच प्लॉटों की जमाबंदी कराई थी।बताया जा रहा है कि यह जमीन गैरमजरूआ खास जंगल झाड़ी श्रेणी में आती है, जिसे वन संरक्षण अधिनियम के तहत बिना केंद्र सरकार की अनुमति के गैर-वानिकी उपयोग में नहीं लाया जा सकता। इसके बावजूद कथित तौर पर इस जमीन का उपयोग बदलने और मालिकाना हक हस्तांतरित करने की प्रक्रिया पूरी की गई।
साजिश के तहत जमीन का बदला गया मालिकाना हक
जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे मामले में कुछ अधिकारियों और जमीन खरीदार विनय सिंह के साथ मिलकर एक आपराधिक साजिश रची गई। आरोप है कि सुनियोजित तरीके से दस्तावेजों में बदलाव कर जमीन का मालिकाना हक बदला गया।
पहले ही रद्द हो चुकी हैं विवादित जमाबंदियां
गौरतलब है कि मामला उजागर होने के बाद वर्ष 2013 में इन सभी विवादित जमाबंदियों को रद्द कर दिया गया था। इस निर्णय को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने भी सही ठहराया था। इसके बाद मामले की प्रारंभिक जांच एसीबी ने की, जिसमें आरोपों की पुष्टि होने की बात सामने आई।
सरकार की अनुमति के बाद दर्ज हुई प्राथमिकी
प्रारंभिक जांच के बाद एसीबी ने राज्य सरकार से अनुमति लेकर 25 सितंबर 2025 को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की। यह मामला हजारीबाग थाना कांड संख्या 11/2025 के रूप में दर्ज है और तब से इसकी जांच जारी है।अदालत द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद अब विनय चौबे की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। मामले की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी और जांच एजेंसियां इस पूरे प्रकरण में अन्य आरोपितों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।









