रजौन/बांका/अंग भारत। दुर्गा पूजा की लंबी छुट्टी के बाद गुरुवार से प्रखंड के सभी सरकारी स्कूल पूरी तरह से खुल गए हैं। पहले ही दिन से स्कूलों में पढ़ाई और दफ्तरी कामकाज में तेजी आ गई है।स्कूल खुलते ही धौनी स्थित प्रखंड संसाधन केंद्र (बीआरसी) के लेखा सहायक मोहम्मद कमरेज आलम ने सभी संकुल समन्वयकों और प्राइमरी से लेकर हाई स्कूल तक के सभी हेडमास्टरों के साथ ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) पर बैठक की।बैठक में उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) देवनारायण पंडित के निर्देशों के बारे में विस्तार से बताया। मुख्य मुद्दा था – कायाकल्प योजना के तहत स्कूलों का रंग-रोगन और मरम्मत।बैठक में क्या-क्या निर्देश दिए गए -1. सबसे पहला काम रंग-रोगन: सरकार ने कायाकल्प योजना के लिए हर स्कूल को 50 हजार रुपये तक की सीमा तय की है। इसमें सबसे पहली प्राथमिकता स्कूल की पुताई और रंग-रोगन है। स्कूल अंदर-बाहर से चमकना चाहिए।2. पैसा बचा तो क्या करना है: अगर रंग-रोगन के बाद भी पैसा बच जाता है तो उस पैसे से स्कूल की दूसरी जरूरी चीजें ठीक करानी हैं। जैसे – बल्ब, पंखा, ट्यूबलाइट लगाना, शौचालय का नल, मोटर, पाइप-टंकी ठीक करना, खिड़की-दरवाजा, ब्लैक बोर्ड की पुताई, टूटे बेंच-डेस्क, अलमारी, किचन शेड की मरम्मत, लैब का सामान और पूरे स्कूल परिसर की सफाई।3. बड़े स्कूलों के लिए: जिन बड़े स्कूलों में 50 हजार से ज्यादा का खर्च आएगा, वहां बाकी का काम कंपोजिट ग्रांट (SNA स्पर्श मॉड्यूल) से कराया जाएगा।4. एक कमरे में कितना खर्च: इंजीनियरों के मुताबिक एक कमरे की अंदर, बाहर और बरामदे सहित पूरी पेंटिंग में औसतन 4 से 5 हजार रुपये लगते हैं। इसी हिसाब से हेडमास्टर अपने स्कूल का प्लान बनाएं।5. पैसा कैसे मिलेगा – ये सबसे जरूरी है: अभी किसी भी स्कूल को एडवांस पैसा नहीं दिया गया है। मतलब पहले हेडमास्टर को अपने स्तर से काम पूरा कराना होगा। काम पूरा होने के बाद बिल (अभिश्रव/ DC विपत्र) और काम पूरा होने का सर्टिफिकेट जमा करना होगा, तभी पैसा खाते में आएगा।6. बिल और कागज में क्या चाहिए: सामान खरीदने का पक्का GST बिल होना जरूरी है। रेगुलर GST वाले बिल पर ‘Taxable Bill’ और कंपोजिशन वाले पर ‘Bill of Supply’ या ‘Tax Included’ लिखा होना चाहिए।मजदूरों का पेमेंट मास्टर रोल पर होगा।हर बिल पर हेडमास्टर के साथ-साथ स्कूल के दूसरे सीनियर शिक्षक का भी साइन जरूरी होगा।7. फोटो-वीडियो रखना है: काम शुरू करने से पहले स्कूल कैसा था और काम के बाद कैसा दिख रहा है, इसका फोटो और वीडियो बनाकर रखना है और विभाग के पोर्टल पर भी डालना है।लेखा सहायक ने सभी को सख्त निर्देश दिया कि दीपावली से पहले एक हफ्ते के अंदर हर हाल में काम पूरा करके बिल जमा कर दें। संकुल समन्वयकों को कहा गया है कि वे रोजाना अपने क्षेत्र के स्कूलों की प्रगति रिपोर्ट लें, ताकि जिला स्तर की रोजाना होने वाली समीक्षा बैठक में रिपोर्ट दी जा सके।








