कोलकाता,अंग भारत। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में कई चौंकाने वाले नतीजे सामने आए, लेकिन जिन नेताओं ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा, उनमें हुमायूं कबीर का नाम प्रमुख रहा। तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर उन्होंने अपनी नई पार्टी ‘आमजनता उन्नयन पार्टी’ (एजेयूपी) का गठन किया और सीधे चुनावी मैदान में उतरकर बड़ा जोखिम उठाया। यह दांव उनके लिए बेहद सफल साबित हुआ।मुर्शिदाबाद जिले की नवदा और रेजिनगर—दोनों सीटों से चुनाव लड़ते हुए हुमायूं कबीर ने शानदार जीत दर्ज की। नवदा सीट पर उन्होंने 27,943 मतों के अंतर से जीत हासिल की, जबकि रेजिनगर सीट पर उनका प्रदर्शन और भी दमदार रहा, जहां उन्होंने 58,876 वोटों के बड़े अंतर से विजय पाई। एक साथ दो सीटों पर जीत ने उन्हें राज्य की राजनीति में एक मजबूत और प्रभावशाली नेता के रूप में स्थापित कर दिया है।
Read more……..बंगाल चुनाव 2026: भाजपा 200 पार, टीएमसी पिछड़ी
नई पार्टी के साथ जोखिम, लेकिन मिला बड़ा फायदा
राजनीतिक रूप से यह चुनाव हुमायूं कबीर के लिए परीक्षा की घड़ी थी। स्थापित दलों को छोड़कर नई पार्टी बनाना और उसी के बैनर तले चुनाव लड़ना आसान नहीं माना जाता। लेकिन उन्होंने इस चुनौती को स्वीकार किया और जनता के बीच अपनी पकड़ साबित की। एजेयूपी का प्रदर्शन भले ही सीमित सीटों तक रहा, लेकिन कबीर की व्यक्तिगत जीत ने पार्टी को पहचान दिलाने का काम किया।
‘आयाराम-गयाराम’ की छवि के बावजूद मिली सफलता
हुमायूं कबीर का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। पिछले 15 वर्षों में उन्होंने कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी—तीनों प्रमुख दलों के साथ काम किया। इसी वजह से उन्हें ‘आयाराम-गयाराम’ की छवि का सामना भी करना पड़ा। बावजूद इसके, इस बार उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की और मतदाताओं ने उन्हें मौका भी दिया।
एआईएमआईएम से गठबंधन और फिर विवाद
चुनाव की घोषणा के बाद हुमायूं कबीर की पार्टी ने असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के साथ सीटों को लेकर समझौता किया था। यह गठबंधन शुरुआत में चर्चा में रहा, लेकिन ज्यादा समय तक टिक नहीं पाया। कुछ दिनों बाद एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उन पर भाजपा के साथ गुप्त समझौते के आरोप लगाए गए।इस विवाद के बाद एआईएमआईएम ने तुरंत गठबंधन से दूरी बना ली। हालांकि, हुमायूं कबीर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना था कि वायरल वीडियो पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए तैयार किया गया है और इसका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है।
चुनाव नतीजों ने बदली राजनीतिक धारणा
सभी विवादों और आरोपों के बावजूद हुमायूं कबीर ने अपने प्रदर्शन से आलोचकों को जवाब दिया। दो सीटों पर बड़ी जीत ने यह साफ कर दिया कि स्थानीय स्तर पर उनकी पकड़ मजबूत है और मतदाताओं ने उनके नेतृत्व को स्वीकार किया है। उनकी यह सफलता आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बना सकती है।










One Response