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असम में बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने पहुंचे जेपी नड्डा, शिवसागर के नेपाली खूंटी गांव का करेंगे दौरा

गुवाहाटी,अंग भारत। असम में आई भीषण बाढ़ की स्थिति का जमीनी जायजा लेने के लिए केंद्रीयमंत्री जेपी नड्डा खुद राज्य के दौरे पर पहुंचे हैं। वे मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा के साथ बाढ़ से सबसे ज्यादा तबाह हुए शिवसागर जिले के नेपाली खूंटी गांव का दौरा करेंगे, जहां पानी ने सब कुछ उजाड़ दिया है। हालांकि नदियों का जलस्तर अब धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन सड़कों और घरों में जमी कीचड़ और मलबे ने स्थानीय लोगों की मुश्किलें दोगुनी कर दी हैं। ऊपरी असम के मुख्य रूप से चार जिले—शिवसागर, चराईदेव, जोरहाट और गोलाघाट इस आपदा की सबसे बड़ी मार झेल रहे हैं, जहां सरकार और स्वयंसेवी संगठन मिलकर लोगों तक मदद पहुंचाने में जुटे हैं।

वीआईपी दौरा और जमीनी सच

बाढ़ के इस संकट काल में केंद्रीयमंत्री जेपी नड्डा का यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा के साथ वे शिवसागर जिले के उस नेपाली खूंटी गांव में जा रहे हैं, जो बाढ़ की लहरों में पूरी तरह तबाह हो चुका है। ऐसे दौरों का सीधा असर राहत कार्यों की गति पर पड़ता है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इस केंद्रीय दौरे के बाद पुनर्निर्माण के लिए बड़ी मदद मिलेगी। नदियों का पानी भले ही उतर रहा हो, पर पीछे छूटी कीचड़, सड़न और गंदगी बीमारियों का नया खतरा पैदा कर रही हैं। लोग अपने आशियाने को फिर से खड़ा करने की जद्दोजहद में जुटे हैं, जिसमें स्थानीय युवा और स्वयंसेवी संस्थाएं उनकी भरपूर मदद कर रहे हैं।

नुकसान के डराने वाले आंकड़े

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट राज्य में तबाही की पूरी कहानी बयां करती है। असम के अलग-अलग जिलों में स्थिति कितनी नाजुक है, इसे नीचे दिए गए आंकड़ों से आसानी से समझा जा सकता है:

विवरण प्रभावित आंकड़े
कुल प्रभावित जिले 10 (शिवसागर, धेमाजी, गोलाघाट, डिब्रूगढ़, चराईदेव, कामरूप मेट्रो, बिश्वनाथ, लखीमपुर, जोरहाट, नगांव)
प्रभावित राजस्व मंडल 28
प्रभावित गांवों की संख्या 365
कुल प्रभावित आबादी 1,22,137
डूबी हुई कृषि भूमि 15,342.92 हेक्टेयर
बाढ़ से कुल मौतें 89

ये आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं हैं, बल्कि उन हजारों परिवारों का दर्द हैं जिनका सब कुछ पानी में बह गया है। मंगलवार को ही शिवसागर और गोलाघाट जिलों से एक-एक शव बरामद हुआ, जिसके बाद इस सीजन में बाढ़ से जान गंवाने वालों का आंकड़ा बढ़कर 89 तक पहुंच चुका है।

नदियों की स्थिति और चुनौतियां

राहत की बात बस इतनी है कि अधिकांश क्षेत्रों में नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे आ गया है। लेकिन एएसडीएमए की रिपोर्ट के मुताबिक, नुमलीगढ़ इलाके में धनसिरि नदी अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। नदी का यह आक्रामक रुख आसपास के गांवों के लिए लगातार सिरदर्द बना हुआ है। कृषि भूमि का एक बहुत बड़ा हिस्सा यानी 15342.92 हेक्टेयर फसल पानी में डूबी हुई है, जिससे आने वाले समय में किसानों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा होने वाला है। धान के खेत दलदल में बदल चुके हैं और मवेशियों के लिए चारे का भारी अभाव हो गया है।

राहत शिविरों में जिंदगी

बेघर हो चुके लोगों के लिए प्रशासन ने राहत शिविरों का जाल बिछाया है। इस समय असम सरकार राज्य में कुल 55 शिविर चला रही है, जिनमें 39 राहत शिविर और 16 राहत वितरण केंद्र शामिल हैं। इन राहत शिविरों में फिलहाल 12,382 लोग शरण लिए हुए हैं। इसके अलावा, जो लोग शिविरों में नहीं रह रहे हैं लेकिन बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं, ऐसे 5,475 लोगों को राहत वितरण केंद्रों के जरिए राशन और जरूरी सामान मुहैया कराया जा रहा है। इन शिविरों में रह रहे बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य की निगरानी करना इस समय सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

चौतरफा बचाव अभियान

बाढ़ प्रभावित इलाकों में जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने के लिए देश की तमाम बड़ी सुरक्षा एजेंसियां और बल दिन-रात काम कर रहे हैं। इस रेस्क्यू ऑपरेशन में राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), भारतीय सेना, अर्धसैनिक बल, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDRF), और भारतीय वायु सेना (Air Force) पूरी ताकत से जुटे हैं। इसके साथ ही असम पुलिस, अग्निशमन और आपातकालीन सेवाएं (एफ एंड ईएस), स्थानीय सिविल प्रशासन, नागरिक सुरक्षा के प्रशिक्षित स्वयंसेवक और स्थानीय लोग भी इस मुश्किल घड़ी में कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं।

बुनियादी ढांचे की मरम्मत जरूरी

इस प्रलयंकारी बाढ़ ने असम के बुनियादी ढांचे को बुरी तरह झकझोर कर रख दिया है। सैकड़ों सड़कें बह गई हैं, पुलों में दरारें आ चुकी हैं और बिजली के खंभे उखड़ गए हैं। जब तक इन सड़कों और पुलों की मरम्मत नहीं हो जाती, तब तक दूरदराज के गांवों तक राहत सामग्री पहुंचाना बेहद मुश्किल काम है। जेपी नड्डा और डॉ. हिमंत बिस्व सरमा के इस साझा दौरे से यह उम्मीद जगी है कि केंद्र सरकार असम को इस तबाही से उबारने के लिए एक विशेष आर्थिक पैकेज जारी कर सकती है, ताकि सड़कों, स्कूलों और पुलों का निर्माण युद्ध स्तर पर किया जा सके।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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