यमुनानगर,अंग भारत। हरियाणा के यमुनानगर जिले के प्रगतिशील किसान धर्मवीर सिंह कंबोज ने अपनी मेहनत और नवाचार के दम पर न केवल राज्य का, बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है। उन्हें आईआईटी दिल्ली में आयोजित ‘अभ्युदय-2026’ राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान प्रतिष्ठित ‘अंत्योदय सोशल इम्पैक्ट अवार्ड’ में प्रथम स्थान से नवाजा गया है। यह पुरस्कार उनके द्वारा विकसित की गई बहुउद्देशीय प्रसंस्करण मशीन के लिए दिया गया, जिसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा दी है। धर्मवीर सिंह की यह उपलब्धि साबित करती है कि यदि इरादे मजबूत हों, तो सीमित संसाधनों और कम शैक्षणिक योग्यता के बावजूद भी बड़ी क्रांति लाई जा सकती है।
राष्ट्रीय मंच पर बड़ी उपलब्धि
आईआईटी दिल्ली में आयोजित इस भव्य आयोजन में भारत सरकार के नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन, आईआईटी दिल्ली के उन्नत भारत अभियान और विज्ञान भारती जैसे दिग्गजों ने हिस्सा लिया। जब धर्मवीर सिंह का नाम प्रथम पुरस्कार के लिए पुकारा गया, तो वहां मौजूद वैज्ञानिकों और प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी सादगी और तकनीकी समझ की सराहना की। इस सम्मान का मुख्य उद्देश्य उन लोगों को पहचान दिलाना है, जो जमीनी स्तर पर काम करते हुए समाज में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं।
- पुरस्कार: अंत्योदय सोशल इम्पैक्ट अवार्ड (प्रथम स्थान)।
- आयोजन स्थल: आईआईटी दिल्ली।
- उद्देश्य: ग्रामीण तकनीक और सामाजिक सुधार को प्रोत्साहन।
- सहयोगी संस्थाएं: विज्ञान भारती और नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन।
बहुउद्देशीय मशीन की विशेषताएं
धर्मवीर सिंह द्वारा निर्मित मशीन की सबसे बड़ी खूबी इसकी बहुउपयोगिता है। पारंपरिक मशीनों के मुकाबले यह मशीन बहुत कम लागत में कई काम एक साथ करने में सक्षम है। अक्सर किसान अपनी उपज को बाजार में औने-पौने दाम पर बेच देते हैं, लेकिन इस मशीन के आने से वे अब अपनी फसल का प्रसंस्करण कर उसे उच्च मूल्य पर बेच सकते हैं।
इस मशीन का उपयोग मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्यों में होता है:
- फूलों और औषधियों का अर्क: जड़ी-बूटियों की गुणवत्ता को बनाए रखते हुए शुद्ध अर्क निकालना।
- खाद्य प्रसंस्करण: दूध, मौसमी फलों और सब्जियों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उनकी प्रोसेसिंग करना।
- सरल डिजाइन: इसे संचालित करना इतना आसान है कि कम पढ़ा-लिखा किसान भी इसे घर पर इस्तेमाल कर सकता है।
सरकार का प्रोत्साहन और सब्सिडी
तकनीक के विस्तार के लिए सरकार का सहयोग मिलना भी जरूरी है। हरियाणा सरकार के बागवानी विभाग ने इस नवाचार की महत्ता को समझते हुए इस मशीन पर 50 प्रतिशत तक का अनुदान देने का निर्णय लिया है। सरकारी सब्सिडी मिलने से अब छोटे और मध्यम वर्गीय किसान भी इस तकनीक को अपनाने में हिचकिचा नहीं रहे हैं। यह कदम न केवल खेती को लाभकारी बना रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर किसानों के लिए अतिरिक्त आय के स्रोत भी खोल रहा है।
संघर्ष से सफलता का सफर
धर्मवीर सिंह का जीवन किसी प्रेरणा से कम नहीं है। उन्होंने अपनी यात्रा शून्य से शुरू की थी। उनके पास भले ही कोई बड़ी डिग्री नहीं थी, लेकिन उनके पास व्यावहारिक अनुभव (Field Experience) की कमी नहीं थी। उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि आज उनके नवाचार को देश के शैक्षणिक पाठ्यक्रम में भी शामिल किया गया है। राष्ट्रपति भवन में राजकीय अतिथि के रूप में सम्मान पाना उनके संघर्षों की एक बड़ी जीत रही है।
“असली विकास वही है जो गांव की चौखट तक पहुंचे। जब किसान आत्मनिर्भर बनेगा, तभी राष्ट्र आत्मनिर्भर कहलाएगा,” धर्मवीर सिंह का मानना है।
रोजगार और ग्रामीण आत्मनिर्भरता
यह मशीन आज हजारों महिलाओं और किसानों के लिए रोजगार का साधन बन चुकी है। अब वे अपने खेत की उपज को प्रोसेस कर स्वयं के ब्रांड बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। धर्मवीर की तकनीक का असर केवल हरियाणा तक सीमित नहीं है, बल्कि अब अन्य राज्यों के किसान भी उनसे संपर्क कर इस तकनीक को अपना रहे हैं। यह नवाचार अब ग्रामीण विकास का एक ग्लोबल मॉडल बनने की राह पर है।
अंत में, यह कहना सही होगा कि भारत का भविष्य ग्रामीण नवाचारों में ही छिपा है। धर्मवीर सिंह कंबोज जैसे जमीनी स्तर के आविष्कारक न केवल कृषि संकट को दूर कर रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए उद्यमशीलता के नए द्वार भी खोल रहे हैं।








