चेन्नई,अंग भारत। तमिलनाडु ने लगातार दूसरे साल दो अंकों की आर्थिक विकास दर हासिल करके पूरे देश में अपनी एक अलग धाक जमा ली है। वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य ने 10.83 प्रतिशत की शानदार वास्तविक आर्थिक विकास दर दर्ज की है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत (7.4 प्रतिशत) से कहीं ज्यादा है। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में भी राज्य ने 11.19 प्रतिशत की मजबूती दिखाई थी। यह लगातार दो वर्षों की ऊंची उड़ान यह बताने के लिए काफी है कि राज्य की आर्थिक नीतियां किस दिशा में काम कर रही हैं।
विकास की रफ्तार
केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने जो आंकड़े पेश किए हैं, वे तमिलनाडु के औद्योगिक और सेवा क्षेत्र में हो रहे बड़े बदलावों को दिखाते हैं। जब देश की अर्थव्यवस्था एक सामान्य गति से बढ़ रही थी, तब तमिलनाडु ने दो अंकों के विकास दर का जादुई आंकड़ा पार कर लिया। यह कोई संयोग नहीं, बल्कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार द्वारा लिए गए सख्त फैसलों और योजनाबद्ध विकास का नतीजा है। उद्योग मंत्री टी. आर. बी. राज़ा का मानना है कि राज्य का यह प्रदर्शन अब वैश्विक स्तर पर ध्यान खींच रहा है।
द्रविड़ मॉडल का प्रभाव
मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने इस सफलता का सारा श्रेय ‘द्रविड़ मॉडल’ को दिया है। यह मॉडल केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे निवेश आधारित विकास और सामाजिक समावेश के मिश्रण के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री का कहना है कि उनकी सरकार ने बुनियादी ढांचे (infrastructure) के सुधार के साथ-साथ उन उद्योगों को बढ़ावा दिया है जो रोजगार पैदा करने की क्षमता रखते हैं।
- निवेश को आकर्षित करने के लिए आसान नीतियां।
- लघु और मध्यम उद्योगों (MSME) पर विशेष फोकस।
- डिजिटल बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण।
- कौशल विकास कार्यक्रमों को उद्योगों से जोड़ना।
निवेश से औद्योगिक क्रांति
तमिलनाडु की इस रफ्तार के पीछे बड़ा हाथ उद्योगों के विकेंद्रीकरण का है। सरकार ने सिर्फ चेन्नई ही नहीं, बल्कि राज्य के अन्य हिस्सों में भी निवेश को प्रोत्साहित किया है। ऑटोमोबाइल सेक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में राज्य ने अपनी पकड़ और मजबूत की है। विदेशी निवेशकों के लिए तमिलनाडु अब एक सुरक्षित और लाभदायक केंद्र बनकर उभरा है। राज्य सरकार ने निवेशकों की मुश्किलों को दूर करने के लिए ‘सिंगल विंडो’ क्लियरेंस जैसी सुविधाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया है, जिससे कंपनियों का विश्वास बढ़ा है।
ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य
राज्य सरकार ने साल 2030 तक तमिलनाडु को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का बड़ा लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य सुनने में चुनौतीपूर्ण लग सकता है, लेकिन मौजूदा विकास दर को देखते हुए कई विशेषज्ञ इसे हासिल करने योग्य मान रहे हैं। अगर राज्य इसी गति से आगे बढ़ता रहा, तो वह देश का सबसे प्रमुख आर्थिक इंजन बन जाएगा।
आने वाला समय
| वित्तीय वर्ष | विकास दर (प्रतिशत) |
|---|---|
| 2024-25 | 11.19% |
| 2025-26 | 10.83% |
इस आर्थिक उछाल ने राज्य की राजनीति में भी गरमाहट पैदा कर दी है। चुनाव से पहले सामने आए ये आंकड़े सरकार के लिए एक बड़े ‘रिपोर्ट कार्ड’ की तरह हैं। उद्योग जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रशासन इसी तरह निवेश और नवाचार पर ध्यान देता रहा, तो तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था आने वाले दशकों में दक्षिण एशिया का एक बड़ा हब बन सकती है। यह केवल आंकड़ों की बाजीगरी नहीं, बल्कि उस आर्थिक अनुशासन का परिणाम है जो राज्य के नीति-निर्माताओं ने पिछले कुछ वर्षों में अपनाया है।
तमिलनाडु की यह उपलब्धि भारत के अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण है कि कैसे सही नीतियों और औद्योगिक दूरदर्शिता के साथ विकास के नए कीर्तिमान स्थापित किए जा सकते हैं।
अंत में, यह कहना सही होगा कि तमिलनाडु का ‘स्टालिन मॉडल’ अब अपनी परीक्षा में सफल होता दिख रहा है। अगले पांच साल राज्य के लिए बेहद अहम होंगे, क्योंकि इसी दौरान उसे अपने ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य के और करीब पहुंचना है। युवाओं के लिए नौकरियां, तकनीकी शिक्षा में सुधार और वैश्विक कंपनियों का यहां आना, ये सभी कारक राज्य की भविष्य की दशा और दिशा तय करेंगे।








